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किस आधार पर दिल्ली सरकार ने ऑड-ईवन लागू किया? NGT आज करेगा सुनवाई

गुरुवार को अरविंद केजरीवाल ने 13 से 17 नवंबर तक ऑड-ईवन स्कीम लागू करने के ऑर्डर दिए थे।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 10, 2017, 11:40 AM IST

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नई दिल्ली. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कहा कि दिल्ली सरकार ऑड-ईवन फॉर्मूला इस तरह से लागू नहीं कर सकती। NGT ने कहा कि दिल्ली सरकार ये साबित करे कि ऑड-ईवन स्कीम से पॉल्यूशन घटेगा, वरना हम इस पर रोक लगा देंगे। इस मामले पर शनिवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। इस बीच, दिल्ली सरकार ने रोजाना सफर करने वालों के लिए डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा का एलान किया है। बता दें कि गुरुवार को अरविंद केजरीवाल ने 13 से 17 नवंबर तक ऑड-ईवन स्कीम लागू करने के ऑर्डर दिए थे।

दिल्ली सरकार से और क्या कहा NGT ने

- NGT ने कहा, "जब हालात थोड़े सुधर रहे हैं तो सरकार ऑड-ईवन लागू करने की कोशिश कर रही है। अगर आप चाहते तो इसे थोड़ा पहले लागू कर सकते थे। अब इसे लागू करने से लोगों को परेशानी होगी। ऑड-ईवन स्कीम तभी शुरू की गई जब हवा में घुले एलीमेंट्स का लेवल 300 पार कर गया।"
- "आपने (दिल्ली सरकार) ने सालभर के भीतर कुछ भी नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कभी भी इस स्कीम को लागू करने को नहीं कहा था। SC और NGT ने 100 से ज्यादा सुझाव दिए थे, ताकि पॉल्यूशन को रोका जा सके, लेकिन आपने हमेशा ऑड-ईवन का ऑप्शन ही चुना। दिल्ली सरकार को इस फॉर्मूला को लागू करने का स्पष्टीकरण देना होगा।"
- एनजीटी ने दिल्ली सरकार ने पूछा, "आपने टू-व्हीलर्स और महिलाओं को स्कीम से बाहर क्यों रखा?"
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए फ्री सफर
- दिल्ली के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर कैलाश गहलोत ने ट्वीट किया, "ऑड-ईवन के दौरान पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार डीटीसी और क्लस्टर बसों में 13-17 नवंबर के बीच रोजाना सफर करने वालों को मुफ्त यात्रा की सुविधा देगी। मुख्यमंत्री केजरीवाल का कहना है कि ये कदम लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए प्रोत्साहित करेगा।'
- ऑफिशियल डाटा के मुताबिक, दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के पास 4000 बसों का काफिला है। इसके अलावा 1600 क्लस्टर बसों से भी ज्यादा हैं। मेट्रो की सुविधा भी है। डीटीसी बसों से हर रोज करीब 35 लाख पैसेंजर्स सफर करते हैं।
दिल्ली में छिन रहा जीने का हक, हेलिकॉप्टर से बारिश क्यों नहीं कराते
  • गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते पॉल्यूशन को लेकर एनजीटी ने दिल्ली सरकार, म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशंस और पड़ोसी राज्यों को फटकार लगाई। कहा- यह स्मॉग जीने का हक छीन रहा है। हेलिकॉप्टर से क्लाउड सीडिंग करके आर्टिफीशियल बारिश क्यों नहीं करवाते? अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो लोग हॉस्पिटल में नजर आएंगे। ट्रिब्यूनल ने अपने अगले आदेश तक यहां सभी तरह की इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज पर रोक लगा दी।
  • "पॉल्यूशन मामले में सारी कॉन्स्टिट्यूशनल अथॉरिटीज और उनसे जुड़ी बॉडीज बुरी तरह फेल रहीं। यह जिम्मेदारी सभी की बनती है।"
  • एनजीटी ने दिल्ली से सटे दूसरे राज्यों जैसे- पंजाब, हरियाणा को भी फटकार लगाई। पूछा कि ऐसे बदतर हालात में वो कितने संजीदा हैं।"

