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2G SCAM: कहानी उस घोटाले की, जो कभी हुआ ही नहीं था

हुआ कुछ यूं था में आज हम बात करेंगे एक ऐसे घोटाले की जिसमें कुछ हुआ ही नहीं था....यानी घोटाला थोपने का घोटाला।

Danik Bhaskar | Dec 21, 2017, 06:38 PM IST

इन्फोटेनमेंट डेस्क. हुआ कुछ यूं था में आज हम बात करेंगे एक ऐसे घोटाले की जिसमें कुछ हुआ ही नहीं था....यानी घोटाला थोपने का घोटाला। अब कोर्ट में इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ है.......अदालत में साबित ये हुआ है कि घोटाला 2जी का नहीं, झूठ का घोटाला था...तो हुआ कुछ यूं था कि साल 2010 में तत्कालीन कैग विनोद राय ने अपनी रिपोर्ट में टेलीकॉम इंडस्ट्री से जुड़े 2जी स्कैम का पर्दाफाश किया। इसके बाद तब विपक्ष में बैठी भाजपा ने ना सिर्फ संसद में हंगामा किया बल्कि पूरे देश में सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। छह साल चली कानूनी लड़ाई के बाद आज सीबीआई की विशेष अदालत ने यूपीए सरकार में टेलीकॉम मिनिस्टर रहे ए. राजा और डीएमके नेता कनिमोझी समेत इसके मामले के 35 आरोपियों को बरी कर दिया है। कैसे हुआ खुलासा...

साल 2010 में कैग् की रिपोर्ट सामने आती है और विपक्ष संसद से लेकर सड़क तक सरकार को घेरने में कामयाब हो जाता है। कैग की रिपोर्ट में 2008 में बांटे गए स्पेक्ट्रम पर सवाल उठाए गए थे। इसमें बताया गया था कि नीलामी के बजाए 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार स्पेक्ट्रम बांटा गया था। इससे सरकार को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। साथ ही कहा गया कि अगर नीलामी के आधार पर लाइसेंस बांटे जाते तो यह रकम सरकार के खजाने में जाती। दिसंबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में स्पेशल कोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा। स्पेक्ट्रम घोटाला सामने आने के बाद 2011 में अदालत ने 17 आरोपियों को शुरुआती दोषी मानकर 6 महीने की सजा सुनाई थी। घोटाले में दो मामले सीबीआई के और एक मामला एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) का था।
सीबीआई ने पहले मामले में राजा, कनिमोझी समेत कई लोगों और तीन कंपनियों को आरोपी बनाया। 30 अप्रैल 2011 को सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में राजा और अन्य पर 30 हजार 984 करोड़ के नुकसान का आरोप लगाया था। इसमें 2जी स्पेक्ट्रम के लिए 122 लाइसेंस दिए गए थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी, 2012 को रद्द कर दिया। कोर्ट ने अक्टूबर 2011 में आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, अपने पद का दुरुपयोग करने और रिश्वत लेने का चार्ज लगाया।
सीबीआई की विशेष अदालत से सभी आरोपियों के बरी होने के बाद राजा के वकील मनु शर्मा ने कहा, "किसी भी बड़े मुकदमे में वक्त लगता है लेकिन सच्चाई सामने आ गई। मुकदमे के दौरान कोई एविडेंस नहीं दिया गया। स्वान टेलीकॉम के वकील विजय अग्रवाल ने कहा, "प्रॉसिक्यूशन आरोप साबित करने में नाकाम रहा। सीबीआई ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया था। लॉस दिखाया गया था, लेकिन असल में कोई नुकसान हुआ ही नहीं था। लिहाजा सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।"
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि मेरे खिलाफ जो प्रोपेगैंडा फैलाया गया था आज उसका जवाब मिला है। कपिल सिब्बल ने कहा कि मेरी जीरो लॉस वाली बात सही साबित हुई। विपक्ष ने देश को गलत जानकारी दी। काफी हंगामा किया। विपक्ष और विनोद राय को देश से माफी मांगनी चाहिए। पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि हमारी सरकार पर लगाए गए आरोप झूठे थे।