Hindi News »National »Latest News »National» PM Narendra Modi Meets M. Karunanidhi In Chennai, Here Is All You Need To Know

करुणानिधि और नरेंद्र मोदी की मुलाकात के क्या हैं मायने

चेन्नई के एक दिन के दौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 06, 2017, 04:19 PM IST

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चेन्नई के एक दिन के दौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। राजनीति में एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले मोदी औऱ करुणानिधि की इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
हालांकि जहां भाजपा ने इस मुलाकात को केवल शिष्टाचार के नजरिए से हुई भेंट कहा है वहीं डीएमके ने भी कहा है कि इसके राजनीतिक मायने न निकाले जाएं फिर भी मीडिया में इस मुलाकात के कई पहलू खोजे जा रहे हैं।

अखबार केवल खबर नहीं देते


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिल भाषा के अखबार दीना थांती की 75वीं सालगिरह पर आयोजित एक आयोजन में भाग लेने के लिए आज चेन्नई में थे। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि यह अखबारों के ऊपर निर्भर करता है कि केवल खबर देने के साथ साथ सोच को भी बदलें। उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है औऱ उसे इसी तरह महत्वपूर्ण काम करने चाहिए। उन्होंने कहा कि आजकल मीडिया केवल राजनीति पर फोकस करता है जबकि भारत राजनीति से बहुत ज्यादा है।

दस मिनट की मुलाकात


इसी के बीच समय निकालकर चेन्नई में करुणानिधि के आवास पर पहुंचे और दस मिनट तक उनके साथ रहे। इस दौरान मोदी ने करुणानिधि का हाल चाल जाना और उन्हें दिल्ली आने का न्यौता भी दिया। सूत्रों के मुताबिक मोदी ने करुणानिधि के परिवार के अन्य सदस्यों से भी मुलाकात की।

क्या लग रही हैं अटकलें


नरेंद्र मोदी की करुणानिधि के घर जाकर उनसे मुलाकात करना वाकई चौंकाने वाली खबर है क्योंकि इससे पहले मोदी कभी करुणानिधि से मिलने नहीं गए। ये वो समय है जब एआईडीएमके के दो अलग अलग धड़ों को एक करने में कामयाब रहे मोदी अपने धुर विरोधी नेता से मिलने पहुंचे हैं। एक तरफ करुणानिधि के बेटे स्टालिन मोदी सरकार के खिलाफ गरज रहे हैं तो दूसरी तरफ वही स्टालिन अपने पिता के घर में मोदी का एक पुराने दोस्त की तरह स्वागत कर रहे हैं।

क्या विकल्प की तलाश में हैं मोदी?


कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा दक्षिण में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए विकल्प तलाश रही है। दरअसल भाजपा को लग रहा है कि दो धुरों में बंट चुकी एआईडीएमके भले ही ऊपर से मजबूत दिख रही हो लेकिन अगले चुनावों से पहले इसके बीच फिर फूट पड़ेगी और इसका नुकसान भाजपा को भी होगा।
ऐसे में भाजपा डीएमके की तरफ देख रही है ताकि अगर एआडीएमके के हाथ से सत्ता निकलती है तो भी एक सहायक दल के रूप में भाजपा डीएमके के साथ सत्ता में शामिल हो सके। हालांकि ये केवल कयास भर ही हैं क्योंकि दक्षिण की राजनीति वाकई जटिल है।
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