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डिलिवरी के वक्त डॉक्टर महिलाओं से करते हैं फ्रॉड, WHO की रिपोर्ट में दावा

महिलाओं की डिलिवरी के वक्त डॉक्टर करते हैं फ्रॉड- WHO की रिपोर्ट में दावा

Dainik Bhaskar

Feb 22, 2018, 01:36 PM IST
WHO REPORT ON WOMEN CESAREAN DELIVERY

नेशनल डेस्क. बच्चे के जन्म के वक्त हर मां चाहती है कि उसकी नॉर्मल डिलीवरी हो। लेकिन कई बार क्रिटिकल कंडीनशन होने पर डॉक्टर सीजेरियन की सलाह देते हैं। ऐसे में WHO की एक रिपोर्ट चौंकाती है। जिसके मुताबिक डिलिवरी के वक्त डॉक्टर्स मरीज से फ्रॉड करते हैं। उन्हें लगता है कि नॉर्मल डिलिवरी करने में ज्यादा समय बर्बाद होता है इसलिए सीजेरियन ऑपरेशन कर दो। यही वजह है कि पिछले दस सालों में सीजेरियन डिलिवरी में दोगुनी बढ़ोत्तरी हुई है।

- WHO की रिपोर्ट में कहा गया कि डॉक्टर्स बड़े पैमाने पर ऑक्सीटोसिन नाम की एक दवा का यूज सीजेरियन डिलिवरी के दौरान करते हैं। जो महिलाओं की प्राकृतिक डिलिवरी से बड़ी छेड़छाड़ है। इस दवा का बुरा इफेक्ट महिलाओं की हेल्थ पर पड़ता है। डब्ल्यूएचओ ने साल 2015 में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि अगर सीजेरियन डिलिवरी की दर 10 परसेंट से ज्यादा है तो ये ठीक नहीं है।

- नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की तीसरी रिपोर्ट(2005-06) के मुताबिक भारत में सीजेरियन डिलिवरी का आंकड़ा 8.5 परसेंट था जो साल 2015-16 में बढ़कर 17.2 परसेंट हो गया। ये सीजेरियन डिलिवरी के जरिए दोगुनी बढ़ोत्तरी को दिखाता है।

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