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बिप्लब देब का 23 दिन में 5वां विवादित बयान, कहा- अंग्रेजों के विरोध में टैगोर ने लौटाया था नोबेल अवॉर्ड

जनता ने वोट देकर भाजपा का इसलिए सत्ता में पहुंचाया था कि वह प्रदेश को आगे ले जाएगी, लेकिन हो इसका उलट रहा हैः कांग्रेस

DainikBhaskar.com | Last Modified - May 11, 2018, 04:03 PM IST

  • बिप्लब देब का 23 दिन में 5वां विवादित बयान, कहा- अंग्रेजों के विरोध में टैगोर ने लौटाया था नोबेल अवॉर्ड
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    22 अप्रैल को मोदी ने सार्वजनिक तौर पर भाजपा नेताओं और सरकार के मंत्रियों से अनुरोध किया था कि वे कोई ऐसी बात ना बोलें जिस पर बात करने के लिए मीडिया को मसाला मिले। - फाइल

    अगरतला.त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने 23 दिन में 5वीं बार विवादित बयान दिया है। इस बार उन्होंने रबिंद्रनाथ टैगोर को लेकर गलत बयानी की है। सूबे के उदयपुर कस्बे में हुई एक सभा में उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के विरोध स्वरूप रबिंद्रनाथ टैगोर ने नोबेल पुरस्कार वापस कर दिया था। बिप्लब के इस बयान पर विपक्षी दल सीपीआई (एम) व कांग्रेस ने उन्हें आड़े हाथों लिया है। उन्हें भविष्य में ऐसे मसलों पर बयान न देने की नसीहत दी है, जिसके बारे में जानकारी न हो। वहीं, भाजपा ने विपक्षी दलों पर बेवजह की बातों को मुद्दा न बनाने के लिए कहा है।

    क्या है मामला
    - पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर बिप्लब देब का एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह विडियो 9 मई को त्रिपुरा के उदयपुर में आयोजित टैगोर की 137वीं जयंती कार्यक्रम का बताया जा रहा है।

    - वीडियो में वे कह रहे हैं, "अंग्रेजों के विरोध में गुरुदेव ने नोबेल पुरस्कार लौटा दिया था।" विवाद बढ़ने पर इस मसले पर बिप्लब देब ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
    - उन्होंने विपक्षी दलों से लोगों का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने की बजाए राज्य के विकास में सहयोग की अपील की।

    1913 में मिला था टैगोर को नोबेल
    - रबिंद्रनाथ टैगोर को 1913 में गीतांजलि के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। उन्होंने कभी भी यह पुरस्कार लौटाया नहीं था। हालांकि 1919 में जलियांवाला बाग में हुए नरसंहार के विरोध में टैगोर ने अंग्रेजों की ओर से दी गई नाइटहुड की उपाधि वापस कर दी थी।

    महाभारत से लेकर पान की दुकान खोलने तक की सलाह दे चुके हैं देब

    - 17 अप्रैल को अगरतला में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि इंटरनेट आज का आविष्कार नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल महाभारतकाल से हो रहा है। महाभारत में संजय, अंधे धृतराष्ट्र को युद्ध का आंखों देखा हाल सुना रहे थे। ये घटना इंटरनेट और सैटेलाइट के बिना नहीं हो सकती थी।
    - 26 अप्रैल को उन्होंने एक कार्यक्रम में मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि 21 साल पहले डायना हेडन मिस वर्ल्ड खिताब जीतने के लायक नहीं थीं। हालांकि ऐश्वर्या राय की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा था कि वे सही मायने में भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
    - 28 अप्रैल को उन्होंने कहा कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले लोगों को सिविल सेवाओं में चयन नहीं करना चाहिए। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि सिविल सेवा की पृष्ठभूमि वाले लोगों को सिविल सेवा में ही जाना चाहिए, क्योंकि उनको सिविल कार्यों का अनुभव होता है।
    - 29 अप्रैल को अगरतला में एक कार्यक्रम में युवाओं को सरकारी नौकरी के पीछे दौड़ने की बजाए पान की दुकान खोलने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि यदि युवा पान की दुकान खोल लें तो उनके बैंक बैलेंस 5 लाख रुपये हो जाता।

    कॉस्मेटिक कंपनियों पर भी उठाए थे सवाल
    - बिप्लब ने कहा था कि बीते दौर में भारतीय महिलाएं कॉस्मेटिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल नहीं करती थीं। बाल शैंपू की बजाय मेथी के पानी से धोती थीं। मुल्तानी मिट्टी से नहाती थीं।
    - उन्होंने कहा, "जब से भारतीय महिलाओं ने मिस वर्ल्ड जैसी प्रतियोगिताएं जीतना शुरू कीं तभी से विदेशी कंपनियों के कॉस्मेटिक उत्पाद भारतीय बाजारों में आने लगे। प्रतियोगिता के आयोजकों ने देश के मार्केट पर कब्जा कर लिया। आज देश के हर कोने में एक ब्यूटी पार्लर है।"

    बयान का हुआ था विरोध
    - त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार की पत्नी पांचाली भट्टाचार्य ने बिप्लब के बयान पर विरोध जताया था।
    - उन्होंने कहा, "सौंदर्य प्रतियोगिता जीतने के लिए बहुत मेहनत की जरूरत होती है। यह सही नहीं है कि उन्हें नीचा दिखाया जाए।"

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    त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार की पत्नी पांचाली भट्टाचार्य ने बिप्लब के बयान पर विरोध जताया था। - फाइल
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