बैडमिंटन फैमिली: गायत्री गोपीचंद की ट्रेनिंग सुबह 4 बजे से होती है शुरू, रात के खाने पर भी सिर्फ खेल की बात

4 वर्ष पहले
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- गायत्री की मां भी रह चुकीं बैडमिंटन चैम्पियन

- गायत्री को पुलेला के अलावा भी कई कोच देते हैं ट्रेनिंग

 

 

 

भास्कर न्यूज नेटवर्क.  पुलेला गोपीचंद की 15 साल की बेटी गायत्री अगले महीने जकार्ता में होने वाले एशियन गेम्स में शामिल होने वाली हैं। उम्मीदें इसलिए ज्यादा हैं, क्योंकि गोपीचंद एकेडमी से पीवी सिंधु और साइना नेहवाल जैसे खिलाड़ी निकले हैं, जिन्होंने देश को बैडमिंटन में कई मैडल दिलाए हैं। 

गोपीचंद एकेडमी में जो खिलाड़ी निखरे उन्हें तो सिर्फ गोपीचंद ने ही प्रशिक्षण दिया, लेकिन गायत्री को उनकी मां पीवीवी लक्ष्मी का सान्निध्य भी मिला। लक्ष्मी पूर्व बैडमिंटन चैम्पियन हैं और 8 बार राष्ट्रीय खिताब जीत चुकी हैं। ओलिम्पिक खेल चुकीं लक्ष्मी हर दिन के खेल में दखल नहीं देतीं, लेकिन बेटी और बेटे विष्णु  को टिप्स जरूर देती हैं। गायत्री ने 12 साल की उम्र में ही अपना हुनर साबित कर दिया था, वे अंडर 13 की बैडमिंटन चैम्पियन बन गई थीं।

 

भाई विष्णु भी अाजमाता है बैडमिंटन में हाथ : छोटा भाई विष्णु भी बैडमिंटन ही खेलता है और बहन के साथ ट्रेनिंग लेता है। गायत्री नियमित रूप से स्कूल नहीं जाती हैं। वह घर पर ही ट्यूशन लेकर पढ़ाई पूरी करती हैं और सिर्फ परीक्षा देने के लिए स्कूल जाती हैं। वे नौ साल से यही कर रही हैं। छह साल की थीं, तब से गोपीचंद एकेडमी में ट्रेनिंग ले रही हैं। गायत्री खुद अलार्म लगाकर सोती हैं। सुबह 4.15 बजे से ट्रेनिंग शुरू हो जाती है, वह सुबह सात बजे तक चलती है। इसके बाद सुबह 9 बजे से 11 बजे तक। इसके बाद दोपहर में तीन बजे से पांच बजे तक। उन्हें पुलेला गोपीचंद के अलावा कुछ और कोच, जैसे- सत्य, विष्णु, राजेंद्र और अनिल भी ट्रेनिंग देते हैं। 

 

भाई को पहले स्केटिंग पसंद थी : परिवार में प्रत्येक व्यक्ति सुबह जल्दी उठ जाता है। बच्चों की ट्रेनिंग के लिए माता-पिता भी उठते हैं। रात के खाने के वक्त पूरा गोपीचंद परिवार एकसाथ होता है। यही वह समय होता है, जब दिनभर की चर्चा परिवार एक दूसरे से करता है। लेकिन इस समय भी सारी बात खेल से ही संबंधित होती है। गायत्री के भाई ने पहले स्केटिंग और अन्य खेल में रुचि ली, बाद में बैडमिंटन में आया, लेकिन गायत्री को शुरू से ही यही खेल पसंद था। इसके बाद प्रेरणा माता-पिता से भी मिली। हालांकि, गायत्री की रुचि संगीत में भी है।

 

गायत्री के लिए पिता हीरो नहीं : अधिकांश खिलाड़ी, जिनके पिता भी खिलाड़ी रहे हैं, वे अपने पिता को ही अपना हीरो बताते हैं, लेकिन गायत्री इनसे अलग हैं। वे लिन डेन, चेंग लोंग को अपना हीरो मानती हैं। वे कहती हैं कि मुझे उनके स्मैशेज देखना अच्छा लगता है। वे खुद भी एेसा खेलने का प्रयास करती हैं। 

 

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