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समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिए ISRO की ली जाएगी मदद, सैटेलाइट से होगी निगरानी

भारत की समुद्री सीमा करीब 7,516 किमी लंबी है। मुंबई हमले के बाद सरकार समुद्री सीमा पर सुरक्षा सख्त करते जा रही है।

Danik Bhaskar | Nov 25, 2017, 10:18 AM IST
गृह मंत्रालय के अधिकारी के मुत गृह मंत्रालय के अधिकारी के मुत

नई दिल्ली. केंद्र सरकार समुद्री सुरक्षा को बेहद मजबूत करने की तैयारी कर रही है, ताकि वहां की हर हलचल पर पैनी नजर रखी जा सके। इसके लिए वह इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के सैटेलाइट तस्वीरों की मदद लेगी। इसके जरिए संदिग्ध शिप और बोट की निगरानी की जाएगी। इसरो अगले साल मार्च तक 1000 ट्रांसपोंर्डर देगा। गृह मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, 20 मीटर लंबी बोट के लिए सैटेलाइट निगरानी का प्रपोजल रखा गया है।

भारत ये कदम क्यों उठा रहा है?
- 2008 के 26/11 मुंबई आतंकी हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी। तब करीब 10 आतंकी पाकिस्तान से अरब सागर होते हुए मुंबई में घुसे थे। इसके बाद से ही भारत समुद्र की सीमाओं को लेकर चौकस हो गया था।

- अभी भी इंटेलिजेंस एजेंसियां ऐसे ही और हमलों पर इनपुट देती रहती हैं।

क्या कदम उठा रही है सरकार?
- अब तक 19.74 लाख मछुआरों का बायोमीट्रिक आइडेंटिटी कार्ड के लिए रजिस्ट्रेशन हो चुका है, जिनमें से 18.60 लाख को आईडी जारी किया जा चुका है। बोट की मॉनिटरिंग के लिए 20 मीटर से ज्यादा लंबी सभी बोटों पर ऑटोमैटिक आइडेंटिटिफिकेशन सिस्टम इन्स्टॉल किया जाएगा।
- उधर, इंटरनेशनल मैरीटाइम बाउंड्री लाइन और बहुत गहरे समुद्री इलाके में आसानी से निगरानी के लिए तटीय और केंद्र शासित प्रदेश बोटों पर पर कलर कोडिंग कर रहे हैं। अब तक 46 कोस्टल रडार लगाए जा चुके हैं, जबकि 235 गश्ती बोटों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दी जा चुकी हैं। वहीं, 131 तटीय पुलिस स्टेशनों को मंजूरी मिल चुकी है।

7, 516 किमी है भारत की समुद्री सीमा
- भारत की समुद्री सीमा करीब 7,516 किमी लंबी है। ये गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और वेस्ट बंगाल और दमन और द्वीप, लक्ष्यद्वीप, पुड्डुचेरी और अंडमान और निकोबार द्वीप से होकर जाती है।