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जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगेगा: चार साल में पहली बार भाजपा ने किसी राज्य में खुद सत्ता छोड़ी, कहा- आतंकवाद बढ़ने से गठबंधन में रहना मुश्किल था

राम माधव ने कहा कि राज्य का मुख्य नेतृत्व जिनके हाथ में था, वो जम्मू-कश्मीर में हालात संभाल नहीं पा रहे थे।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 20, 2018, 09:59 AM IST

      • पीडीपी, कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस, तीनों ने कहा है कि वे किसी से गठबंधन नहीं करेंगे
      • मार्च 2015 में भाजपा के समर्थन से मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बने थे, सईद के निधन के बाद मेहबूबा मुफ्ती सीएम बनीं, डिप्टी सीएम का पद भाजपा के पास था
      • बताया जाता है कि महबूबा के दबाव में रमजान में सीजफायर हुआ, लेकिन इस दौरान आतंकी हमले बढ़ गए

      नई दिल्ली/श्रीनगर. भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी से गठबंधन तोड़कर महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। भाजपा के सभी मंत्रियों ने मंगलवार को इस्तीफे दे दिए। महबूबा ने भी इस्तीफा दे दिया। दोनों दलों के बीच तीन साल पहले गठबंधन हुआ था। कांग्रेस और पीडीपी ने एकदूसरे के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार किया है। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने भी किसी गठबंधन की संभावना से इनकार किया है। देर शाम राज्यपाल एनएन वोहरा ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को रिपोर्ट भेजी।

      दो वजह जो भाजपा ने बताईं : राम माधव ने कहा, ‘‘घाटी में आतंकवाद, कट्टरपंथ, हिंसा बढ़ रही है। ऐसे माहौल में सरकार में रहना मुश्किल था। रमजान के दौरान केंद्र ने शांति के मकसद से ऑपरेशंस रुकवाए। लेकिन बदले में शांति नहीं मिली। जम्मू और कश्मीर क्षेत्र के बीच सरकार के भेदभाव के कारण भी हम गठबंधन में नहीं रह सकते थे।’’

      मतभेद की दो असल वजहें: पहली- रमजान के दौरान सुरक्षाबल आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन रोक दें, इसे लेकर भाजपा-पीडीपी में मतभेद थे। महबूबा के दबाव में केंद्र ने सीजफायर तो किया लेकिन इस दौरान घाटी में 66 आतंकी हमले हुए, पिछले महीने से 48 ज्यादा। ऑपरेशन ऑलआउट को लेकर भी भाजपा-पीडीपी में मतभेद था। दूसरी- पीडीपी चाहती थी कि केंद्र सरकार हुर्रियत समेत सभी अलगाववादियों से बातचीत करे। लेकिन, भाजपा इसके पक्ष में नहीं थी।

      महबूबा ने कहा- कश्मीर में बाहुबल की नीति नहीं चलेगी : महबूबा मुफ्ती ने कहा, "भाजपा के साथ गठबंधन का मकसद मेल-मिलाप, पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्ते और यहां के लोगों के साथ बातचीत का था। हमने तीन साल अपनी तरफ से इस मकसद को पूरा करने की कोशिश की। युवाओं से केस वापस लिए, एकतरफा संघर्ष विराम घोषित किया। हमारा मानना है कि जम्मू-कश्मीर में डराने-धमकाने वाली या बाहुबल की नीति कामयाब नहीं हो सकती। जैसे ही भाजपा ने समर्थन वापस लिया, मैंने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेज दिया। हमारा किसी और के साथ गठबंधन करके सरकार बनाने का इरादा नहीं है।"

      कांग्रेस ने कहा- सरकार नहीं बनाएंगे: कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा,''पीडीपी के साथ कांग्रेस के सरकार बनाने का सवाल ही नहीं उठता। लेकिन, भाजपा पीडीपी सरकार के सिर पर सारी तोहमत मढ़कर भाग नहीं सकती है। इस सरकार में सबसे ज्यादा जवान शहीद हुए। सबसे ज्यादा आतंकी हमले हुए और सीजफायर वॉयलेशन हुआ।'' पीडीपी नेता रफी अहमद मीर ने कहा, ''भाजपा के इस फैसले से हमें आश्चर्य हुआ। हमें इस तरह के कोई संकेत नहीं मिले थे।''

