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अपने दफ्तरों में एयर प्यूरीफायर लगाने पर मोदी सरकार ने खर्च किए 3.6 करोड़

मोदी और छह सरकारी एजेंसियों में तीन साल में लगाए गए 140 एयर प्यूरीफायर संयुक्त सचिव या उससे ऊपर स्तर के अफसरों के दफ्तर

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 20, 2018, 09:15 PM IST

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    वायु प्रदूषण से बचने के लिए मोदी सरकार ने खुद का इंतजाम किया।

    नई दिल्ली.मोदी सरकार ने 2014 से 2017 के दौरान अपने दफ्तरों में एयर प्यूरीफायर लगाने में 3.6 करोड़ रुपये खर्च किए। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय और कम से कम छह अन्य सरकारी एजेंसियों के दफ्तरों के लिए 140 एयर प्यूरीफायर खरीदे गए। इनमें नीति आयोग, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, गृह और विदेश मंत्रालय के दफ्तर शामिल हैं। खरीदारी तब हुई, जब दिल्ली की हवा में प्रदूषण को लेकर सरकार की आलोचना हुई है। बता दें कि पिछले दिनों दिल्ली का पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 2.5 तक हो गया था।

    किसने, कितने एयर प्यूरीफायर खरीदे

    - पिछले तीन साल में गृह मंत्रालय ने करीब 13 लाख रुपये में 44 एयर प्यूरीफायर खरीदे।
    - संसद भवन स्थित दफ्तरों में लगभग सात लाख रुपये में 25 एयर प्यूरीफायर लगाए गए।
    - नीति आयोग में भी एयर प्यूरीफायर लगाने में करीब सात लाख रुपये खर्च किए। प्यूरीफायर संयुक्त सचिव या उससे ऊपर स्तर के अधिकारियों के दफ्तरों में ही लगाए गए हैं।

    एयर प्यूरीफायर खरीदने का नियम नहीं
    - मोदी की प्रदूषण नियंत्रण योजना से जुड़े एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि ऐसा कोई नियम नहीं है जो अफसरों को एयर प्यूरीफायर खरीदने की मंजूरी देता हो। विभाग यह तब करता है जब नौकरशाह उससे आग्रह करते हैं।

    10 फीसदी बीमारियों का कारण प्रदूषण
    - ब्रिटिश जर्नल लैंसेट की मानें तो 2016 में भारत में 10 फीसदी बीमारियां वायु प्रदूषण के कारण ही हुईं। हर साल सर्दियों में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। पिछले साल तो इसके चलते दिल्ली में स्कूलों को बंद करना पड़ा था।

    स्कूलों के लिए कोई योजना नहीं
    - दिल्ली में केंद्र सरकार 45 स्कूलों का संचालन करती है। उनके लिए सरकार ने कोई भी एयर प्यूरीफायर नहीं खरीदे और न ही ऐसी योजना है।
    - केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के कमिश्नर संतोष कुमार मल कहते हैं, "दफ्तरों में आमतौर पर एसी लगे होते हैं, इसलिए एयर प्यूरीफायर काम करते रहते हैं। हमारे स्कूल एयर कंडीशंड नहीं हैं। खिड़कियां खुली रहती हैं, इसलिए एयर प्यूरीफायर से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।"

    - छात्रों को खराब हवा से बचाने के लिए हुए उपायों पर वह बोले, "जब ज्यादा प्रदूषण था, तो हमारे स्कूल बंद थे।"
    - वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि जब वायु प्रदूषण बहुत अधिक हो, तो खिड़कियां बंद रखनी चाहिए। यदि बाहर से हवा आ रही है तो भी एयर कंडीशंड का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

    2017 में 3.5 गुना बढ़ी एयर प्यूरीफायर की बिक्री
    - एयर प्यूरीफायर घर के अंदर की हवा के प्रदूषण को फिल्टर करता है।
    - विश्व बैंक के अनुसार, 2016 में सामान्यतया इसे वे लोग यूज करते थे, जिनकी सालाना आय सवा लाख रुपये के आसपास थी।
    - अब दिल्ली में एयर प्यूरीफायर की बिक्री बढ़ गई है। एमेजॉन.कॉम की मानें तो 2016 की तुलना में 2017 में उसने 3.5 गुना एयर प्यूरीफायर बेचे।

    दिल्ली के लिए सरकार की क्या योजना है

    - मौजूदा बजट में सरकार ने जरूर प्रदूषण से निपटने की रूपरेखा बनाई है। इसके लिए उसने करीब 1150 करोड़ रुपये का अमाउंट तय किया है।

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