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राफेल डील पर आरोप शर्मनाक, UPA ने 10 साल सौदा लटकाया: डिफेंस मिनिस्टर

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने राफेल डील पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 17, 2017, 06:29 PM IST

    • video: राफेल डील पर निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस को जवाब दिया।

      नई दिल्ली. राफेल डील पर कांग्रेस के आरोपों के बीच डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने कहा कि ये डील पूरी तरह साफ थी। रक्षा मंत्री ने कहा, "राफेल डील पर लगाए गए आरोप शर्मनाक हैं और ये सेनाओं का अपमान है। यूपीए सरकार ने 10 साल तक इस डील को लटकाए रखा।" बता दें कि कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया है कि इस डील के लिए उन्होंने देश की सुरक्षा से समझौता किया और ऐसा एक बिजनेसमैन को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया।

      राफेल डील: राहुल-कांग्रेस के क्या हैं आरोप?

      राहुल गांधी:"आप (मीडिया) मुझसे इतने सारे सवाल पूछते हैं, मैं सही तरीके से उनका जवाब देता हूं। आप लोग राफेल डील के बारे में पीएम से सवाल क्यों नहीं करते? उन्होंने एक बिजनेसमैन को फायदा पहुंचाने के लिए पूरी डील ही बदल दी। आप अमित शाह के बेटे के बारे में सवाल क्यों नहीं करते। ये सवाल मैं आपसे पूछना चाहता हूं।"

      कांग्रेस: "राफेल डील से घोटाले की बू आ रही है। इस डील में ट्रांसपेरेंसी नहीं थी। सिक्युरिटी नॉर्म्स की परवाह किए बगैर राफेल डील को अप्रूवल दिया गया। इस डील के मौके पर ना तो डिफेंस मिनिस्टर मौजूद थे और ना ही कैबिनेट की सिक्युरिटी कमेटी और दूसरी एजेंसियों से मंजूरी ली गई थी। यूपीए सरकार ने 54000 करोड़ रु से 126 राफेल जेट्स की डील की थी। साथ ही टेक्नोलॉजी के लिए भी डील हुई थी। मोदी सरकार ने बिना टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के 60 हजार करोड़ की बड़ी डील की और केवल 36 राफेल के लिए।"

      रक्षा मंत्री और इंडियन एयरफोर्स ने क्या कहा?

      रक्षा मंत्री: "एयरफोर्स की अर्जेंट रिक्वायरमेंट को देखते हुए इस डील पर मुहर लगाना जरूरी था। सितंबर 2016 में इस डील के फाइनल एग्रीमेंट साइन किए गए। इससे पहले 5 राउंड की लंबी बातचीत भी फ्रांस के साथ हुई थी। इसके लिए कैबिनेट की सिक्युरिटी कमेटी का अप्रूवल भी लिया गया। इस डील पर आरोप लगाना भारतीय सेनाओं का अपमान है।"


      IAF: चीफ बीएस धनोआ ने कहा था, "किसी भी तरह की कॉन्ट्रोवर्सी नहीं है। मुझे नहीं समझ में आता कि इसमें कंट्रोवर्सी क्या है। राफेल डील महंगी नहीं है। भारत सरकार ने बहुत डील में बहुत अच्छी सौदेबाजी की है। मुझे लगता है कि हमने मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट में जिस तरह की सौदेबाजी की थी, उससे बेहतर हमने राफेल डील में किया है।"

      क्या है राफेल डील, क्या तैयारियां की गईं?

      राफेल डील: 23 सितंबर, 2016 को फ्रांस के रक्षामंत्री ज्यां ईव द्रियां और भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने नई दिल्ली में राफेल सौदे पर साइन किए थे। भारत सरकार ने 59,000 करोड़ की फ्रांस से डील की थी। डील के तहत 36 राफेल फाइटर जेट विमान मिलने हैं। पहला विमान सितंबर 2019 तक मिलने की उम्मीद है और बाकी के विमान बीच-बीच में 2022 तक मिलने की उम्मीद है।

      तैयारियां:राफेल के दो स्क्वॉड्रन के लिए वेस्ट में अंबाला और ईस्ट में प. बंगाल के हासीमारा एयरबेस को चुना गया है। इंडियन एयरफोर्स ने राफेल के लिए अपने फ्रंटलाइन एयरबेसेस के इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की शुरुआत कर दी है। अंबाला और हासीमारा एयरबेस को राफेल जेट्स की पहली स्क्वॉड्रन के डिप्लॉयमेंट के हिसाब से अपग्रेड किया जाएगा। 78 साल पुराने अंबाला एयरबेस के अपग्रेडेशन के लिए सरकार ने पहले ही 220 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए हैं। एयरबेस पर 14 शेल्टर बनाए जाएंगे, इसके अलावा हैंगर्स और मेटेंनेंस सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी। राफेल स्क्वॉड्रन को गोल्डन ऐरो कहा जाएगा।

      राफेल की खासियत क्या है, IAF को जरूरत कितनी, कितने मिलेंगे?

      खासियत: राफेल विमान फ्रांस की डेसाल्ट कंपनी द्वारा बनाया गया 2 इंजन वाला लड़ाकू विमान है। ये एक मिनट में 60,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। इसकी रेंज 3700 किलोमीटर है। साथ ही यह 2200 से 2500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। सबसे खास बात ये है कि इसमें मॉडर्न ‘मिटिअर’ मिसाइल और इजरायली सिस्टम भी है।

      जरूरत कितनी, कितने मिलेंगे: इंडियन एयरफोर्स के पास अभी 34 स्क्वॉड्रन हैं जबकि जरूरत 45 स्क्वॉड्रन की है। डील के तहत 36 राफेल फाइटर जेट विमान मिलने हैं। पहला विमान सितंबर 2019 तक मिलने की उम्मीद है और बाकी के विमान बीच-बीच में 2022 तक मिलने की उम्मीद है।

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      उत्तरलाई एयरफोर्स स्टेशन पर MIG-21 बाइसन के कॉकपिट में बैठीं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण। (फाइल)
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      राहुल गांधी ने कहा कि इस डील से एक बिजनेसमैन को फायदा पहुंचाया गया।
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