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डैम कितने जर्जर हैं, डेंगू कहां पनप रहा है? सरकार नहीं जानती; 27 केन्द्रीय,17 राज्य के मंत्रालय ऐसी समस्याओं से जूझ रहे हैं

ऐसी 340 समस्याएं, समाधान के लिए आगे आए सिर्फ 3 मंत्रालय

Danik Bhaskar | Aug 05, 2018, 12:29 AM IST
कृषि मंत्रालय ने कहा- उन्हें ऐ कृषि मंत्रालय ने कहा- उन्हें ऐ

नई दिल्ली. देश के डैम कितने जर्जर हैं, पेपर लेस सरकारी तंत्र कैसे बनाएं, हर घर से बारिश के पानी को कैसे बचाएं, डेंगू के मच्छर किन-किन स्थानों पर पनपते हैं? ऐसी 340 समस्याओं का समाधान सरकार नहीं खोज पा रही है। 27 केंद्रीय मंत्रालयों और 17 राज्यों के मंत्रालय इन समस्याओं से जूझ रहे हैं। ये समस्याएं रोचक हैं और आम लोगों से जुड़ी हुई भी हैं, लेकिन इनका समाधान कब और कैसे निकलेगा अभी ये तय नहीं है।

दरअसल, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली संस्था ऑल इडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने कुछ माह पहले इस संबंध में हैकाथॉन 2018 का आयोजन किया था। इसका लक्ष्य था कि टेक्नोलॉजी के जरिए इन समस्याओं का समाधान निकाला जाए। हैकाथॉन में 10 हजार बच्चों ने फाइनल एंट्री की थी। तीन दिन के इस हैकाथॉन में इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों के छात्रों ने छोटे स्तर पर तकनीकें विकसित कीं।

समाधान पर बड़े स्तर पर काम नहीं हो सका: एआईसीटीई के सलाहकार प्रोफेसर दिलीप मालखेड़े ने बताया कि ये आम जन से जुड़ी समस्याएं हैं। इनके समाधान का तरीका छात्रों ने अपने स्तर पर दिया। अब इन समाधानों को जमीन पर उतारने की जरूरत है। एआईसीटीई के ही एक अन्य अधिकारी ने बताया कि समस्याएं अभी भी मौजूद हैं, क्योंकि समाधान पर बड़े स्तर पर काम नहीं किया जा सका है। संबंधित मंत्रालयों को पत्र भेजे गए थे। इसमें उनसे कहा गया था कि अगर वे अपने मंत्रालय से संबंधित समस्या का समाधान चाहते हैं तो उन्हें बच्चों को तीन लाख रुपए की आर्थिक मदद देनी होगी। मंत्रालय ये मदद सीधे बच्चों को दे सकता है, क्योंकि सॉफ्टवेयर व डाटा एनालिसिस करने के लिए खर्च की पूर्ति भी इसी से होगी। इसके बाद समाधान का सफल मॉडल विकसित हो सकता है। मगर सिर्फ इसरो, टेलिकम्युनिकेशन विभाग और कॉमर्स विभाग ने अपनी तरफ से आर्थिक मदद के लिए हामी भरी। अन्य मंत्रालयों की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। हैकाथॉन में एक ग्रुप में करीब दस बच्चों ने मिलकर किसी समस्या के समाधान पर काम किया। उसका बेहद छोटे स्तर पर सॉफ्टवेयर विकसित किया और उसकी टेस्टिंग भी बेहद ही कम सैंपल पर की गई। अधिकारियों ने बताया कि इसे अभी पूरा समाधान कहना सही नहीं होगा। लेकिन खोजने की दिशा में पहला कदम सफल रहा, ये माना जा सकता है।

किसान से लेकर इसरो तक परेशान, ये हैं मुख्य समस्याएं

1. डेंगू कहां-कहां, पता नहीं चलता : सीएसआईआर ने समस्या बताई कि अभी ऐसी कोई टेक्नॉलॉजी नहीं है, जिससे ये पता चल सके कि डेंगू कहां-कहां पनप रहा है या इसके पनपने की आशंका कहां हो सकती है।

2. एक दिन में कब/ कितनी बिजली की खपत : सीएसआईआर ने कहा कि बिजली खपत को लेकर सभी जगह मीटर लगे हैं। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई तंत्र नहीं जिससे हर घर का पता लग सकें कि दिन में कब और कितनी बिजली की खपत होती है।
3. डेम कितने जर्जर, पता नहीं लगता : जल संसाधन मंत्रालय ने कहा कि अभी ऐसा कोई तंत्र या टेक्नॉलॉजी विकसित नहीं है जिससे देश के पांच हजार बड़े डैम की जर्जर स्थिति का रियल टाइम आकलन हो सके।
4. कितना पानी छत से बह जाता है : जल संसाधन मंत्रालय ने बताया कि उनके पास अभी ऐसा कोई मैकेनिज्म नहीं है जिससे पता चल सके कि बरसात के मौसम में कितना पानी एक घर की छत से बह जाता है।
5. पेपर लेस सरकारी तंत्र कैसे बनाएं : डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन ने बताया कि सरकारी विभागों में इंटरनेट और इंटरानेट की सुविधा है, लेकिन इस्तेमाल बेहद कम हो रहा है। कागजों से प्रिंट लिया जा रहा है। पेपरलेस कैसे बनाएं नहीं पता।
6. अन्न भंडारण में नमी की समस्या: डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन ने बताया कि अन्न भंडारण नमी (मॉइश्चर) की समस्या से जूझ रहे हैं। भंडारणों में एक स्तर तक ही नमी रहनी चाहिए अगर इससे ज्यादा हुई तो अन्न खराब हो सकते हैं।
7. लेटर डिलीवरी टाइम पहले पता चले : डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट ने अपनी समस्या बताई कि उनके पास अभी ऐसा कोई मैकेनिज्म नहीं है, जिससे यह पता लग सके कि कोई पत्र एक पोस्ट ऑफिस से दूसरे पोस्ट ऑफिस में कब पहुंचेगा।
8. यूएवी सिर्फ एक एंगल से लेता है फोटो : इसरो ने बताया कि अभी यूएवी से एक किलोमीटर की ऊंचाई से एक किमी की रेंज में तस्वीर ली जा सकती है। इसमें से भी सिर्फ एक बार में एक वाहन की किसी एक एंगल से स्पष्ट तस्वीर ली जा सकती है।
9. फसल की ग्रोथ क्या है : कृषि मंत्रालय ने कहा कि उन्हें ऐसी तकनीक चाहिए जिससे किसान किसी खास डिवाइस फोटो से फसल की फोटो खींचे और उसे उसी समय पता चल सके कि फसल की ग्रोथ क्या है, उसमें कीड़े लगे हैं या नहीं, उसमें दवा का छिड़काव कब करना है।