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दिल्ली को राज्यों जैसी एग्जीक्यूटिव पावर्स मिल सकती हैं? SC में आज भी सुनवाई

आप सरकार की वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा, केंद्र कैसे कह सकता है कि दिल्ली सरकार के पास कार्यकारी शक्तियां नहीं हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 15, 2017, 09:04 AM IST

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    दिसंबर, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, ''चुनी हुई सरकार के पास कुछ शक्तियां होनी चाहिए नहीं तो वह काम नहीं कर पाएगी। (फाइल)
    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सवाल उठाया कि क्या केंद्र और राज्यों के बीच एग्जीक्यूटिव पावर्स (कार्यकारी शक्तियों) के बंटवारे वाली संवैधानिक व्यवस्था यूनियन टेरिटरी दिल्ली पर भी लागू हो सकती है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच ने सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह की दलीलों पर यह सवाल किया। इस मामले में बुधवार को भी सुनवाई होगी।


    जहाज के 2 कप्तान होने से दिक्कत

    - दिल्ली सरकार और लेफ्टिनेंट गवर्नर के बीच अधिकारों की लड़ाई के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान आप सरकार की तरफ से जयसिंह ने कहा, "एक जहाज के दो कप्तान रहने पर अव्यवस्था फैलेगी।"
    - उन्होंने कहा, "केंद्र कैसे कह सकता है कि दिल्ली सरकार के पास कार्यकारी शक्ति नहीं हैं। आर्टिकल 239एए और दिल्ली सरकार की कार्यकारी शक्तियों की व्याख्या के दौरान कोर्ट को दिल्ली के यूनियन टेरिटरी के दर्जे से निर्देशित नहीं होना चाहिए।" - दिनभर चली सुनवाई में जयसिंह के अलावा सीनियर एडवोकेट राजीव धवन ने भी सरकार की तरफ से दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में भी रिप्रेजेंटेटिव गवर्नमेंट की जगह जिम्मेदार सरकार की बात करता है। मौजूदा मुद्दा दिल्ली के 1.89 करोड़ लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है।

    दिल्ली सरकार V/S केंद्र, क्या है मामला?

    - दिल्ली में अधिकारों की लड़ाई फरवरी, 2015 में अरविंद केजरीवाल की सरकार बनने के बाद शुरू हुई। तब नजीब जंग दिल्ली के उपराज्यपाल थे। उन्होंने डीसीडब्ल्यू में सेक्रेटरी की नियुक्ति समेत केजरी सरकार की कई भर्तियों और फैसलों को गलत ठहराते हुए इन पर रोक लगाई थी।
    - इसके बाद केजरीवाल और नजीब की जंग बढ़ती गई। सीएम केजरीवाल ने कई बार जंग पर केंद्र सरकार के एजेंट होने और उसके इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। दिल्ली सरकार एलजी के फैसलों के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट चली गई।
    - 4 अगस्त, 2015 हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एलजी ही दिल्ली के एडमिनिस्ट्रेटिव हेड हैं और कोई भी फैसला एलजी की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाए। तब केंद्र और एलजी की ओर से दलील दी गई कि दिल्ली राज्य नहीं है, इसलिए एलजी को यहां विशेष अधिकार मिले हैं।

    दिल्ली सरकार के पास कुछ अधिकार होने चाहिए: SC

    - केजरीवाल सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। SC ने 15 फरवरी, 2017 को इसे सुनवाई के लिए कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच के पास भेज दिया। 2 फरवरी को केजरी सरकार ने कहा था कि दिल्ली विधानसभा के अंदर सरकार को खास अधिकार मिले हैं, जिन्हें केंद्र सरकार, राष्ट्रपति या एलजी नहीं छीन सकते हैं।
    - इसके पहले 14 दिसंबर, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, ''चुनी हुई सरकार के पास कुछ शक्तियां होनी चाहिए नहीं तो वह काम नहीं कर पाएगी।''

    रिटायर्ड जजों को नहीं मिलेगी आजीवन सुरक्षा

    - जम्मू-कश्मीर में जजों और एडवोकेट जनरल को अब आजीवन चौबीसों घंटे सुरक्षा नहीं मिलेगी।
    - हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों, जिला जजों और एडवोकेट जनरल को सुरक्षा देने से जुड़े जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के कई आदेश मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिए।
    - सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा समीक्षा समन्वय समिति (एसआरसीसी) को 4 हफ्ते में नए सिरे से समीक्षा करने का आदेश दिया है। इसके बाद जरूरत के अनुसार सुरक्षा मुहैया करवाई जाए। - चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि सुरक्षा के बारे में हाईकोर्ट के आदेशों में बदलाव किया जाता है।
    - हाईकोर्ट द्वारा 2015 और 2016 में जारी ऐसे कई फैसलों को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
    - सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव धवन ने दलील दी थी कि हाईकोर्ट रिटायर्ड जजों, एडवोकेट जनरल और दूसरे लोगों को आजीवन सुरक्षा देने का आदेश नहीं दे सकता।
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    केजरी सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को SC में चुनौती दी थी। 2 फरवरी को केजरी सरकार ने कहा था कि दिल्ली विधानसभा के अंदर सरकार को खास अधिकार मिले हैं, जिन्हें केंद्र सरकार, राष्ट्रपति या एलजी नहीं छीन सकते। (फाइल)
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