      एनसी ने कहा- हमसे किसी ने संपर्क नहीं किया : राज्य में 15 सीटों वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मैंने गवर्नर से मुलाकात की और कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को न तो 2014 में जनादेश मिला था, न 2018 में हमारे पास बहुमत है। हमसे किसी ने संपर्क नहीं किया और हम भी किसी से संपर्क नहीं कर रहे। ऐसी स्थिति में राज्य में राज्यपाल शासन लगाने का ही रास्ता बचता है।’’

      राज्य में लोगों का जीने का अधिकार खतरे में :राम माधव ने कहा, ‘‘गृह मंत्रालय और एजेंसियों से सूचनाएं लेने के बाद हमने मोदीजी और अमित शाह से सलाह ली। हम इस नतीजे पर पहुंचे कि इस गठबंधन की राह पर चलना भाजपा के लिए मुश्किल होगा। घाटी में आतंकवाद, कट्टरपंथ और हिंसा बढ़ रही है। लोगों के जीने का अधिकार और बोलने की आजादी भी खतरे में है। पत्रकार शुजात बुखारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। ये स्थिति की गंभीरता को बताता है। रमजान के दौरान हमने ऑपरेशन रोके, ताकि लोगों को सहूलियत मिले। हमें लगा कि अलगाववादी ताकतें और आतंकवादी भी हमारे इस कदम पर अच्छी प्रतिक्रिया देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।"

      जम्मू कश्मीर विधानसभा में सीटों की स्थिति

      पार्टीसीटें
      पीडीपी28
      भाजपा25
      नेशनल कॉन्फ्रेंस15
      कांग्रेस12
      अन्य7
      कुल87
      बहुमत के लिए जरूरी44

      आगे क्या : कांग्रेस और भाजपा, दोनों के पास मौका, लेकिन राज्यपाल शासन की संभावना सर्वाधिक
      राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब राज्यपाल शासन के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। भाजपा भी यही चाहती है ताकि राज्यपाल के शासन में कड़ी कार्रवाई करके वह शेष देश में अपनी छवि सुधार सके। दलीय स्थिति भी नए गठबंधन की तरफ इशारा नहीं करती। पीडीपी (28), कांग्रेस (12) और अन्य (7) को मिलाएं तो 47 सीटें होती हैं। ऐसे में सरकार तो बन सकती है, लेकिन कांग्रेस यह जोखिम उठाने काे कतई तैयार नहीं होगी। महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के बाद तो सारी संभावनाएं खत्म ही हो गई हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस फिलहाल कुछ भी कर पाने की स्थिति में नहीं है। लेकिन, भाजपा चाहे तो नेशनल कॉन्फ्रेंस और कुछ निर्दलीयों को मिलाकर सरकार बना सकती है और अपना मुख्यमंत्री भी। क्योंकि, भाजपा (25), नेशनल कॉन्फ्रेंस (15) मिलाकर 40 होते हैं। अन्य जो 7 हैं, उनमें से चार इधर आ जाएं तो सरकार बन सकती है। नेशनल कॉन्फ्रेंस एक बार एनडीए का हिस्सा रह चुकी है।

      चुनाव के चार महीने बाद हुआ था गठबंधन: जम्मू-कश्मीर में 2014 के विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। चार महीने बाद फरवरी 2015 में भाजपा और पीडीपी के बीच गठबंधन हुआ था। पीडीपी के दिवंगत प्रमुख मुफ्ती मोहम्मद सईद मार्च 2015 में मुख्यमंत्री बने थे। जनवरी 2016 में सईद का निधन हो गया। उनके निधन के करीब तीन महीने बाद महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनीं। सईद और महबूबा की सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद भाजपा को मिला। सईद जब सीएम थे, तब डिप्टी सीएम भाजपा के निर्मल सिंह थे। इसी साल अप्रैल में निर्मल सिंह की जगह भाजपा के कविंदर गुप्ता डिप्टी सीएम बने।

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