60 दिन में घरेलु हिंसा के मामले को निपटाना जरूरी, कोई भी महिला इस कानून के तहत पा सकती है न्याय / 60 दिन में घरेलु हिंसा के मामले को निपटाना जरूरी, कोई भी महिला इस कानून के तहत पा सकती है न्याय

dainikbhaskar.com

Jun 20, 2018, 12:02 AM IST

मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की पत्नी हैं सरोज कुमारी।

All you Need to Know about Domestic Violence Act

न्यूज डेस्क। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम अर्जुन सिंह की पत्नी सरोज कुमारी (80) ने अपने बेटों अजय सिंह और अभिमन्यु सिंह पर घरेलू हिंसा करने और घर से बेदखल करने का आरोप लगाया है।

बता दें कि साल 2013 में कांग्रेस विधायक चुने गए अजय सिंह विपक्ष नेता हैं। ये 25.5 करोड़ के मालिक हैं। इनकी भोपाल से लेकर दिल्ली-मुंबई तक करोड़ों की प्रॉपर्टीज हैं। कानून के तहत, कोई भी महिला घरेलू हिंसा होने पर डोमेस्टिक वॉयलेंस एक्ट, 2005 के तहत न्याय पा सकती है।

60 दिन में प्रकरण का निराकरण होना जरूरी
- कोई भी महिला शारीरिक, मानसिक, आर्थिक शोषण या अपमान होने पर डोमेस्टिक वॉयलेंस एक्ट, 2005 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन कर सकती है।

- मप्र हाईकोर्ट के एडवोकेट संजय मेहरा ने बताया कि डोमेस्टिक वॉयलेंस एक्ट की धारा 12 के तहत तीन दिन में मजिस्ट्रेट को सुनवाई शुरू करना चाहिए। 60 दिन में प्रकरण का निराकरण होना जरूरी है।

- एक्ट की धारा 20 और 22 के प्रोविजन के तहत मजिस्ट्रेट पीड़ित व्यक्ति को आर्थिक लाभ, भरण-पोषण और कम्पनसेशन के लिए भी ऑर्डर दे सकते हैं। कोर्ट का आदेश न मानने पर एक्ट की धारा 31 के तहत 1 साल की सजा और 20 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है। इसमें मजिस्ट्रेट आईपीसी की धारा 498ए के तहत भी कार्रवाई कर सकते हैं। घरेलू हिंसा अधिनियम सिर्फ पत्नी ही नहीं बल्कि हर महिला के लिए है।

पैरेंट्स बच्चे से मेंटेनेन्स की मांग भी कर सकते हैं...
- मेंटेनेन्स लेने के लिए पैरेंट्स सीआरपीसी के सेक्शन 125 के तहत क्लेम कर सकते हैं। इसमें कोर्ट के अलावा पैरेंट्स मेंटेनेन्स ट्रिब्यूनल में भी आवेदन कर सकते हैं। मेंटेनेन्स में खाना, रहना, कपड़े, मेडिकल अटेंडेंस के साथ ही ट्रीटमेंट का खर्चा शामिल किया जाता है।

- पैरेंट्स के अलावा सीनियर सिटीजन (60 साल या इससे ज्यादा उम्र वाले) भी मेंटेनेन्स के लिए क्लेम कर सकते हैं। ये इसी कंडीशन में आवेदन कर सकते हैं, जब खुद का खर्चा उठाने में असमर्थ हों।

- ऐसे नागरिक जिनकी कोई संतान न हो, वे उस रिश्तेदार से मांग कर सकते हैं, जिसे उनकी प्रॉपर्टी में हक मिलना हो। एक्ट में मैक्सिमम 10 हजार रुपए प्रतिमाह मेंटेनेन्स देना जरूरी किया गया है। हालांकि मेंटेनेन्स संबंधित व्यक्ति की जरूरतों के हिसाब से तय होता है।


कैसे करना होगा मेंटेनेन्स के लिए आवेदन
- जिले की मेंटेनेन्स ट्रिब्यूनल में इसके लिए आवेदन किया जा सकता है। यदि आप खुद आवेदन करने नहीं जा सकते तो किसी दूसरे व्यक्ति को इसके लिए भेजा जा सकता है। पैरेंट्स इसमें राज्य सरकार द्वारा अपॉइंट मेंटेनेन्स ऑफिसर की मदद भी ले सकते हैं।

- ट्रिब्यूनल के ऑर्डर के बाद भी यदि संबंधित व्यक्ति मेंटेनेन्स नहीं देता है तो उसके खिलाफ वारंट जारी हो सकता है। वारंट के बाद भी मेंटेनेन्स नहीं देता तो उसे 1 माह तक की जेल हो सकती है। इसे तब तक बढ़ाया जा सकता है, जब तक वे मेंटेनेन्स न दे दे।

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