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जजों के नाम पर रिश्वत का मामला: SC आज सुना सकता है फैसला

10 नवंबर को 5 जजों की बेंच ने 2 जजों की बेंच का आदेश उलट दिया था।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 14, 2017, 11:34 AM IST

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नई दिल्ली.सुप्रीम कोर्ट ने जजों के नाम पर घूस लेने के मामले में SIT जांच की मांग करने वाली पिटीशन खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि ऐसी पिटीशन के चलते जजों की ईमानदारी पर बेवजह के सवाल उठते हैं। जस्टिस आरके अग्रवाल, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच ने कहा, "किसी भी जज के खिलाफ CBI ने FIR नहीं की है और ना ही किसी जज के खिलाफ ऐसी कोई FIR दाखिल कर पाना संभव है।' बता दें कि जस्टिस कामिनी जायसवाल ने मेडिकल कॉलेजों को राहत दिए के लिए जजों के नाम पर रिश्वत लेने के मामले में SIT जांच की मांग की थी।
क्या है मामला?
- सीबीआई ने 19 सितंबर को दर्ज की गई एफआईआर में उड़ीसा हाईकोर्ट के पूर्व जज इशरत मसरूर कुदुसी समेत कई लोगों को कथित करप्शन के मामले में आरोपी बनाया था। कुदुसी समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
- कुदुसी पर भुवनेश्वर के एक बिचौलिए के जरिए सुप्रीम कोर्ट से 46 मेडिकल कालेजों में रजिस्ट्रेशन पर लगी रोक से राहत दिलाने की साजिश रचने का आरोप है।

SIT जांच खारिज करते वक्त बेंच ने क्या कहा?

1) रेक्यूजल की मांग फोरम शॉपिंग जैसी
- बेंच ने इस मामले की सुनवाई से एक जज को हटाने (रेक्यूजल) की मांग की भी निंदा दी। कामिनी जायसवाल, शांति भूषण और प्रशांत, भूषण ने इस मामले की सुनवाई से जस्टिस खनविलकर को हटाने की मांग की थी।
- इस पर बेंच ने कहा कि ये तरीका सही नहीं है और ये "फोरम शॉपिंग' के बराबर है। बता दें कि फोरम शॉपिंग वो लीगल टर्म है, जिसका मतलब वादी द्वारा ऐसी कोर्ट में सुनवाई की कोशिश होती है, जिसमें फैसला उसके फेवर में आने की उम्मीद ज्यादा हो।
- हालांकि, खुद जस्टिस खनविलकर ने इस मामले की सुनवाई से हटने से इनकार कर दिया था।
2) पहले ही काफी नुकसान हो चुका है-SC
- बेंच ने कहा कि इस तरह की पिटीशन दायर होने से पहले ही इंस्टिट्यूशन को काफी नुकसान हो चुका है और इसकी ईमानदारी को लेकर बेवजह के सवाल उठ रहे हैं।
इससे पहले बेंच ने क्या कहा था?
- केस की सुनवाई के दौरान बेंच ने वकील कामिनी जायसवाल की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण से सवाल किया कि क्या एक जैसी ही दो पिटीशन दायर करने का कोई मतलब है? क्या इसे अपनी पसंद की बेंच के सामने लिस्टेड करने की कोशिश नहीं माना जाएगा?
- बता दें कि इस मामले में एक पिटीशन एनजीओ कैम्पेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी (CFJA) ने दायर की है, जबकि दूसरी वकील कामिनी जायसवाल की ओर से। कामिनी भी CFJA की मेंबर हैं।
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