दिल्ली में एक घर में 7 महिलाओं समेत 11 लोगों के शव लटके मिले, पुलिस को खुदकुशी का शक

4 वर्ष पहले
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  • 3 एंगल पर टिकी पुलिस की जांच, अब पोस्टमार्टम की रिपोर्ट का इंतजार 
  • कॉलोनी में न किसी ने कुछ देखा, न सुना, घर के गेट खुले थे पर कैश और सोना सलामत
  • एक या कुछ सदस्यों ने बाकी को नशीला पदार्थ खिलाकर लटकाया, फिर खुद फांसी लगाई 
  • रजिस्टर में लिखे 4 पेज मिले, जिसमें मोक्ष के लिए परमात्मा से मिलने की बात है

नई दिल्ली.  ​बुराड़ी इलाके के एक घर में रविवार सुबह 7 महिलाओं समेत 11 लोगों की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। पुलिस ने पहले सामूहिक हत्याकांड का केस दर्जकर जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी थी। लेकिन घर में मिले सबूतों के आधार पर देर शाम तक जांच सामूहिक आत्महत्या की ओर घूम गई। घर से बरामद एक रजिस्टर में आध्यात्मिक बातें लिखी मिलीं। आधा भर चुका यह रजिस्टर दिसंबर से लिखना शुरू किया गया था। 26 जून को चार पेज भरे गए। इनमें 30 जून को भगवान से मिलने जाने की बात भी कही गई। इसमें लिखा गया था- शरीर नश्वर है और आत्मा अमर। इसमें ये भी लिखा था कि कोई किस तरह हाथ-मुंह ढंककर अपने डर से उबर सकता है। निर्वाण का भी जिक्र किया गया था।

इन लोगों में से 10 के शव फंदे पर लटके थे। उनके मुंह और आंखों पर टेप चिपका था। 75 साल की महिला का शव दूसरे कमरे में जमीन पर पड़ा था। पुलिस के मुताबिक, बुजुर्ग की हत्या गला दबाकर की गई। मृतकों में दो भाइयों का परिवार, उनकी मां, बहन और भांजी शामिल हैं। पुलिस ने कहा, "नोट्स से ऐसा लगता है कि परिवार किसी तरह के संदेहास्पद अनुष्ठान करता था। शवों के मुंह और आंख ढंके हुए हैं। मौके से मिले नोट्स में भी यही बात लिखी हुई है।" उधर, क्राइम ब्रांच के पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार ने कहा- काला जादू और तांत्रिक क्रियाओं के एंगल से भी इस मामले की जांच की जाएगी।

 

खुदकुशी पर शक क्यों : पुलिस के मुताबिक, घर के दरवाजे खुले थे और फंदे से लटके लोगों के पैर भी जमीन से छू रहे थे। ऐसे में फांसी लगाना संदेहास्पद है। पुलिस सीधे तौर पर इसे खुदकुशी का मामला नहीं मान रही थी। पड़ोसियों ने भी बताया कि परिवार की किसी से दुश्मनी नहीं थी। वे धार्मिक प्रवृत्ति के मिलनसार लोग थे। DainikBhaskar.com ने झाबुआ (मध्यप्रदेश) में रहने वाले एक रिश्तेदार आदित्य सिंह सिसोदिया से बात की। आदित्य ने कहा, "मेरी शनिवार रात मौसी टीना और मौसा ललित से फोन पर बात हुई थी। तब बिल्कुल भी नहीं लगा कि वे किसी परेशानी या तनाव में थे। परिवार काफी खुश था और 17 जून को ही मौसा की भांजी प्रियंका की सगाई हुई थी, मैं भी वहां मौजूद था। शादी दिसंबर में होने वाली थी।" रिश्तेदार महावीर सिंह ने बताया कि मृतक भाइयों का पैतृक गांव राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में है। एक भाई दिनेश वहां रहता है और बहन बिल्ले सोनीपत में है। इनके पिता भूपाल सिंह कई साल पहले कारोबार के लिए दिल्ली आ गए थे। पिता के निधन के बाद बेटे-बेटियों ने गांव आना कम कर दिया था।

 

सुबह दुकान नहीं खुलने पर सामने आया मामला : पुलिस के मुताबिक, ललित भाटिया और उनके भाई भूपी का परिवार बुराड़ी स्थित संत नगर में रहता था। उनका प्लाईवुड और दूध का कारोबार था। घर में ही एक किराने की दुकान थी, जो सुबह 7:30 बजे तक खुल जाती थी, लेकिन रविवार को नहीं खुली। पड़ोसियों ने खुले दरवाजे से अंदर जाकर देखा तो शव सीलिंग से लटके थे। उन्होंने पुलिस को सूचना दी।

 

इन लोगों की मौत हुई : भूपी सिंह भाटिया (45), उसकी पत्नी श्वेता (42), बेटी नीतू (24), बेटी मीनू (22) और बेटा ध्रुव (15), भूपी का भाई ललित (42) उसकी पत्नी टीना (38), ललित का बेटा शिवम (12), भूपी की मां नारायण देवी (75), भूपी की बहन प्रतिभा (58), प्रतिभा की बेटी प्रियंका (30)।

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