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सिर्फ आस्था नहीं असलियत में है रामसेतु, देखिए ये 4 सबूत

भारत के दक्षिणपूर्व में रामेश्वरम और श्रीलंका के पूर्वोत्तर में मन्नार द्वीप के बीच है राम सेतु

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 16, 2018, 06:15 PM IST

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      स्पेशल डेस्क: मोदी सरकार ने करोड़ों भारतीयों की भावनाओं की कद्र करते हुए सुप्रीम में कहा है कि राम सेतु से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी, बल्कि वैकल्पिक रास्ते की तलाश की जाएगी। यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग ने हलफनामा दायर किया और सेतुसमुद्रम नहर परियोजना के खिलाफ दायर याचिका को खत्म करने की अपील की। बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ही इस प्रोजेक्ट के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी। सिर्फ आस्था नहीं है राम सेतु...

      क्या है सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट?
      - यूपीए सरकार के वक्त 2005 में इस प्रोजेक्ट का ऐलान किया गया था। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट की लागत करीब ढाई हजार करोड़ थी, जो कि अब 4 हजार करोड़ तक बढ़ गई है। इसके तहत बड़े जहाजों के आने-जाने के लिए करीब 83 किलोमीटर लंबे दो चैनल बनाए जाने थे। इसके जरिए जहाजों के आने-जाने में लगने वाला वक्त 30 घंटे तक कम हो जाएगा। इन चैनल्स में से एक राम सेतु जिसे एडम्स ब्रिज भी कहा जाता है, से गुजरना था। अभी श्रीलंका और भारत के बीच इस रास्ते पर समुद्र की गहराई कम होने की वजह से जहाजों को लंबे रास्ते से जाना पड़ता है।

      कहां है राम सेतु ?
      भारत के दक्षिणपूर्व में रामेश्वरम और श्रीलंका के पूर्वोत्तर में मन्नार द्वीप के बीच चूने की उथली चट्टानों की चेन है, इसे भारत में रामसेतु और दुनिया में एडम्स ब्रिज (आदम का पुल) के नाम से जाना जाता है। इस पुल की लंबाई करीब 30 मील (48 किमी) है। यह ढांचा मन्नार की खाड़ी और पॉक स्ट्रेट को एक दूसरे से अलग करता है।

      राम सेतु को लेकर क्या है मान्यता ?
      -हिंदू मान्यताओं के मुताबिक ये ढांचा रामायण में वर्णित वो पुल है जिसे भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई के लिए बनाया था। कहा जाता है कि राम की सेना में नल और नील नाम के दो वारन थे, जिन्होंने इस पुल का निर्माण किया था

      सिर्फ आस्था नहीं है राम सेतु

      - बाल्मिकी रामायण में रामसेतु का जिक्र है। रामायण के अनुसार भगवान राम सीता को लेने के लिए लंका जा रहे थे, बीच में समुद्र था, तब राम की वानर सेना ने पानी में पत्थर डाल-डालकर राम सेतु का निर्माण किया।

      - इतिहासकार और पुरातत्वविदों के मुताबिक- इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कोरल और सिलिका पत्थर जब गरम होता है तो उसमें हवा कैद हो जाती है जिससे वो हल्का हो जाता है और तैरने लगता है. ऐसे पत्थर को चुनकर ये पुल बनाया गया।
      इतिहासकारों की मानें तो साल 1480 में आए एक तूफान में ये पुल काफी टूट गया. उससे पहले तक भारत और श्रीलंका के बीच लोग पैदल और वाहन के जरिए इस पुल का इस्तेमाल करते रहे थे।

      -अमेरिका के साइंस चैनल ने तथ्यों के साथ ये दावा किया है कि भारत और श्रीलंका के बीच मौजूद रामसेतु- प्राकृतिक नहीं बल्कि मानव निर्मित है यानी इसे किसी इंसान ने बनाया था. अमेरिका के वैज्ञानिकों को इस बात के प्रमाण मिले हैं कि रामसेतु के पत्थर करीब 7000 साल पुराने हैं।

      - नासा से लिए गए चित्र में भी राम सेतु प्रतीत होता है।

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