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पैराडाइज पेपर्स: सरकार ने दिए जांच के आदेश: CBDT; 714 भारतीयों के नाम

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 06, 2017, 07:09 PM IST

पैराडाइज पेपर्स की लिस्ट में 180 देशों के नाम हैं। नामों के लिहाज से इस लिस्ट में भारत 19वें नंबर पर है।
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    वॉशिंगटन/ नई दिल्ली.पैराडाइज पेपर्स में 714 भारतीय कंपनियों और हस्तियों का नाम आने के बाद सरकार ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही मल्टी एजेंसी ग्रुप बनाकर इसकी मॉनिटरिंग करने के लिए कहा है। यह जानकारी सीबीडीटी की ओर से दी गई। इस ग्रुप में सीबीडीटी, ईडी, आरबीआई और एफआईयू के अफसर शामिल होंगे। इसके मुखिया सीबीडीटी चेयरमैन होंगे। उधर, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) भी इस मामले की जांच करेगी। सेबी ने कहा है कि इस मामले में वह सख्त कदम उठाएगी। पैराडाइज पेपर्स ने सोमवार को कई ताकतवर शख्सियतों और सेलिब्रिटीज की टैक्स चोरी का खुलासा किया। रिपोर्ट में उन फर्मों और ऑफशोर कंपनियों के बारे में बताया गया है, जो दुनियाभर में अमीरों का पैसा विदेशों में भेजने में उनकी मदद करती हैं। पनामा लीक के 18 महीने बाद अब पैराडाइज पेपर्स सामने आए हैं।