सरकार लोगों को सही एन्वायरन्मेंट मुहैया करवाए

  • एनजीटी ने ये भी कहा कि "कॉन्स्टीट्यूशन का आर्टिकल 21 और 48 के तहत सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह लोगों को साफ और सही एन्वायरन्मेंट मुहैया कराए।"
  • "सीपीसीबी (सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड) की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली-एनसीआर में हवा खतरनाक हो गई है। पीएम 10 का लेवल 100 तक होना चाहिए, जो कल (बुधवार) को 986 हो गया। वहीं, पीएम 2.5 का लेवल 60 होना चाहिए, हो गया 420। ये हालत पिछले हफ्ते से बने हुए हैं।"
  • "दिल्ली सरकार ने पॉल्यूशन से निपटने के लिए क्या कदम उठाए? नियमों के खिलाफ जाने वाले कितने लोगों को चालान जारी किए गए? कितनी कंस्ट्रक्शन साइट्स बंद की गईं? हैलिकॉप्टर का इस्तेमाल करके आर्टिफीशियल बारिश क्यों नहीं कराई जाती? जहां पीएम 10 का लेवल 600 माइक्रोग्राम तक पहुंचे वहां पानी का छिड़काव करें।"
  • "अगली सुनवाई तक दिल्ली में कोई भी इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज नहीं होगी। सभी पब्लिक अथॉरिटी पॉल्यूशन पर नजर रखने के लिए एक-एक ऑफिसर तैनात करें।"

दिल्ली में किस कारण कितना प्रदूषण

पीएम 2.5


गाड़ियों के धुएं से बढ़ता है पीएम 2.5 : 25%

आईआईटी कानपुर की जनवरी 2016 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में वाहनों से 25% तक पॉल्यूशन होता है। ये प्रदूषित कण वातावरण में फैल कर पीएम 2.5 जैसे जानलेवा प्रदूषित कणों को बढ़ा रहे है।

कोयले व धुएं की राख से प्रदूषण : 5%

दिल्ली में रेस्टोरेंट, फैक्ट्री, इंडस्ट्रीयल एरिया में कोयला का इस्तेमाल भी किया जाता है। प्लास्टिक हो या कोई भी मटेरियल, इनसे जो राख बचती है, उससे उड़ने वाला धुआं पीएम 2.5 के स्तर को 5 प्रतिशत तक बढ़ा देता है।

इंडस्ट्रियां बढ़ाती हैं सेकंडरी पॉल्यूटेंट्स : 30%

एक्सपर्ट का कहना है कि नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसे अन्य पॉल्यूटेड पार्टिकल्स वातावरण में फैल रहे हैं। इन्हें इंडस्ट्रीज व फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं बढ़ा रहे हैं जो 30% है।

कचरा जलने से फैलने वाला प्रदूषण : 8%

गाजीपुर, ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइटों में अक्सर कूड़ा जल जाता है। दिल्ली के वातावरण में इसका योगदान पीएम 2.5 के स्तर को बढ़ाने में 8% प्रतिशत है।

पराली से होने वाला पॉल्यूशन : 26%

प्रदूषण का दूसरा बड़ा फैक्टर पराली है, जिससे पॉल्यूशन लेवल भयावह स्थिति में पहुंच जाता है। पीएम 2.5 को बढ़ाने में पराली का 26 प्रतिशत तक योगदान है।

रोड डस्ट व कंस्ट्रक्शन से होने वाला प्रदूषण : 6%

आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम 2.5 का लेवल बढ़ाने में रोड डस्ट व कंस्ट्रक्शन से फैलने वाले प्रदूषण का कॉन्ट्रिब्यूशन 6 प्रतिशत तक है।

पीएम-10

रोड डस्ट और कंस्ट्रक्शन : 56%

आबोहवा में सबसे ज्यादा पीएम 10 रोड डस्ट और कंस्ट्रक्शन साइटों से बढ़ता है। इनसे 56% स्तर बढ़ जाता है।

इंडस्ट्री व फैक्ट्रियों का धुआं : 20%

प्रदूषण फैलाने में फैक्ट्रियों व इंडस्ट्रीज का काफी योगदान है। यह पीएम 10 का स्तर 20 प्रतिशत तक बढ़ा रहा है।
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