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3 साल में हम पर करप्शन का कोई आरोप नहीं लगे: राफेल डील पर BJP का जवाब

बीजेपी की तरफ से यूनियन मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के राफेल डील पर लगाए आरोपों का जवाब दिया।

Danik Bhaskar | Nov 16, 2017, 07:25 PM IST
23 सितंबर, 2016 नई दिल्ली में राफेल डील पर दस्तखत किए गए थे। कांग्रेस अब इस पर सवाल उठा रही है। 23 सितंबर, 2016 नई दिल्ली में राफेल डील पर दस्तखत किए गए थे। कांग्रेस अब इस पर सवाल उठा रही है।

नई दिल्ली. राफेल जेट फाइटर डील को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में बयानबाजी तेज हो गई है। गुरुवार को राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस डील पर जवाब मांगा। राहुल ने आरोप लगाया कि एक कारोबारी को फायदा पहुंचाने के लिए डील बदल दी गई। बीजेपी की तरफ से यूनियन मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने इसका जवाब दिया। प्रेस ब्रीफिंग में प्रसाद ने कहा- वो इस बात का मान ही नहीं पा रहे हैं कि इस सरकार पर तीन साल में करप्शन का एक भी आरोप नहीं लगा।

राहुल बोले- मोदी से सवाल क्यों नहीं पूछे जाते?

- राफेल डील का मसला वैसे तो इस हफ्ते के शुरू में कांग्रेस के स्पोक्सपर्सन रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उठाया था। लेकिन, गुरुवार को जब राहुल गांधी ने मोदी को लेकर बयान दिया तो बीजेपी के बड़े नेता सफाई देने के लिए सामने आए
- राहुल ने कहा- आप (मीडिया) मुझसे इतने सारे सवाल पूछते हैं, मैं सही तरीके से उनका जवाब देता हूं। आप लोग राफेल डील के बारे में पीएम से सवाल क्यों नहीं करते? उन्होंने एक बिजनेसमैन को फायदा पहुंचाने के लिए पूरी डील ही बदल दी। आप अमित शाह के बेटे के बारे में सवाल क्यों नहीं करते। ये सवाल मैं आपसे पूछना चाहता हूं।

बीजेपी की तरफ से क्या जवाब आया?

- रविशंकर प्रसाद कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देने के लिए मीडिया के सामने आए। इसी दौरान उनसे राहुल गांधी के राफेल डील को लेकर लगाए गए आरोपों पर रिएक्शन मांगा गया। इस पर प्रसाद ने कहा- वो इस बात को मान ही नहीं पा रहे हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार को तीन साल हो गए और उस पर करप्शन का एक भी आरोप नहीं लगा।
- हालांकि, बीजेपी ने पहले भी कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया था। BJP ने कांग्रेस के आरोपों को नकारते हुए कहा था कि कांग्रेस ये आरोप ध्यान हटाने के लिए लगा रही है, क्योंकि उनकी पार्टी के बड़े नेताओं ऑगस्टा वेस्टलैंड VVIP चॉपर घोटाले में पूछताछ की जा सकती है।

रिलायंस ने भी नकारे कांग्रेस के आरोप

- इस मामले पर रिलायंस डिफेंस लिमिटेड की तरफ से भी बयान जारी किया गया। कंपनी ने कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया। उसने कहा- प्रोजेक्ट ज्वॉइंट वेंचर हैं। इसका नाम दसॉल्त रिलायंस एयरोस्पेस है। इसके लिए दसॉल्त और रिलायंस डिफेंस लिमिटेड के बीच बाइलेटरल एग्रीमेंट हुआ है। भारत सरकार का इसमें कोई रोल नहीं है।
- कंपनी ने आगे कहा- भारत सरकार की 24 जून 2016 की पॉलिसी के मुताबिक डिफेंस सेक्टर में 49% कर एफडीआई (फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट) ऑटोमैटिक रूट से हो सकती है, इसके लिए पहले से किसी अप्रूवल की जरूरत नहीं है।

अब क्यों उठा राफेल का मसला?

- सुरजेवाला ने कहा था, “राफेल डील से घोटाले की बू आ रही है। इस डील में ट्रांस्पैरेंसी नहीं थी। सिक्युरिटी नॉर्म्स की परवाह किए बगैर राफेल डील को अप्रूवल दिया गया। इस डील के मौके पर ना तो डिफेंस मिनिस्टर मौजूद थे और ना ही कैबिनेट की सिक्युरिटी कमेटी और दूसरी एजेंसियों से मंजूरी ली गई थी। यूपीए सरकार ने 54000 करोड़ रु से 126 राफेल जेट्स की डील की थी। साथ ही टेक्नोलॉजी के लिए भी डील हुई थी। मोदी सरकार ने बिना टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के 60 हजार करोड़ की बड़ी डील की और केवल 36 राफेल के लिए।” कांग्रेस का ये भी आरोप है कि इस डील में पब्लिक सेक्टर की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को किनारे कर दिया गया।

इंडियन एयरफोर्स ने क्या कहा?

- इंडियन एयरफोर्स (IAF) चीफ बीएस धनोआ ने कहा, "किसी भी तरह की कंट्रोवर्सी नहीं है। मुझे नहीं समझ में आता कि इसमें कंट्रोवर्सी क्या है। राफेल डील महंगी नहीं है। भारत सरकार ने बहुत डील में बहुत अच्छी सौदेबाजी की है। मुझे लगता है कि हमने मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट में जिस तरह की सौदेबाजी की थी, उससे बेहतर हमने राफेल डील में किया है।"

फ्रांस का आरोपों पर क्या कहना है?

- फ्रांस के डिप्लोमैटिक सोर्सेस ने बुधवार को कांग्रेस के आरोपों पर सीधे नाम नहीं लिया और इसे घरेलू राजनीतिक मसला बताया। उन्होंने कहा, "राफेल का सेलेक्शन उसकी बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए किया गया और इस दौरान ट्रांसपैरेंट प्रॉसीजर को फॉलो किया गया। इसके चलते भारत की डिफेंस इंडस्ट्री के डेवलपमेंट में मदद मिलेगी। किसी भी तरह का उल्टा दावा करने से पहले फैक्ट्स को चेक किया जाना चाहिए।'

क्या है राफेल डील?

- 23 सितंबर, 2016 को फ्रांस के रक्षामंत्री ज्यां ईव द्रियां और भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रीकर ने नई दिल्ली में राफेल सौदे पर साइन किए थे। भारत सरकार ने 59,000 करोड़ की फ्रांस से डील की थी। डील के तहत 36 राफेल फाइटर जेट विमान मिलने हैं। पहला विमान सितंबर 2019 तक मिलने की उम्मीद है और बाकी के विमान बीच-बीच में 2022 तक मिलने की उम्मीद है।

राहुल गांधी का कहना है कि मोदी से इस डील पर सवाल पूछे जाने चाहिए। - फाइल राहुल गांधी का कहना है कि मोदी से इस डील पर सवाल पूछे जाने चाहिए। - फाइल