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सिर्फ 51 रुपए के लिए बैंक के खिलाफ 3 साल तक लड़ा केस, अब बैंक देगा 9 हजार रुपए

51 रुपए के लिए बैंक के खिलाफ एक शख्स ने 3 साल तक केस लड़ा।

Danik Bhaskar | Feb 05, 2018, 02:28 PM IST

नेशनल डेस्क. सरकारी ऑफिस में काम नहीं होता। प्राइवेट वाले मनमाने ढंग से पैसे लेते हैं। बैंक वालों की सर्विस अच्छी नहीं है। आपको सिस्टम से ऐसी तमाम शिकायतें होती हैं लेकिन शायद ही कभी इन कमियों के खिलाफ एक्शन लिया हो। बैंगलुरु में रहने वाले सईद हुसैनी ने एक्शन लिया। उन्होंने महज 51 रुपए के लिए एक बैंक के खिलाफ 3 साल तक केस लड़ा और अन्त में जीत हासिल की। SBI बैंक के खिलाफ लड़ा केस...

51 रुपए के बदले बैंक को देना पड़ा 9 हजार रुपए
बैंगलुरु में रहने वाले सईद हुसैन ने SBI के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में केस किया था। उन्होंने बैंक पर खराब सर्विस और बिना बताए 51 रुपए काटने का आरोप लगाया। जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई की और फैसला सुनाया कि सईद को बैंक 51 रुपए वापस करे। कोर्ट ने बैंक को आदेश दिया कि खराब सर्विस की वजह से परेशानी के बदले 5 हजार रुपए और केस लड़के के चक्कर में खर्च हुए 4 हजार रुपए भी सईद को दे।

कैसे कटे थे 51 रुपए
सईद ने बताया कि 25 मई 2015 को उनके SBI अकाउंट से अचानक 51 रुपए कट गए। उन्होंने बैंक से पूछा तो पता चला कि बैंक ने सईद के घर कोरियर से चेकबुक भेजी थी। लेकिन घर पर कोई नहीं था, लिहाजा कोरियर पर्सन वापस चला गया। इसमें कोरियर पर्सन ने 51 रुपए चार्ज किए। जिसे बैंक ने सईद के अकाउंट से काटा। सईद ने जब ये वजह सुनी तो हैरान रह गए। सईद ने कहा कि उन्होंने तो चेकबुक घर भेजने का ऑप्शन ही नहीं चुना था। बैंक में जाकर ही अपनी चेकबुक रिसीव की थी। फिर 51 रुपए काटना गलत है।

51 रुपए काटने के अलावा सईद को बैंक से और भी कई शिकायते थीं। उन्होंने बताया कि साल 2014 में 23 सितंबर को उन्होंने 20 हजार रुपए ट्विंकल पब्लिक स्कूल के खाते में ट्रांसफर किए। लेकिन तीन दिन बाद भी पैसे नहीं पहुंचे तो स्कूल वालों ने सईद से शिकायत की। सईद ने इस बारे में बैंक से पूछा तो बैंक वालों ने कहा कि संबंधित कर्मचारी छुट्टी पर था। इसलिए पैसे ट्रांसफर नहीं हो सके। सईद ने दोबारा पेमेंट करने के लिए एक मेल भी किया। लेकिन कोई जवाब नहीं आया। करीब आठ दिन बाद रुपए ट्रांसफर हुए। लेकिन इसके लिए बैंक ने कोई माफी नहीं मांगी।

सईद ने बताया कि बैंक की खराब सर्विसेज का सिलसिला चलता रहा। लेकिन बैंक के कर्मचारी सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे थे। लिहाजा उन्होंने उपभोक्ता फोरम में शिकायत की। जिसका 3 साल बाद फैसला आया और सईद की जीत हुई।