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PNB घोटाला: यशवंत सिन्हा ने बोले- जेटली की भी जांच होनी चाहिए, वो बच नहीं सकते

Dainik Bhaskar

Feb 22, 2018, 12:44 PM IST

नीरव मोदी- पीएनबी घोटाले पर बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने सरकार के विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं।

yashwant sinha fire on finance minister on pnb scam

स्पेशल डेस्क. नीरव मोदी- पीएनबी घोटाले पर बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने सरकार के विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने सरकार की ओर से स्थिति साफ न करने और मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली की खामोशी पर एतराज जताया है। उन्होंने कहा, ये सच है कि वित्त मंत्री हर दिन हर संस्था के काम पर नजर नहीं रख सकता। लेकिन इससे वो अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से भी बच नहीं सकता है। सिन्हा ने अपने और मनमोहन सिंह के दौर के दो स्कैम का जिक्र करते हुए कहा कि हमें भी इन पर जवाब देना पड़ा था।

क्या कहा सिन्हा ने ?
- सिन्हा ने कहा कि 1992 में हर्षद मेहता स्कैम के वक्त उस वक्त के तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह को भी इस घोटाले का जिम्मेदार माना था। क्योंकि वित्त मंत्री रहते हुए वित्त विभाग की जिम्मेदारी उनकी ही थी। इसी तरह केतन पारेख स्कैम के दौरान उस वक्त के वित्त मंत्री रहे सिन्हा ने भी जांच का सामना किया था।

क्या था हर्षद मेहता घोटाला?

इंडियन इकोनॉमी के लिए साल 1990 से 92 का समय बड़े बदलाव का वक्त था। देश ने उदारवादी इकोनॉमी की तरफ चलना शुरू कर दिया था। लेकिन इसी दौर में देश के सामने एक ऐसा घोटाला सामने आया, जिसने शेयर खरीद-बिक्री की प्रकिया में ऐतिहासिक परिवर्तन किए। साल 1990 के समय से शेयर मार्केट में लगातार तेजी का रुख था। इस तेजी के लिए शेयर ब्रोकर हर्षद मेहता जिम्मेदार माना जाने लगा। यहां तक की हर्षद मेहता को ‘बिग बुल’ का दर्जा दे दिया गया।

आगे की स्लाइड्स में देखें, कैसे किया घोटाला और जानें केतन पारेख घोटाले के बारे में भी...

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कैसे किया इतना बड़ा घोटाला
एक वक्त ऐसा था जब हर्षद मेहता शेयर मार्केट में लगातार निवेश करता जा रहा था। जिस कारण शेयर मार्केट में लगातार तेजी बनती चली गई। लेकिन फिर सवाल उठा कि आखिर शेयर मार्केट में निवेश करने के लिए मेहता के पास इतने पैसे कहां से आए। फिर अप्रैल 1992 में टाइम्स ऑफ इंडिया के एक पत्रकार ने इसका खुलासा किया। इस लेख में बताया गया कि कैसे हर्षद मेहता ने बैंकिंग के नियम का फायदा उठाकर बैंकों को बिना बताए उनके करोड़ों रुपए को शेयर मार्केट में लगाया था। मेहता दो बैंकों के बीच बिचौलिया बनकर 15 दिन के नाम पर लोन लेकर बैंकों से पैसा उठाता और फिर मुनाफा कमाकर बैंकों को पैसा लौटा देता। ये बात जब सामने आई तो शेयर मार्केट में तेजी से गिरावट आनी शुरू हो गई। 4,000 करोड़ रुपए से अधिक के इस घोटाले के बाद ही सेबी को शेयर मार्केट में गड़बड़ी रोकने की ताकत दी गई।

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केतन पारेख घोटाले में डूबे 800 करोड़ रुपए
हर्षद मेहता की तरह केतन पारेख घोटाला को भी देश नहीं भूल सकता। कहा जाता है कि हर्षद मेहता, केतन पारेख का मेंटर था। और उसी की तर्ज पर साल 2001 तक केतन पारेख देश का सफल ब्रोकर बन गया। हर्षद मेहता की तरह ही केतन पारेख ने उस समय ग्लोबल ट्रस्ट बैंक और माधवपुरा मर्सेटाइल को-ऑपरेटिव बैंक से पैसा लिया और के-10 स्टॉक्स के नाम से स्टॉक को मार्केट में हेरफेर किया। पारेख ने तमाम नियमों को तोड़ते हुए कई फर्जी कंपनियों के शेयरों के भाव बढ़ा दिये थे। बाद में आई जोरदार बिकवाली से देश के लाखों निवेशकों को करोड़ों रुपए का चूना लगा। केतन पारिख पर 2017 तक का बैन है, तबतक वह शेयर मार्केट में ट्रेडिंग नही कर सकता।

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