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दिल्ली में पॉल्यूशन कम, कंस्ट्रक्शन के काम पर बैन हटा; ट्रकों की आवाजाही भी शुरू

8 नवंबर को पॉल्यूशन का लेवल सीवियर (खतरनाक) पर आने के बाद हेल्थ इमरजेंसी लागू की गई थी।

Dainik Bhaskar

Nov 16, 2017, 12:48 PM IST
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नई दिल्ली.    दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में हाफ मैराथन को परमिशन दे दी है। वहीं, एन्वायरन्मेंट एंड पॉल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी (EPCA) ने दिल्ली-एनसीआर में पॉल्यूशन को लेकर इमरजेंसी उपायों को हटा लिया है। इसके तहत कंस्ट्रक्शन के कामों पर लगा बैन हटा लिया गया है। साथ ही, अब यहां ट्रकों की एंट्री हो सकेगी। अथॉरिटी ने दिल्ली-एनसीआर में पार्किंग चार्जेज घटाने के आदेश भी दिए हैं। उधर, एनजीटी ने राजधानी के सभी स्कूल-कॉलेजों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना जरूरी कर दिया है। बता दें कि 8 नवंबर को पॉल्यूशन का लेवल सीवियर (खतरनाक) हो जाने के बाद हेल्थ इमरजेंसी लागू की गई थी।

 

 

ऑर्गनाइजर्स ने कोर्ट से की थी अपील

- दिल्ली हाईकोर्ट ने मैराथन के ऑर्गनाइजर्स को प्लान के मुताबिक आयोजन करने को कहा है।

- ऑर्गनाइजर्स ने कोर्ट को बताया था कि जो रनर्स नाम वापस लेना चाहते हैं, उनके लिए रिफंड पॉलिसी बनाई गई है। साथ ही, मैराथन के दौरान किसी को दिक्कत होने पर मेडिकल सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। 

 

EPCA ने दिल्ली, यूपी, पंजाब और हरियाणा को लिखा लेटर

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईपीसीए के चेयरपर्सन भूरे लाल ने गुरुवार को दिल्ली, यूपी, पंजाब और हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी को लेटर लिखा है। इसमें कहा गया है कि इमरजेंसी उपायों को तुरंत प्रभाव से हटाया जाए। अब एयर क्वालिटी ठीक है, लिहाजा सख्त एक्शन की कोई जरूरत नहीं है।
- हालांकि, ईपीसीए ने ये भी कहा है कि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) की सीवियर कैटेगरी को देखते हुए दिल्ली के बदरपुर थर्मल प्लान्ट, ईंट भट्टियों, हॉट मिक्स प्लान्ट और स्टोन क्रशर्स पर बैन लागू रहेगा। 

 

और क्या बोले भूरे लाल?

- "हम हालात पर नजर रखे हुए हैं। हमने भारतीय मौसम विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम संस्थान (IITM) को भी सूचना दे दी है कि हवा में नमी के चलते आने वाले दिनों में पॉल्यूशन का लेवल बढ़ सकता है।"
- "अगर स्थिति सुधरती है और एयर क्वालिटी स्थिर रहती है तो भी हम सीवियर कैटेगरी के आधार पर ही रिव्यू करेंगे।"

 

स्कूल-कॉलेजों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूरी: NGT

 

- उधर, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गुरुवार को दिल्ली के सभी स्कूल और कॉलेजों में खुद के खर्च पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का ऑर्डर दिया। इसके मुताबिक, अगर दो महीने के अंदर स्कूल-कॉलेजों ने ऑर्डर नहीं माना तो उनसे 5 लाख रुपए जुर्माना वसूला जाएगा।  

 

 

दिल्ली में पॉल्यूशन बढ़ाने वाले PM 2.5 के लिए ये फैक्टर्स जिम्मेदार

 

25% पॉल्यूशन गाड़ियों के धुएं की वजह से
- ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की तरफ से जो पीयूसी जारी किया जाता है, उसकी तकनीक 10 साल पुरानी है। इस कारण गाड़ियों को जारी किए गए सर्टिफिकेट के बावजूद भी उनसे पॉल्यूशन फैल रहा है। 
- आईआईटी कानपुर की स्टडी के मुताबिक, इस 25% पॉल्यूशन में 33% हिस्सा टू-व्हीलर्स और 46% हिस्सा ट्रकों का है।
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में 10 हजार से ज्यादा बसों की जरूरत है। लेकिन सरकार के पास सिर्फ 3 हजार बसें ही हैं। इसलिए लोगों का रुझान प्राइवेट गाड़ियों की ओर बढ़ रहा है।

 

30% पॉल्यूशन इंडस्ट्रीज के चलते
नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड समेत इंडस्ट्रीज-फैक्ट्रीज से निकलने वाला धुआं पॉल्यूशन बढ़ा रहा है। एन्वायरन्मेंटलिस्ट विक्रांत तोंगड़ ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में 20 हजार से ज्यादा फैक्ट्रियां चल रही हैं। इमरजेंसी की नौबत आने के बाद ही दिल्ली में इसकी रोकथाम के लिए प्लानिंग की जाती है। 

 

26% पराली 
- यह पीएम 2.5 को बढ़ाता है। द एनर्जी रिसोर्सेस एंड इंस्टीट्यूट के एसोसिएट डायरेक्टर सुमित शर्मा ने बताया कि एग्रीकल्चरल बर्निंग पर रोक नहीं लग पा रही है। नवंबर के समय हर साल पंजाब-हरियाणा में क्रॉप बर्निंग देखी जा रही है।
- किसानों को पराली के जलाने के बजाय दूसरा ऑप्शन देना बेहद जरूरी है। कुछ किसानों को सीडर मशीनें भी दी गईं। फसलों के बचे हिस्सों को जलाने की जगह इस मशीन के जरिए उन्हें मिट्टी में घोला जा सकता है।

 

5% कोयले-धुएं की राख
दिल्ली में रेस्टोरेंट, फैक्ट्री और इंडस्ट्रियल एरिया में कोयला का इस्तेमाल भी किया जाता है। प्लास्टिक हो या कोई भी मटेरियल, इनसे जो राख बचती है, उससे उड़ने वाला धुआं पीएम 2.5 के स्तर को 5% तक बढ़ा देता है। 

 

8% कचरा जलाना
गाजीपुर, ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइटों में अक्सर कूड़ा जल जाता है। दिल्ली में यह पीएम 2.5 के लेवल को बढ़ाने में 8% जिम्मेदार है। 

 

6% रोड डस्ट-कंस्ट्रक्शन
रोड डस्ट और कंस्ट्रक्शन साइटों पर पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए वैक्यूम क्लीनिंग मशीनें ज्यादा से ज्यादा खरीदने की जरूरत है।

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