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जिस हथियार ने सीरिया में अमेरिका की हवा निकाल दी, उसे खरीदने जा रहा है भारत

बीते कई सालों में हजारों कराेड़ों रुपए के रक्षा सौदे अटके पड़े हैं।

Dainik Bhaskar

Mar 05, 2018, 12:41 PM IST
S-400 सिस्टम के मिल जाने से भारत की हवाई सीमाएं पहले से ज्यादा सिक्याेर हो जाएंगी। S-400 सिस्टम के मिल जाने से भारत की हवाई सीमाएं पहले से ज्यादा सिक्याेर हो जाएंगी।

स्पेशल डेस्क. बीते कई सालों में हजारों कराेड़ों रुपए के रक्षा सौदे अटके पड़े हैं। इसमें रूस के साथ 40 हजार करोड़ रुपए का S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदने का सौदा भी शामिल है। लेकिन शायद अब ये सिस्टम जल्द ही भारत को मिल सकता है। दरअसल, डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण अगले महीने के आखिर में रूस में होंगी और उनकी पूरी कोशिश इस डील को पूरा करने की होगी। डेढ़ साल से चल रही है बात...

- रूस से इस डिफेंस डील पर डेढ़ साल से बातचीत चल रही है। कीमताें पर सहमति नहीं बन पाने से यह डील रुकी है।
- डील से जुड़े एक अफसर ने बताया कि सीतारमण की रूस यात्रा पर इस सौदे को अंजाम तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।
- S-400 सिस्टम के मिल जाने से भारत की हवाई सीमाएं पहले से ज्यादा सिक्याेर हो जाएंगी।
- बता दें कि भारत से लगी करीब 4000 किमी लंबी सीमा पर चीन लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। ऐसे में ये डील बेहद अहम है।

2016 में ही सौदे को लेकर हुआ था समझौता
- भारत और रूस के बीच इंटरसेप्टर आधारित S-400 ट्रायम्फ मिसाइल सिस्टम खरीद सौदे पर 2016 में ही करार हुआ था।
- चीन 2014 में ही रूस से इसका सौदा कर चुका है और उसे यह पहले ही मिल चुका है।

क्या है S-400?
- S-400 मिसाइल, S-300 का डेवलप वर्जन है। दुश्मन देशों के लड़ाकू जहाजों, मिसाइलों एवं ड्रोन को पलक झपकते ही नष्ट कर देता है। रूस ने इस सिस्टम को सीरिया में तैनात कर रखा है।
- S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मिसाइलों एवं पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को 400 किमी के दायरे में आते ही नष्ट करता है।
- यह डिफेंस सिस्टम एक तरह से मिसाइल शील्ड का भी काम करेगा। यह पाकिस्तान या चीन की न्यूक्लियर पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को शील्ड देगा।
- इसके पास अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट एफ-35 को गिराने की भी कैपिसिटी है।

- ये सिस्टम अपने 26 टारगेट को एक साथ भेद सकता है। इसमें अलग-अलग क्षमता वाली तीन मिसाइलें हैं, जिनमें सुपरसोनिक, हाइपरसोनिक स्पीड वाली भी हैं।
- अगर सौदा होता है तो चीन के बाद इस सिस्टम को खरीदने वाला भारत दूसरा देश होगा।

आगे की स्लाइड्स में देखें, S-400 के फोटोज..

ये सिस्टम अपने 26 टारगेट को एक साथ भेद सकता है। इसमें अलग-अलग क्षमता वाली तीन मिसाइलें हैं, जिनमें सुपरसोनिक, हाइपरसोनिक स्पीड वाली भी हैं। ये सिस्टम अपने 26 टारगेट को एक साथ भेद सकता है। इसमें अलग-अलग क्षमता वाली तीन मिसाइलें हैं, जिनमें सुपरसोनिक, हाइपरसोनिक स्पीड वाली भी हैं।
यह डिफेंस सिस्टम एक तरह से मिसाइल शील्ड का भी काम करेगा। यह पाकिस्तान या चीन की न्यूक्लियर पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को शील्ड देगा। यह डिफेंस सिस्टम एक तरह से मिसाइल शील्ड का भी काम करेगा। यह पाकिस्तान या चीन की न्यूक्लियर पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को शील्ड देगा।
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S-400 सिस्टम के मिल जाने से भारत की हवाई सीमाएं पहले से ज्यादा सिक्याेर हो जाएंगी।S-400 सिस्टम के मिल जाने से भारत की हवाई सीमाएं पहले से ज्यादा सिक्याेर हो जाएंगी।
ये सिस्टम अपने 26 टारगेट को एक साथ भेद सकता है। इसमें अलग-अलग क्षमता वाली तीन मिसाइलें हैं, जिनमें सुपरसोनिक, हाइपरसोनिक स्पीड वाली भी हैं।ये सिस्टम अपने 26 टारगेट को एक साथ भेद सकता है। इसमें अलग-अलग क्षमता वाली तीन मिसाइलें हैं, जिनमें सुपरसोनिक, हाइपरसोनिक स्पीड वाली भी हैं।
यह डिफेंस सिस्टम एक तरह से मिसाइल शील्ड का भी काम करेगा। यह पाकिस्तान या चीन की न्यूक्लियर पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को शील्ड देगा।यह डिफेंस सिस्टम एक तरह से मिसाइल शील्ड का भी काम करेगा। यह पाकिस्तान या चीन की न्यूक्लियर पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को शील्ड देगा।
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