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रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान पर GST की दरें कम कर सकती है काउंसिल

फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की मीटिंग 10 नवंबर को होनी है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 05, 2017, 03:17 PM IST

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    जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग में कंज्यूमर्स को राहत दी जा सकती है। (फाइल)
    नई दिल्ली.जीएसटी काउंसिल रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों जैसे फर्नीचर, प्लास्टिक के सामान और शैम्पू आदि पर टैक्स की दरें कम करने पर विचार कर सकती है। फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की मीटिंग 10 नवंबर को होनी है। फिलहाल कुछ निश्चित रोजमर्रा की इस्तेमाल की चीजों को 28% जीएसटी के स्लैब में रखा गया है। बता दें कि 1 जुलाई को जीएसटी लागू होने के बाद काउंसिल की मीटिंग हर महीने की जा रही है।

    Q&A में जानें राहत कहां और क्यों

    कहां दी जा सकती है राहत?

    - ऑफिशियल के मुताबिक, उन स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज पर लगने वाले जीएसटी पर भी फिर से विचार कर लागू किया जा सकता है, जिन सेक्टर्स में टैक्स की दरें बढ़ गई हैं।
    क्यों:इसकी वजह ये कि पहले की टैक्स प्रणाली में इन्हें एक्साइज से छूट मिलती थी या फिर VAT की दरें इन पर कम थीं।
    रोजमर्रा की चीजों पर टैक्स में कितनी कटौती?
    - ऑफिशियल के मुताबिक, "जीएसटी के 28 फीसदी टैक्स स्लैब में आने वाले आइटम्स पर लगने वाले टैक्स में सुधार किया जा सकता है। ज्यादातर रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले आइटम्स को 18 फीसदी टैक्स स्लैब में लाया जा सकता है। इसके अलावा फर्नीचर, इलेक्ट्रिक स्विच, प्लास्टिक पाइप्स पर भी दोबारा से विचार किया जा सकता है।"
    क्यों: "GST में हर तरह के फर्नीचर पर 28% टैक्स लगता है। मिडल क्लास फैमिलीज ज्यादातर अनऑर्गनाइज सेक्टर्स के फर्नीचर का इस्तेमाल करती हैं। इसलिए इन सामानों पर टैक्स घटाने की मांग हो रही है। प्लास्टिक के कुछ आइटम्स पर 18% टैक्स लगता है। लेकिन, शॉवर बाथ, सिंक, वॉश बेसिन, सीट और कवर्स, फ्लश आदि पर 18% टैक्स लग रहा है। इसी तरह के प्लास्टिक के सैनेटरी वेयर्स पर 28% टैक्स लग रहा है। इस पर दोबारा विचार कर टैक्स रेट तय किए जाने की जरूरत है।"
    तौलने वाली मशीनों पर कितना असर होगा?
    - "तौलने वाली मशीनों और कम्प्रेशर को अभी 28% टैक्स स्लैब में रखा गया है। इन्हें भी 18% टैक्स स्लैब के दायरे में लाया जा सकता है।'
    क्यों:ऑफिशियल का कहना है कि GST से पहले कम्प्रेशर पर 17.5% टैक्स लगता था। इसमें 12.5% एक्साइज ड्यूटी और 5% वैट होता था। इसलिए इस पर मौजूदा समय में लगने वाले टैक्स पर फिर से विचार किए जाने की जरूरत है।
    पहली भी दी है GST काउंसिल ने राहत?
    - अक्टूबर में हुई जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में ज्वैलर्स, रिटेलर्स और एक्सपोर्टर्स को राहत दी गई थी। आईएमजी ने ज्वैलरी खरीद में 50 हजार की खरीदारी पर पैन की अनिवार्यता को खत्म कर दिया, वहीं कंपोजिशन स्कीम के लिए लिमिट भी 75 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ कर दी। इसके साथ रिटर्न फाइलिंग के लिए 3 महीने की छूट दे दी है।
    अब तक कितने आइटम्स के टैक्स रेट बदले गए?
    - जीएसटी काउंसिल 100 से ज्‍यादा आइटम्‍स के टैक्‍स रेट बदल चुकी है। जीएसटी के तहत गुड्स एंड सर्विसेसज को 5%, 12%, 18% और 28% के चार टैक्‍स स्‍लैब्स में रखा गया है।
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    फर्नीचर, प्लास्टिक के सामान पर GST रेट कम किए जा सकते हैं। (फाइल)
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