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देश की तकदीर बदल सकती हैं ये 26 चीजें

ये हैं 26 जनवरी के स्पेशल 26। वो 26 चीजें जो भविष्य में आपकी और देश की किस्मत बदल सकते हैं।

Danik Bhaskar | Jan 26, 2018, 03:30 PM IST

ये हैं 26 जनवरी के स्पेशल 26। वो 26 चीजें जो भविष्य में आपकी और देश की किस्मत बदल सकते हैं. इन चीजों का सीधा ताल्लुक आपकी रोजमर्रा की जिन्दगी से है। भारत विश्व गुरू था लेकिन पहले विदेशी हमलावरों और बाद में गुलामी की सदियों ने सब तहस नहस कर दिया। लेकिन इकबाल ने ठीक ही लिखा है कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी। सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा।। गणतंत्र बनने के 68 सालों बाद आज साइंस की दुनिया में भारत और भारतीय का परचम सबसे बुलंद दिखता है। और इस बात की उम्मीद जगती है कि एक बार फिर हम विश्व गुरू होंगे...

आगे की स्लाइड्स में देखें, स्पेशल 26 चीजों के बारे में...

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट
भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलेगी। इसकी मैक्सिमम स्पीड 320 km/h होगी। इस प्रोजेक्ट के 2022 तक पूरा होने की उम्मीद है। 1.10 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट के लिए जापान की मदद से बनाया जा रहा है।

सागर माला प्रोजेक्ट
भारत के बंदरगाहों को हाइटेक बनाने के लिए इस सागर माला प्रोजेक्ट 2015 में शुरू किया गया था। 82 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट से देश के छह टॉप बंदरगाहों के अलावा दर्जनों छोटे पोर्ट आधुनिक किए जाएंगे। इसका मकसद सरकार का कोस्टल इकोनॉमिक जोन बनाना है। ताकि बंदरगाहों के जरिए बिजनेस और जॉब्स को बढ़ाया जा सके। 

चंद्रयान, आदित्य (अंतरिक्ष में बढ़ते कदम)


मंगलयान की बड़ी कामयाबी के बाद इसरो की अंतरिक्ष में बड़ी धाक जमी है। 2018-19 में भारत चंद्रयान-2 भेजेगा...हम सूर्य की स्टडी के लिए मिशन आदित्य शुरू करने वाले हैं. एक साथ सबसे ज्यादा सैटेलाइट छोड़कर हम पहले ही रिकॉर्ड बना चुके हैं...इससे न सिर्फ दुनिया में हमारी धाक बढ़ेगी बल्कि स्पेस कारोबार में हमारा हिस्सा भी बढ़ेगा।

नदियों को जोड़ने का प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट की घोषणा अटल सरकार के दौर में हुई थी। 5.5 लाख करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में देश की गंगा समेत करीब 60 नदियों को आपस में जोड़ा जाएगा। इसके पीछे का मकसद हर साल आने वाली बाढ़ या सूखे से प्रभावित होने वाली नदियों को बचाया जा सकेगा। पानी की आपूर्ति सभी शहरों या राज्यों में एक जैसी होगी।

स्वर्णिम चतुुर्भुज प्रोजेक्ट
ये भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का 5वां सबसे बड़ा हाइवे प्रोजेक्ट है। इसके तहत देश के बड़े इंडस्ट्रियल, एग्रीकल्चर, कल्चरल सिटीज को जोड़ा जाना है। इसकी कुल लंबाई 5846 किलोमीटर है। इस प्रोजेक्ट में नई दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, और चेन्नई को डायरेक्ट कई शहरों से कनेक्ट करने की योजना है।

GST
गुड्स और सर्विसेज टैक्स। ये लागू तो हुआ 2017 में लेकिन इसके फायदे आने वाले वक्त में मिलेंगे। एक देश एक टैक्स का ये फंडा देश की इकोनॉमी को बहुत फायदा पहुंचाएगा। टैक्स चोरी कम होगी। चीजों का ट्रांसपोर्टेशन आसान होगा और कारोबार में सहूलियत होगी।

नमामि गंगे प्रोजेक्ट
नदियां किसी भी सभ्यता की लाइफ लाइन होती हैं, लेकिन हमारे देश में नदियां खुद बीमार है। नमामि गंगे जैसे प्रोजेक्ट इस लाइफ लाइन को फिर से नई ऊर्जा दे सकती है। प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 20 हजार करोड़ का बजट तय किया था। सरकार ने 2018 तक गंगा की सफाई का लक्ष्य रखा है। 

