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टीशर्ट पर मांगे लिखवाकर संसद पहुंचे TDP सांसद, पार्टी के दो केंद्रीय मंत्रियों ने दिया इस्तीफा

टीडीपी के दो केंद्रीय मंत्री पीएम से मिलने 7 लोककल्याण मार्ग पहुंचे और अपना इस्तीफा सौंपा दिया।

Dainik Bhaskar

Mar 08, 2018, 08:08 PM IST
TDP MP arrived Parliament wearing t-shirt with 6 demands for the AP printed in it

नेशनल डेस्क. आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करते हुए टीडीपी सांसद सीएम रमेश एक ऐसी टीशर्ट पहनकर संसद पहुंचे जिसपर आंध्र प्रदेश के लिए 6 मांगें लिखी हुईं थीं। जिसमें विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग के अलावा विशाखापट्टनम में नया रेलवे जोन बनाने और कडप्पा स्टील प्लांट और मेगा सिंचाई परियोजना पोलावरम के लिए पैसा दिए जाने की भी मांग थी। बता दें कि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने के विवाद के बीच टीडीपी के दो केंद्रीय मंत्री अशोक गजपति राजू और वाईएस चौधरी ने पीएम से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा दिया। चंद्रबाबू ने बताया था- "मैं 29 बार दिल्ली गया, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं मिला। गठबंधन के सदस्य होने के नाते ये मेरी जिम्मेदारी बनती है कि प्रधानमंत्री को पार्टी के फैसले से अवगत कराऊं। मेरे ओएसडी ने पीएम के ओएसडी से बात की लेकिन मोदी फोनलाइन पर नहीं आए।"

नायडू ने मोदी को बताई सरकार से हटने की वजह
-एएनआई ने डीटीपी सूत्रों के हवाले से बताया कि एपी सीएम नायडू और प्रधानमंत्री के बीच बातचीत हुई। इस दौरान नायडू ने नरेंद्र मोदी को टीडीपी के केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे और सरकार से हटने की वजह बताई। फिलहाल बातचीत की पूरी डिटेल नहीं मिल पाई है।
- उधर, पीएम से मुलाकात के बाद टीडीपी सांसद वायएस चौधरी ने कहा- "हम एनडीए हिस्सा बने रहेंगे, लेकिन सरकार में कोई भी पोजिशन नहीं लेंगे। मैं नहीं समझता कि इसमें कुछ गलत है।"

आखिर क्या है टीडीपी की मांग?
आंध्रप्रदेश की दलील है कि हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी बनाने से रेवेन्यू का काफी नुकसान हुआ है। बदले में राज्य को मदद दी जानी थी। इसके लिए विशेष दर्जे का वादा किया गया था। अब केंद्र का दावा है कि उस वक्त विशेष राज्य के दर्जे का विचार अस्तित्व में था। 14वें वित्त आयोग के तहत यह दर्जा सिर्फ पूर्वोत्तर और तीन पहाड़ी राज्यों तक सीमित हो गया।

किस बात से शुरू हुआ टीडीपी-बीजेपी के बीच विवाद?
सूत्रों ने ‘भास्कर’ को बताया कि दरअसल, दोनों दलों के बीच तनातनी की वजह आंध्रप्रदेश के राजनीतिक समीकरण हैं। राज्य में अगले साल लोकसभा के साथ ही चुनाव होने हैं। सूत्रों के अनुसार आंध्र में बीजेपी धीरे-धीरे आधार बढ़ाने में लगी है। माना जा रहा है कि जगनमोहन रेड्‌डी की वाईएसआर कांग्रेस के साथ परोक्ष समझौता हो चुका है। नायडू यह जानते हैं। इसीलिए उन्होंने विशेष दर्जे का मुद्दा छेड़ दिया। केंद्र इसे मंजूर करे या नामंजूर, दोनों ही सूरत में नायडू को राजनीतिक फायदा दिख रहा है। बीजेपी किसी भी तरह यह मुद्दा चुनाव तक टालना चाहती थी।

जेटली की कौन-सी बात चंद्रबाबू नायडू को चुभ गई?
- सूत्रों ने ‘भास्कर’ को बताया कि बजट सत्र के पहले चरण में टीडीपी सांसदों का हंगामा देख अमित शाह ने नायडू को जेटली से मिलने के लिए कहा था। राज्य की तीन सदस्यीय टीम दो दिन पहले दिल्ली आई थी। जेटली ने उन्हें भी दो टूक ना कहा था। वह टीम अमित शाह से भी नहीं मिल पाई।

अब टीडीपी का क्या रुख है?
- नायडू ने कहा कि फिलहाल हम सरकार से बाहर हैं। बीजेपी-टीडीपी गठबंधन के मुद्दे पर बाद में विचार किया जाएगा।
- नायडू ने ये भी कहा कि भविष्य में दोनों पार्टियों का अलायंस हो सकता है।

टीडीपी की राज्य और केंद्र में कितनी अहमियत है?
- एनडीए में बीजेपी के बाद टीडीपी सबसे बड़ी पार्टी थी। उसके लोकसभा में 16 (15 आंध्र प्रदेश, एक तेलंगाना से) और राज्यसभा में 6 सांसद थे।
- टीडीपी के अशोक गजपति राजू नागरिक उड्डयन और वाईएस चौधरी विज्ञान-तकनीकी राज्य मंत्री थे।
- एनडीए-टीडीपी गठबंधन चार साल चला। टीडीपी पहली चुनाव पूर्व सहयोगी पार्टी है जिसने मोदी सरकार छोड़ने का एलान किया।

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