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आम आदमी के मनोरंजन से जुड़े दो मामले कोर्ट में, केबल टीवी चैनल सस्ते, विज्ञापन कम हो सकते हैं

सिफारिशें मान ली जाएं तो पूरे देश में न सिर्फ चैनल्स के दाम कम होंगे, बल्कि कार्यक्रम के बीच में विज्ञापन भी कम दिखेंगे।

राजीव कुमार | Last Modified - May 13, 2018, 08:59 AM IST

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    ट्राई ने वर्ष 2012 में सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सिफारिश दी थी कि टीवी चैनलों पर एक घंटे के दौरान दिखाए जाने वाले विज्ञापन किसी भी सूरत में 12 मिनट से अधिक समय के न हो। (सिम्बॉलिक इमेज)

    - केबल टीवी के दाम पर मद्रास हाईकोर्ट देगा फैसला
    - कार्यक्रम के बीच विज्ञापन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई

    नई दिल्ली. ट्राई की दो बेहद अहम सिफारिशों पर कोर्ट जल्द ही अपना निर्णय सुनाने वाला है। यदि ये सिफारिशें मान ली जाती हैं तो पूरे देश में न सिर्फ टीवी चैनल्स के दाम कम होंगे, बल्कि कार्यक्रम के बीच में विज्ञापन भी कम दिखाए जाएंगे। यानी ज्यादा समय तक प्रोगाम देखा जा सकेगा। पहले मामले में 2014 में ट्राई ने केबल चैनल्स के दाम को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के दायरे में लाने की सिफारिश की थी। 2016 में इस सिफारिश को ऑर्डर में बदला गया। चैनल्स और मल्टी सर्विस ऑपरेटर्स इसके खिलाफ कोर्ट में चले गए। यह केस दो साल से मद्रास हाईकोर्ट में चल रहा है। अब इस मामले में अगले सप्ताह फैसला आ सकता है। दूसरा मामला टीवी कार्यक्रम के बीच में विज्ञापन के समय से जुड़ा है।

    - ट्राई ने वर्ष 2012 में सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सिफारिश दी थी कि टीवी चैनलों पर एक घंटे के दौरान दिखाए जाने वाले विज्ञापन किसी भी सूरत में 12 मिनट से अधिक समय के न हो। इनमें 10 मिनट के कमर्शियल विज्ञापन हो और 2 मिनट के वे अपने विज्ञापन दिखा सकते हंै। इसे भी कोर्ट में चुनौती दे दी गई। यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है।
    - इस पर अगली सुनवाई 24 मई को होनी है। उम्मीद की जा रही है कि इसके बाद फैसला सुना दिया जाएगा। वहीं ट्राई के चेयरमैन आरएस शर्मा से यह पूछने पर कि मद्रास हाईकोर्ट का फैसला ट्राई के पक्ष में आया तो क्या होगा, उनका सीधा जवाब था, देशभर में केबल टीवी के पैसे आधे रह जाएंगे।
    - उपभोक्ता के पास विकल्प होना ही चाहिए। टीवी चैनल के दाम के मामले में चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एम सुंदर की पीठ ने जुलाई 2017 में अपना फैसला सुरक्षित रखा था। सात माह बाद भी फैसला नहीं आया। इस पर ट्राई ने सुप्रीम कोर्ट में जल्द फैसला करवाने की गुहार लगाई।
    - सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। जस्टिस एम सुंदर ने अपना फैसला जहां स्टार इंडिया और विजय टेलीविजन के पक्ष में दिया, वहीं चीफ जस्टिस ने अलग फैसला दिया।
    - दोनों जजों पर एक सहमति से फैसला न आने पर मामले को हाईकोर्ट के तीसरे वरिष्ठ जज के समक्ष भेज दिया गया। इसकी सूचना 6 मार्च को सुप्रीम कोर्ट को दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने उक्त मामले में 12 मार्च को मद्रास हाईकोर्ट को आदेश जारी किया कि वह प्रतिदिन सुनवाई करते हुए एक महीने के भीतर मामले का निपटारा करे।
    - मद्रास हाईकोर्ट ने 27 अप्रैल को सुनवाई पूरी कर ली है। कोर्ट ने कहा है कि दो हफ्ते में इस पर फैसला सुना दिया जाएगा।
    - स्टार इंडिया और विजय टेलीविजन के अलावा इस मामले में ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन, इंडिया ब्रॉडकास्टिंग फेडरेशन, डायरेक्ट टू होम (डीटीएच) और विडियोकॉन डी2एच भी पक्षकार बन गए हैं।


    4 वर्ष में टीवी देखना 50% हो चुका है महंगा
    पिछले पांच सालों में मोबाइल फोन कॉल की दरों में भारी गिरावट आई है। डेटा की दरें आधी से भी कम रह गई हैं। केबल टीवी व ब्राॅडकास्टर कंसल्टेंट कर्नल केके शर्मा के मुताबिक पिछले चार वर्षों में डीटीएच ऑपरेटर्स की तरफ से करीब 50% की बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने बताया कि डीटीएच सर्विस प्रोवाइडर की तरफ से चैनलों की दरों में बढ़ोतरी का कोई पैमाना नहीं है। इस पर लगाम के लिए ट्राई टैरिफ रेगुलेशन लेकर आया था।

    दामों को लेकर ट्राई की सिफारिश

    - 2014 में जारी ट्राई की सिफारिश के मुताबिक केबल टीवी ऑपरेटर किसी भी सूरत में ग्राहक से स्टेंडर्ड डेफिनेशन (एसडी) चैनलों के प्रसारण के लिए 130 रुपए मासिक से अधिक नहीं ले सकते।
    - हर ब्रॉडकास्टर को अपने चैनल का एमआरपी जारी करना होगा, जो किसी भी सूरत में 19 रुपए से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
    - हाई डेफिनेशन अर्थात एचडी चैनल इस दायरे से बाहर रहेंगे।
    - ब्रॉडकास्टर चाहे तो अपने चैनलों के बकेट पर ग्राहकों को 15 प्रतिशत तक की छूट दे सकते हैं। यह ऑफर ब्रॉडकास्टर से सीधे ग्राहकों को होगा, इसमें डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर छेड़छाड़ नहीं कर सकते।

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    अगली सुनवाई 24 मई को होनी है। उम्मीद की जा रही है कि इसके बाद फैसला सुना दिया जाएगा। (सिम्बॉलिक इमेज)
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