--Advertisement--

इंडिया के बिगेस्ट कम्युनिकेशन सैटेलाइट से टूटा संपर्क, दोबारा लिंक करने की कोशिश में जुटे वैज्ञानिक

तीसरे और आखिरी चरण में लैम इंजन की फायरिंग के दौरान सैटेलाइट से इसरो का संपर्क टूट गया।

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:56 PM IST

नेशनल डेस्क. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) का कम्युनिकेशन सैटेलाइट जीसैट-6ए से संपर्क टूट गया है। रविवार को इसरो की आधिकारिक वेबसाइट ने इसकी जानकारी दी। एजेंसी के मुताबिक, तीसरे और आखिरी चरण में लैम इंजन की फायरिंग के दौरान सैटेलाइट से इसरो का संपर्क टूट गया। बता दें कि इसरो ने 29 मार्च को जीएसएलवी-एफ08 रॉकेट के जरिए जीसैट-6ए को लॉन्च किया था। इसे पृथ्वी से 35,900 किलोमीटर ऊपर कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर लिया गया था।

सैटेलाइट से लिंक जोड़ने की कोशिश जारी: इसरो
- इसरो ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जीसैट-6ए के अपडेट में लिखा, “जीसैट-6ए सैटेलाइट को लैम इंजन फायरिंग की मदद से 31 मार्च की सुबह सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में स्थापित कर दिया गया था। काफी देर तक चली फायरिंग के बाद जब सैटेलाइट सामान्य संचालन करने लगा, ठीक उसी वक्त तीसरी और आखिरी फायरिंग में सैटेलाइट से संपर्क टूट गया। सैटेलाइट से दोबारा संपर्क जोड़ने की कोशिशें जारी हैं।”

जीएसएलवी-एफ08 से लॉन्च किया गया था सैटेलाइट
- सबसे बड़ी कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स में से एक जीसैट-6ए को को गुरुवार को लाॅन्च किया गया था। इसके लिए इसरो का जीएसएलवी-एफ08 रॉकेट की मदद ली गई थी।
- जीएसएलवी में इस बार नया इंजन लगाया गया था। बताया गया है कि भारत के दूसरे चांद मशन के लिए ये रॉकेट अहम होने वाला था।
- 10 साल की मिशन लाइफ वाले जीसैट-6ए से मोबाइल कम्युनिकेशन में बड़े सुधार की उम्मीद की गई है। सेना के लिए इसका बड़ा महत्व है।

जीसैट-6ए सैटेलाइट से क्या फायदा होगा?
270 करोड़ की लागत से बने जीसैट-6ए में एडवांस कम्युनिकेश पैनल्स और डिवाइसेस लगाए गए हैं। इससे सुदूर क्षेत्रों में भी मोबाइल से कम्युनिकेशन में आसानी होती। इससे सेना को भी कम्युनिकेशन स्थापित करने में काफी मदद मिलती। इस सैटेलाइट को 10 साल तक काम करने के उद्देश्य से भेजा गया था।