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'पप्पू', 'फेंकू' से लेकर 'खुजलीवाल', कौन रचता है नेताओं के ऐसे नाम?

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 15, 2017, 11:28 AM IST

मुख्य चुनाव आयोग ने भाजपा को निर्देश दिया है कि वो गुजरात इलेक्शन के दौरान किसी भी विज्ञापन में पप्पू शब्द प्रयोग ना करे
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मुख्य चुनाव आयोग ने भाजपा को निर्देश दिया है कि वो गुजरात इलेक्शन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक विज्ञापनों में पप्पू शब्द का प्रयोग न करें। मालूम हो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का मजाक उड़ाने के लिए भाजपा अपने हर प्रचार में पप्पू शब्द का इस्तेमाल करती आई है।
इसी सिलसिले में चुनाव आय़ोग ने भाजपा को सख्त निर्देश दिए हैं कि वो किसी भी प्रचार या विज्ञापन में पप्पू शब्द का प्रयोग न करे अन्यथा इसे चुनाव की अवमानना माना जाएगा। हालांकि भाजपा ने कहा है कि वो चुनाव आयोग को आश्वस्त कर चुकी है कि चुनाव प्रचार और इलेक्ट्रॉनिक विज्ञापनों में किसी व्यक्ति या समुदाय का उपहास उड़ाने वाले नामों का प्रयोग नहीं किया जा रहा।
बात करें ऐसे उपहास वाले नामों की तो बड़ा सवाल है ये कि इन्हें रचता कौन है। कहां बनते हैं ऐसे नाम, जिनपर जनता चुटकुले गढ़ती है।

सोशल मीडिया बनाता है उपहास के नाम

जवाब है सोशल मीडिया। जी हां राजनैतिक दलों की सोशल मीडिया टीम में विरोधियो के लिए ऐसे नाम गढ़े जाते हैं कि उन पर चुटकुलेबाजी करके जनता का ध्यान खींचा जा सके। जबसे भारत में चुनावी दंगल में साइबर सियासत शुरू हुई है तबसे ही उपहास उड़ाने की प्रवत्ति तेजी से बढ़ी है। इस जंग में जीतता वो है जो दूसरे को ज्यादा जलील या यूं कहें कि उसका ज्यादा उपहास उड़ा पाता है।
पप्पू नाम कहां से आया, सिर्फ पप्पू ही नहीं फेंकू, भगोड़ा, खुजलीवार, चाराखोर जैसे नाम राजनीतिक शख्सियतों का उपहास उड़ाने के लिए सोशल मीडिया पर रचे गए प्रपंच की तरह काम कर रहे हैं। लाखों रुपए की सेलरी लेकर साइबर सेल के लोग इन नामों को गढ़ते हैं और इंटरनेट की जंग में इनका इस्तेमाल हथियार की तरह करते हैं।

जमकर होते हैं फॉरवर्ड

फेसबुक हो या ट्विटर, इंस्टाग्राम हो या व्हाट्सऐप। सोशल मीडिया में राजनेताओं का उपहास उड़ाने का चलन इन्हीं प्लेटफॉर्म से आया है। जनता को क्या चाहिए, मजा और फॉरवर्ड करने के लिए मसाला। वो उसे इन्हीं मोर्चों से मिलता है। धीरे धीरे ये मजाकिया नाम उक्त राजनेता के साथ जोंक की तरह चिपक जाते हैं।
नैतिक तौर पर देखा जाए तो यह गलत है लेकिन लोकतंत्र में सब जायज है औऱ चुनावी नदी में नैया पार करने के लिए इस तरह के मजाकिया नाम बहुत कमाल कर डालते हैं।

क्या नेता बुरा मानते हैं?

भाजपा की सोशल मीडिया टीम ने जहां राहुल गांधी को पप्पू का नाम दिया वहीं विरोधी दलों ने नरेंद्र मोदी को फैंकू का नाम दे दिया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भगोड़ा, मफलरमैन और खुजलीवाल नाम देकर सोशल मीडिया पर तरह तरह के चुटकुले गढ़े जाते हैं। हालांकि राजनेता बुरा नहीं मानते, न ही विरोध करते हैं लेकिन उपहास की ये परंपरा कहां तक जाएगी, ये कहना मुश्किल है।
पिछले लोकसभा चुनावों में ट्विटर पर #feku के नाम से मोदी के नाम पर जमकर चुटकुलेबाजी हुई। वहीं #pappu के नाम पर राहुल गांधी को लेकर जोक्स बने। हालांकि इन जोक्स और हल्की फुल्की चुटकुलेबाजी से राजनेताओं की छवि को नुकसान नहीं पहुंचता लेकिन इन्हीं बातों में अगर दुर्भावना आ जाए तो मामला बड़ा होते औऱ अदालतों में जाते देर नहीं लगती।
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Web Title: pppu, fenku se lekar khujlivaal, kaun rchtaa hai netaaon ke aise naam?
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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