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बुद्ध पूर्णिमा आज: जानिए इसका महत्व और बुद्ध के जन्म स्थान के फोटो

30 अप्रैल, यानि आज वैशाख महीने की पूर्णिमा को बोद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

Danik Bhaskar | Apr 30, 2018, 12:36 PM IST

30 अप्रैल, यानि आज वैशाख महीने की पूर्णिमा को बोद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व नेपाल के लुम्बिनी वन में हुआ था। ये जगह आज कपिलवस्तु और देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से पश्चिम दिशा में लगभग 12 किलोमीटर दूर है। लुम्बिनी बौद्ध धर्म के मतावलम्बियों का एक तीर्थ स्थान है। यह नेपाल के रूपनदेही जिले में पड़ता है। गौतम बुद्ध का ननिहाल देवदह में था। वर्तमान में यह जगह रुपनदेही जिले की एक नगरपालिका है।

आगे पढ़ें भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ी जगहों के बारे में

कपिलवस्तु का महत्व - कपिलवस्तु, सिद्धार्थ ( गौतम बुद्ध ) के पिता राजा शुद्धोधन के राज्य शाक्य गणराज्य (शाक्य महाजनपद) की राजधानी थी। अब कपिलवस्तु दक्षिण नेपाल में एक जिला है। घर छोड़ने से पहले सिद्धार्थ ( गौतम बुद्ध ) यहीं अपने पिता के महल में रहते थे।

बोधगया का महत्व - वैराग्य प्राप्त होने के बाद गौतम बुद्ध भारत में बिहार राज्य के गया जिले में पहुंचे। यहाँ वैशाख पूर्णिमा के दिन सिद्धार्थ वटवृक्ष के नीचे ध्यान लगाकर बैठे थे। ध्यान लगाने पर रात को सिद्धार्थ की साधना सफल हुई और उन्हें सत्यता का बोध हुआ। तभी से सिद्धार्थ बुद्ध कहलाए। जिस पीपल वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को बोध मिला वह बोधिवृक्ष कहलाया और गया के पास उस जगह को बोधगया के नाम से जाना जाता है।

सारनाथ - ये जगह भारत में उत्तरप्रदेश राज्य के वाराणसी जिले में है। आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गौतम बुद्ध काशी के पास मृगदाव (वर्तमान में सारनाथ) पहुचे। वहीं पर उन्होंने सबसे पहला धर्मोपदेश दिया और पाँच मित्रों को अपना अनुयायी बनाया और उन्हें धर्म के प्रचार करने के लिये भेज दिया।

कुशीनगर - भारत में ये जगह उत्तरप्रदेश राज्य के गोरखपुर से 50 किलोमीटर दूर हैं। यहां पर वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध ने महानिर्वाण की ओर प्रस्थान किया था। इसके बाद से भारत में इसी दिन को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। भारत ही नहीं दुनियाभर के बौद्ध धर्म वाले लोग गौतम बुद्ध की जयंती को धूमधाम से मनाते हैं...

कैसे मनाया जाता है ये पर्व - बुद्ध पूर्णिमा पर बौद्ध मतावलंबी बौद्ध विहारों और मठों में इकट्ठा होकर एक साथ उपासना करते हैं। दीप जलाते हैं। रंगीन पताकाओं से सजावट की जाती है और बुद्ध की शिक्षाओं का अनुसरण करने का संकल्प लेते हैं। इस दिन भक्त भगवान बुद्ध पर फूल चढ़ाते हैं, अगरबत्ती और मोमबत्तियां जलाते हैं तथा भगवान बुद्ध के पैर छूकर शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दिन बौद्ध धर्मावलंबी सफेद कपड़े पहनते हैं और बौद्ध विहारों और मठों में सामूहिक उपासना करते हैं। दान देते हैं। बौद्ध और हिंदू दोनों ही धर्मों के लोग बुद्ध पूर्णिमा को बहुत श्रद्धा के साथ मनाते हैं। बुद्ध पूर्णिमा का पर्व बुद्ध के आदर्शों और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

बुद्ध पूर्णिमा न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों में भी पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। श्रीलंका, कंबोडिया, वियतनाम, चीन, नेपाल थाईलैंड, मलयेशिया, म्यांमार, इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं। श्रीलंका में इस दिन को 'वेसाक' के नाम से जाना जाता है, जो निश्चित रूप से वैशाख का ही अपभ्रंश है।

देखिए गौतम बुद्ध का जन्म स्थान और अन्य देशों के बोद्ध मंदिर, स्तूप और मठ -