--Advertisement--

मंत्रालयों में अफसरों की लैटरल एंट्री पर बसपा-कांग्रेस ने उठाए सवाल, मोदी के मंत्री बोले- शैक्षणिक संस्थाओं में भी लागू हो

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2018, 09:22 PM IST

केंद्र सरकार ने 10 विभागों में ज्वाइंट सेक्रेटरी के पदों के लिए लैटरल एंट्री की अधिसूचना रविवार को जारी की।

लैटरल एंट्री के जरिए 10 ज्वाइंट लैटरल एंट्री के जरिए 10 ज्वाइंट

- अब निजी कंपनियों के सीनियर और कुशल अधिकारी लैटरल एंट्री से सरकारी नौकरशाही में आ सकेंगे

नई दिल्ली. लैटरल एंट्री के जरिए मंत्रालयों में ज्वाइंट सेक्रेटरी पद पर निजी कंपनियों के अफसरों की तैनाती के फैसले पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि मोदी सरकार मंत्रालयों के अहम पदों संघ के लोगों को बैठाना चाहती है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने केंद्र पर प्रशासनिक नाकामी का आरोप लगाया। उनका दावा है कि सरकारी योजनाओं में निजी कंपनियों के दखल से पूंजीवाद बढ़ेगा। इसबीच, मोदी सरकार के मंत्री सत्यपाल सिंह ने इस फॉर्मूले को शैक्षणिक संस्थानों में भी लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक सुधार के लिए जरूरी कदम है, इसे राजनीति में ना घसीटा जाए।

योजनाओं में पारदर्शिता आएगी: केंद्रीय मंत्री

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में भी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए लैटरल एंट्री को लागू करना चाहिए। सरकार ने जनहित के काम में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए सिफारिशों को कुछ संशोधन के साथ अमल करने का फैसला लिया है।

- सत्यपाल सिंह ने कहा कि निजी और सरकारी संस्थानों के बीच भेदभाव को धीरे-धीरे दूर किया जा रहा है। मंत्रालय ने इस मुद्दे को प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के सामने उठाया है।

लैटरल एंट्री से पूंजीवाद बढ़ेगा: मायावती

- बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि नौकरशाही के शीर्ष पदों पर निजी कंपनियों के अफसरों को बैठाना मोदी सरकार की प्रशासनिक नाकामी है। इससे योजनाएं तैयार करने में अमीर और पूंजीवादियों का दखल बढ़ेगा।
- जब अलग-अलग क्षेत्र के जानकारों और केंद्र-राज्य के सरकारी अधिकारियों को संविदा आधार पर नियुक्ति की योजना मौजूद है, तो ज्वाइंट सेक्रेटरी पद पर बगैर यूपीएससी परीक्षा पास किए निजी कंपनी के अफसर को लाने की क्या जरूरत है। यह मौजूदा व्यवस्था का मजाक उड़ाने है।

संघ के लोगों को अहम पदों पर बैठाने की कोशिश: कांग्रेस

- पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि ज्वाइंट सेक्रेटरी पद पर निजी अफसरों की तैनाती के फैसले पर कई सवाल उठ रहे हैं। निजी कंपनियां सरकारी काम में साजिश कर सकती हैं।
- वहीं, राजनीति में आने से पहले नौकरशाह रहे पीएल पूनिया ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी इस स्कीम के जरिए संघ के लोगों को अहम पदों पर बैठाना चाहती है। यह पूरी तरह गलत है। वे सरकार के कामकाज में दखल देंगे।

लैटरल एंट्री के लिए क्या फैसला लिया गया है?

- बता दें कि केंद्र सरकार ने प्रशासनिक सुधार की सिफारिशें कुछ संशोधनों के साथ लागू की हैं। इसके जरिए अब निजी कंपनियों के सीनियर और कुशल अधिकारी सरकारी नौकरशाही में आ सकेंगे और उन्हें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा पास करने की जरूरत नहीं होगी।
- केंद्र सरकार ने 10 विभागों में ज्वाइंट सेक्रेटरी के पदों के लिए लैटरल एंट्री की अधिसूचना रविवार को जारी की। कहा गया है कि सरकार को ‘टैलेंटेड और मोटिवेटेड’ भारतीयों की तलाश है। इसके लिए केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने विस्तृत गाइडलाइंस तय की है।

इन 10 विभागों से होगी शुरुआत

- सरकार ने शुरुआत 10 मंत्रालयों में ज्वाइंट सेक्रेटरी के लिए आवेदन मंगाकर की है। ये विभाग हैं- वित्त सेवा, इकोनॉमिक अफेयर्स, कृषि, सड़क परिवहन, जहाजरानी, पर्यावरण, नवकरणीय ऊर्जा, नागरिक उड्‌डयन और वाणिज्य।
- लैटरल एंट्री के जरिए मंत्रालयों में ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद पर 3 साल के लिए नियुक्ति होगी। बेहतर प्रदर्शन के आधार पर इसे 5 साल तक बढ़ाया जा सकेगा। इन पदों पर आवेदन के लिए अधिकतम उम्र की सीमा तय नहीं है, न्यूनतम उम्र 40 साल है। वेतन और सुविधाएं ज्वाइंट सेक्रेटरी के समान होंगी। यानी इन्हें 1,44,200 रु. से लेकर 2,18,200 रु. तक सैलरी मिल सकती है।

X
लैटरल एंट्री के जरिए 10 ज्वाइंट लैटरल एंट्री के जरिए 10 ज्वाइंट
Astrology

Recommended

Click to listen..