डिजिटल इंडिया
डिजिटल इंडिया भारत की महत्वाकांक्षी योजना है। इसमें देश की जनता सरकारी विभागों से डिजिटली जोड़ना है। इसमें गांवों तक इंटरनेट पहुंचाना, सभी सरकारी सेवाओं का इलेक्ट्रॉनिक बनाना और लोगों को कंप्यूटर की जानकारी देना अहम हैं। बीते दो सालों में भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या में इजाफा हुआ है।

आधार
सरकार ने आधार को हर नागरिक के अनिवार्य कर दिया है। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी योजना का सीधा फायदा आधार के जरिए आम लोगों को मिलेगा। एक आंकड़े के मुताबिक, 119 करोड़ लोगों के आधार कार्ड जारी हो चुके हैं। 

यंगेस्ट पॉपुलेशन
भारत की तेजी से बढ़ती जनसंख्या में सबसे बड़ा हिस्सा युवाओं का है। देश के डेवलपमेंट में यंगेस्ट लोग बड़ा रोल अदा करते हैं। एक आंकड़े के मुताबिक, भारत की आधी आबादी 25 साल से कम है। वहीं दो-तिहाई आबादी 35 साल से कम है।

संसद में महिला आरक्षण
संसद में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का बिल सालों में लटका हुअा है। 2010 में राज्यसभा में ये बिल पास हो चुका है, लेकिन लोकसभा में इसे लेकर अभी वोटिंग नहीं हुई है। पिछड़े वर्ग की महिलाओं को आरक्षण देने की मांग उठाने वाली पार्टियां ही लोकसभा में इसे रोकने की कोशिश करती हैं। अगर ये बिल पास होता है तो संसद में देश की आधी आबादी के मुद्दों को और ज्यादा जाेर-शोर से उठाया जाएगा।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट
कभी कृषि प्रधान रहा हमारा देश अब इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर का हब बनता जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में 2030 तक भारत की 40% आबादी शहरों में होगी। इसका जीडीपी में हिस्सा करीब 75% रहेगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 100 शहरों को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। इसके तहत शहरों को हाईटेक बनाया जाएगा। 

सोलर एनर्जी
तेजी से कम होते ऊर्जा के स्रोत भारत के लिए चिंता का सबब हैं। ऐसे में भारत ने बीते दो साल में सोलर एनर्जी से बिजली जैसी बुनियादी जरूरत पूरा करने पर जोर दिया है। 2022 तक भारत ने 100 बिलियन डॉलर में 100 गीगावॉट सोलन एनर्जी पैदा करने का प्लान किया है। 

स्वच्छ भारत अभियान
देश की तरक्की का सबसे पहला चरण साफ सफाई से होता है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहरों, गांव और मोहल्लों को साफ रखना है। इसके अलावा 2019 तक 1.96 लाख करोड़ रुपए की लागत से ग्रामीण भारत में 1.2 करोड़ टॉयलेट बनाने का लक्ष्य रखा है। 

मेक इन इंडिया

इस प्रोजेक्ट में देशी और विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया गया है। मोदी ने इसकी शुरुआत  25 सितम्बर, 2014 को की। प्रोजेक्ट के तहत स्किल डेवेलपमेंट के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का मॉडल अपनाया गया। 2015 में भारत ने 63 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला। वहीं 2016 में भारत ने करीबन 60 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला, जो विश्व के कई बड़े विकसित देशों से कहीं अधिक था।

खेलो इंडिया
पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब। इस मान्यता के साथ कोई देश ओलंपिक में कितने मेडल जीतेगा? कोई ताज्जुब नहीं कि ओलंपिक की मेडल लिस्ट में हमारा नाम कहीं नीचे दिखता है। लेकिन आने वाले वक्त में हम कई पायदान ऊपर आ सकते हैं।खेल कूद को भी प्रोफेशन के रूप में चुना जा सकता है। इस भावना को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने खेलो इंडिया प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसमें हर  साल 1 हजार युवा एथलीटों को छात्रवृत्ति मिलेगी। हर साल पांच लाख की छात्रवृत्ति लगातार आठ साल तक मिलेगी।

 

सरदार सरोवर बांध

सरदार सरोवर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है। यह नर्मदा नदी पर बना 800 मीटर ऊंचा है। सरदार सरोवर प्रोजेक्ट का मकसद गुजरात के सूखाग्रस्त इलाक़ों में पानी पहुंचाना और मध्य प्रदेश के लिए बिजली पैदा करना है। 

भूकंप की भविष्यवाणी
महाराष्ट्र के शिवाजीसागर बांध इलाके में भारतीय वैज्ञानिकों ने सात किलोमीटर गहरा सुराख किया है। उसके ऊपर एक ऑबजर्बेटरी बनी है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे मिले डेटा की मदद से आने वाले समय में वो भूकंप की सटिक भविष्यवाणी कर पाएंगे। अगर ऐसा हुआ तो जानोमाल की सुरक्षा हो पाएगी। 