    11 Q&A में जाने पूरा मामला


    Q: कैसे सामने आया?
    A: बरमूडा की फर्म Appleby और सिंगापुर की Asiaciti समेत दुनिया की 19 टैक्स हेवन्स कंट्रीज में ताकतवर शख्सियतों और सेलिब्रिटीज के इन्वेस्टमेंट की जांच की गई।
    - इसकी लिस्ट में 180 देशों के नाम हैं। नामों के लिहाज से इस लिस्ट में भारत 19वें नंबर पर है।
    Q: किस फर्म के ज्यादातर डॉक्युमेंट्स?
    A:जिन डॉक्युमेंट्स की छानबीन की गई है, उनमें से ज्यादातर बरमूडा की लॉ फर्म Appleby के हैं।
    - 119 साल पुरानी यह कंपनी वकीलों, अकाउंटेंट्स, बैंकर्स और अन्य लोगों के नेटवर्क की एक मेंबर है। इस नेटवर्क में वे लोग भी शामिल हैं, जो अपने क्लाइंट्स के लिए विदेशों में कंपनियां सेटअप करते हैं और उनके बैंक अकाउंट्स को मैनेज करते हैं।
    Q: किस तरह से मदद करती हैं लीगल फर्म्स?
    A: लीगल फर्म्स अपने क्लाइंट को किसी दूसरे देश में ऑफशोर कंपनी बनाने में मदद करती हैं, ताकि वे टैक्स देने से बच सकें।
    Q: किन भारतीयों और फर्म के नाम?
    A: इस लिस्ट में कुल 714 भारतीयों के नाम शामिल हैं। इनमें अमिताभ बच्चन, केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा, बीजेपी सांसद रवींद्र किशोर सिन्हा, कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया और संजय दत्त की पत्नी मान्यता (दिलनशीं नाम से) हैं।
    - सन टीवी (एयरसेल-मैक्सिस केस), एस्सार-लूप (2जी केस), SNC लावलिन (इसमें केरल के सीएम पी.विजयन का नाम आया था, हालांकि बाद में हट गया) का भी नाम है।
    Q: पैराडाइज में भारत के दिग्गजों पर किस तरह के आरोप?
    A: अमिताभ बच्चन- उन्होंने 2004 से पहले बरमूडा की एक कंपनी में पैसे लगाए।
    - जयंत सिन्हा: वे Omidyar Network ने मैनेजिंग डायरेक्टर थे। ओमिडयार ने D.Light Design में इन्वेस्टमेंट किया। रिकॉर्ड्स बताते हैं कि सिन्हा डी.लाइट में डायरेक्टर थे। 2006 में सैन फ्रांसिस्को में डी.लाइट बनाई गई थी।
    - बीजेपी के राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा: इनके भी कई ऑफशोर कंपनियों में इन्वेस्टमेंट के दस्तावेज मिले हैं। सिक्युरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विस (SIS) के फाउंडर रहे सिन्हा का नाम माल्टा लिस्ट में भी है।
    - विजय माल्या: Appleby के डॉक्युमेंट्स बताते हैं कि कैसे माल्या की यूनाइटेड स्पिरिट इंडिया (USI) ने ऑफशोर कंपनियों से लाखों डॉलर का लोन लिया।
    - सन ग्रुप: नंदलाल खेमका ने स्थापित की थी। इसे Appleby का दुनिया का सबसे बड़ा क्लाइंट बताया गया है।
    Q: क्या बोले जयंत सिन्हा?
    A: "मैं पूरा डिटेल इंडियन एक्सप्रेस को मुहैया करा चुका हूं। मैं ओमिडयार नेटवर्क और उससे जुड़े डी.लाइट बोर्ड से जुड़ा था। सारे ट्रांजैक्शन लीगल तरीके से किए गए। ट्रांजैक्शन्स की सारी जानकारी अथॉरिटीज को बताई गई थीं।"
    - "ओमिडयार छोड़ने के बाद मुझसे डी.लाइट बोर्ड का इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में कंटीन्यू करने को कहा गया। लेकिन केंद्रीय मंत्री बनने के बाद मैंने तुरंत डी.लाइट बोर्ड से इस्तीफा दे दिया।"
    Q: दुनिया की कौन-सी ताकतवर शख्सियतों का विदेशों में इन्वेस्टमेंट?
    A: ट्रम्प के विदेश और कॉमर्स मंत्री समेत 13 अफसर। ब्रिटेन की क्वीन एलिजाबेथ II। कनाडियन पीएम जस्टिन ट्रूडो के लिए पैसा जुटाने वाले स्टीफन ब्रोनफमैन।
    - इनके अलावा पाक के पूर्व पीएम शौकत अजीज समेत दुनिया के 120 पॉलिटिशियन्स के नाम हैं।
    Q: क्या है पैराडाइज पेपर्स, कितने डॉक्युमेंट्स मिले?
    A: जर्मन अखबार Süddeutsche Zeitung को बरमूडा की कंपनी Appleby, सिंगापुर के Asiaciti ट्रस्ट और टैक्स चोरी करने वालों का स्वर्ग समझे जाने वाले 19 देशों में कराई गई कॉरपोरेट रजिस्ट्रियों से जुड़े करीब एक करोड़ 34 लाख डॉक्युमेंट्स मिले।
    - Süddeutsche Zeitung वही अखबार है, जिसने 18 महीने पहले पनामा पेपर्स का खुलासा किया था।
    - जर्मन अखबार ने ये डॉक्युमेंट्स इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ ) के साथ साझा किया।
    - ICIJ ने अपनी वेबसाइट पर भी दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आए तमाम नामों की लिस्ट जारी की है, जिसे आप www.icij.org पर भी देख सकते हैं।
    Q: कितने दिन चला इन्वेस्टिगेशन?
    A:10 महीने से ज्यादा। 40 इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में पब्लिश किया जाएगा।
    Q: Appleby क्या है?
    A: 119 साल पुरानी लीगल फर्म हैं। 1890 में मेजर रेगिनाल्ड ने शुरू की।
    - ये दुनिया भर की कंपनियों, फाइनेंशियल इंस्टीटयूट्स, सेलिब्रिटीज और अमीरों को सलाह देती है।
    - इस कंपनी में 740 इम्प्लॉइज काम करते हैं। वहीं, इसके पास 200 एडवोकेट और 60 से ज्यादा पार्टनर हैं। 10 देशों में दफ्तर हैं।
    Q: कैसे बनती हैं ऑफशोर कंपनियां?
    A: एडवाइज की आड़ में कुछ फर्म्स ऑफशोर कंपनियां बना देती हैं। यानी आप फीस दीजिए और सीक्रेट और आसान टैक्स सिस्टम वाले देशों (टैक्स हेवन्स) में कंपनियां बना लीजिए। लीगल फर्म लोगों की ऑफशोर कंपनियां बनाती हैं जो संबंधित देशों के टैक्स नियमों से तो चलती हैं, लेकिन रियल ओनरशिप को छिपा देती हैं।
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