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सिग्नल फेलियर से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करेगा रेलवे

रेलवे अपने सिग्नल सिस्टम की रिमोट कंडीशनिंग मॉनीटरिंग के जरिए ट्रेनों की रनिंग को सही रखना चाहता है।

DainikBhaskar.com| Last Modified - Nov 21, 2017, 03:29 PM IST

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Railways to use Artificial Intelligence for preventing signal failures
रेलवे सिग्नल सिस्टम में सुधार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करेगा। - फाइल

नई दिल्ली.  सिग्नल फेल होने की आशंकाओं को कम करने के लिए रेलवे जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करेगा। रेलवे सिग्नल सिस्टम की रिमोट कंडीशनिंग और मॉनिटरिंग के जरिए ट्रेन ऑपरेशन्स को सही रखना चाहता है। एक ऑफिशियल के मुताबिक, फिलहाल इस सिस्टम का इस्तेमाल ट्रायल बेस पर किया जाएगा। बता दें कि सेफ ट्रेन ऑपरेशन्स के लिए रियल टाइम इन्फॉर्मेशन के साथ रेलवे सिग्नल बेहद अहम हैं।

 


अभी सिग्नल सिस्टम क्यों फेल होता है?

- रेलवे में सिग्नल सिस्टम फेल होने की बड़ी वजह ये है कि अभी मैनुअल मेंटेनेंस सिस्टम को फॉलो किया जाता है। समस्याओं के लिए फाइंड एंड फिक्स मेथड का इस्तेमाल होता है या फिर प्रिडिक्शन और प्रिवेंशन वाली अप्रोच होती है।

 

नया सिस्टम किस तरह से काम करेगा?
- रेलवे के एक सीनियर अफसर ने न्यूज एजेंसी से कहा, "हम अब रिमोट कंडीशनिंग और मॉनिटरिंग का इस्तेमाल करेंगे, जिसमें सेंसर्स होंगे। इससे सिग्नल्स, ट्रैक सर्किट्स, एक्सेल काउंटर्स, इंटरलॉकिंग सब-सिस्टम्स, पावर सप्लाई सिस्टम, टाइमर्स आदि की सेंसर्स के जरिए लगातार मॉनिटिरिंग की जा सकेगी। इस सिस्टम से ये निश्चित हो सकेगा कि पूर्व निर्धारित इंटरवल्स पर जानकारी को इकट्ठा किया जाए और एक सेंट्रल लोकेशन पर भेजा जाए।"

 

नए सिस्टम का क्या फायदा होगा?
- अफसर के मुताबिक, "इस सिस्टम के जरिए अगर कोई खामी या रुकावट पाई जाती है तो रियल टाइम में उसका पता लगाया जा सकेगा। इसके जरिए इसे वक्त रहते सही किया जा सकेगा। ऑपरेशन में देरी और हादसे की आशंका भी कम होगी।"
- बता दें कि अभी हादसों और देरी की सबसे बड़ी वजह सिग्नल फेलियर है।

 

किस तरह से लागू करेगा रेलवे?
- "रेलवे ने शुरुआती चरण में इसका ट्रायल वेस्टर्न रेलवे और साउथ वेस्टर्न रेलवे में करने का फैसला लिया है। इससे मिले फीडबैक के आधार पर दूसरे सेक्शन्स में इस सिस्टम को लागू किया जाएगा।"

 

अभी कहां ये सिस्टम लागू है?
- ऑफिशियल के मुताबिक, "सिग्नल्स की रिमोट मॉनिटिरिंग अभी ब्रिटेन में होती है। सिस्टम 3G, 4G और हाईस्पीड मोबाइल जैसे वायरलेस मीडियम के जरिए ट्रांसफर किए गए डाटा का आकलन करता है। इन इनपुट्स से मिले डाटा के बेस पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए सिग्नल फेलियर की भविष्यवाणी की जाती है। इसके आधार पर ऑटोमेटेड सेल्फ करेक्शन के साथ इन फेलियर्स से निपटने की स्ट्रैटजी तैयार की जाती है।"

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए ट्रेनों के लेट होने से रोकने और हादसों में कमी लाने की कोशिश की जाएगी। - फाइल
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