बिग बैंग बिग डेटा
2017 में भारत को सर्न लैब की पूर्ण सदस्यता मिल गई। इसका मतलब ये हुआ कि गॉड पार्टिकल फेम सर्न में हो रही रिसर्च का पूरा डाटा अब भारत के लिए उपलब्ध रहेगा। ये जानकारी सिर्फ 22 देश शेयर करेंगे। 

स्वदेशी हथियार विकसित
अगले दस साल में भारत  विदेशों से ढाई सौ अरब डॉलर के हथियार खरीदेगा। रक्षा सौदे देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ हैं..ऐसे में सरकार ने कुछ देशी कंपनियों को रक्षा उपकरण और हथियार बनाने के लिए चुनने का फैसला किया है। ये कंपनी विदेशी कंपनियों से करार कर पाएंगी। इसके लिए जल्द ही डिफेंस में सौ फीसदी विदेशी निवेश को भी मंजूरी दी जाएगी। इन कंपनियों को खरीद की गारंटी भी जाएगी। जब देश में ही हथियार बनेंगे तो न सिर्फ पैसे बचेंगे बल्कि हम अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों का मुंह भी नहीं ताकेंगे।

सबसे शक्तिशाली रेडियो टेलीस्कोप
नौ देशों के साथ भारत एक ऐसा रेडियो टेलीस्कोप बना रहा है जिससे ब्रह्मांड के सुदूर इलाकों से आने वाले सिग्नल्स को भी पकड़ा जा सकेगा। अरबों प्रकाश वर्ष दूर से आ रहे हल्के से हल्के सिग्नल को भी ये रेडियो टेलीस्कोप कैच करेगा। ब्रह्मांड के अंधकार में क्या कुछ छिपा है, इसपर रोशनी डालेगा ये टेलीस्कोप।

पॉकेट वेंटिलेटर
वेंटिलेटर पर किसी को रखना बहुत महंगा है। इतना महंगा कि देश के ज्यादातर लोग ऐसे इलाज के बारे में सोच भी नहीं सकते। लेकिन एम्स ने अब इतना छोटा वेंटिलेटर बना लिया है जिसे जेब में रखा जा सकता है। जल्द ही ये बाजार में आ सकता है। इसकी कीमत होगी महज 15 हजार रुपए।

न्यूक्लियर एनर्जी

2024 तक 14 हजार मेगावाट। और 2032 तक 63 हजार मेगाावाट बिजली परमाणु ऊर्जा से। योजना कामयाब हुई तो देश में स्वच्छ बिजली की कमी नहीं रहेगी। न्यूक्लियर टेस्ट के बाद लगे प्रतिबंध हटने के बाद देश की मिशन न्यूक्लियर पावर में तेजी आई है। रूस ने हमें तकनीक दी है। दुनिया में न्यूक्लियर व्यापार को काबू रखने वाले nsg यानी न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में सदस्यता के  लिए भी भारत की दावेदारी मजबूत होती जा रही है। 

नेशनल मॉनसून मिशन
2019 तक ये हमारे वैज्ञानिक बारिश और तूफान की सटिक भविष्यवाणी कर पाएंगे। ये इतना सटिक होगा कि ब्लॉक लेवल तक का अनुमान लगाया जा सकेगा। आप सोच सकते हैं इसका कृषि से लेकर आपदा में कितना फायदा होगा। 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (IA)
बिग डेटा और IA के क्षेत्र में भारतीय रिसर्चरों की ग्लोबल पहचान बन रही है। पिछले साल डेटा एनालिसिस की नौकरियां दोगुनी हुई हैं। जिस तरह बीपीओ क्षेत्र में भारत ने कमाल किया उसी तरह अब अगला दौर डेटा एनालिसिस का है। उम्मीद है आने वाले समय में मल्टीनेशनल कंपनियां अपने डेटा एनालिसिस का बड़ा काम भारत को देंगी।

क्लीन न्यूक्लियर एनर्जी
फ्रांस में एक ऐसा प्रयोग हो रहा है जिससे हम धऱती पर ही एक छोटा सा सूर्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें दो हल्के तत्वों के फ्यूजन से एनर्जी पैदा करने की कोशिश की जा रही है। अब तक प्लूटोनियम जैसे हेवी तत्वों के फ्यूजन से न्यूक्लियर एनर्जी मिलती है जिससे हमेशा रिएक्टर से लीक होने का डर बना रहता है। लेकिन इस नई तकनीक से ऐसा कोई खतरा नहीं रहेगा। नया रिएक्टर बनाने में भारत की अहम भूमिका है। यूरोपियन यूनियन के अलावा सिर्फ 6 देश इस प्रोजेक्ट में शामिल हैं।