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अनसूया साराभाई की जयंती पर गूगल ने बनाया डूडल

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 11, 2017, 03:00 PM IST

बुनकरों और मजदूरों के हक के लिए लड़ने वाली मनसूया साराभाई की 132वीं को गूगल ने अपने अलग अंदाज में मनाया है।
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बुनकरों और मजदूरों के हक के लिए लड़ने वाली मनसूया साराभाई की 132वीं को गूगल ने अपने अलग अंदाज में मनाया है। गूगल ने डूडल बनाकर सामाजिक कार्यकर्ता अनसूया साराभाई को सम्मान दिया है।
साराभाई ने अपना पूरा जीवन बुनकरों और टेक्सटाइल कंपनियों के मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ते हुए बिता दिया। एक संपन्न परिवार में जन्म लेने के बावजूद अनसूया सदा मजदूरों के बीच रहीं और ताउम्र उनके हक की जंग लड़ती रहीं। आइए जानते हैं मजूर महाजन नामक सबसे बड़े संगठन की संस्थापक अनसूया के जीवन से जुड़ी खास बातें।

13 साल की उम्र में शादी


अनसूया साराभाई अहमदाबाद में 11 नवंबर 1885 में एक अच्छे खासे परिवार में पैदा हुई। लेकिन नियति देखिए कि उनके बालकाल में ही उनके माता पिता की मौत हो गई और चाचा ने अनसूया का विवाह भी 13 साल की उम्र में कर दिया गया। ये विवाह किसी कारण टिका नहीं और जल्द ही उनका पति से अलगाव हो गया। इसके बाद अनसूया अपने भाई की मदद से उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू कर दी। उन्होंने इंगलैंड जाकर मेडिकल की डिग्री भी ली।

इंग्लैंड में बनी सामाजिक विचारधारा


इंगलैंड में साराभाई की मुलाकात जॉर्ज बर्नाड शा से हुई और साराभाई सामाजिक विचारोत्तेजक लोगों से मिलने जुलने लगी। उन्होंने वहीं सामाजिक समरसता और हक के लिए लड़ाई के सिद्धान्त सीखे। जब वो भारत लौटीं तो उन्होंने अपने धन से गरीब बच्चों के लिए स्कूल खोले और खुद बच्चों को पढ़ाया।

मोटाबेन का मजूर महाजन


पढ़ाई करके जब साराभाई देश लौटीं तो उन्होंने बुनकरों का बेचागरी भरा जीवन देखा जिससे उन्हें प्रेरणा मिली कि वो उनके हक की लड़ाई में साथ दें। 1920 में साराभाई ने अहमदाबाद में ही बुनकरों और टेक्सटाइल मजदूरों के हक के लिए यूनियन बनाई जिसे नाम दिया गया मजूर महाजन। कहा जाता है कि खुद महात्मा गांधी साराभाई के इस प्रयास से बेहद प्रभावित थे, और वो इसमें साराभाई का साथ दिया करते थे।
साराभाई ने मजदूरों के हक के लिए मालिकों से सेवाओं की मांग की। उनके काम के घंटे निर्धारित करने, बोनस, इत्यादि के ब्योरे बनवाए और जोर दिया कि हर मजदूर के काम के घंटे तय हों ताकि कोई मालिक उसका शोषण न कर सके।
मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर एक बार उन्होंने एक महीने की हड़ताल की। हड़ताल रंग लाई औऱ टेक्सटाइल मजदूरों की मजदूरी 35 फीसदी बढ़ाई गई।
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Web Title: ansuyaa saaraabhaaee ki jynti par gaugal ne banayaa dudl
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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