स्मृति शेष: अस्वस्थता के दौरान भी अपने लिखे फिल्मी गीत गुनगुनाते थे गोपालदास नीरज

4 वर्ष पहले
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- बीते गुरुवार को दिल्ली एम्स में नीरज ने अंतिम सांस ली थी

- नीरज को 1991 में पद्मश्री और 2007 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था

 

नई दिल्ली.  महाकवि गोपालदास नीरज का पिछले दिनों 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके अंतिम दिनों का एक वीडियो सामने आया है। इसमें नीरज अस्वस्थता के बावजूद अपना लिखा एक गीत गुनगुना रहे हैं।
वीडियो में नीरज बैठे हुए नजर आ रहे हैं। उनके परिवार की एक सदस्य ‘लिखे जो खत तुझे, वो तेरी याद में, हजारों रंग के, नजारे बन गए...’ गीत गा रही हैं। दूसरा अंतरा पूरा होने के बाद जब फिर से मुखड़ा गाया जाता है तो नीरज भी साथ-साथ गुनगुनाते लगते हैं। यह गीत 1968 में आई फिल्म ‘कन्यादान’ का है जो नीरज ने ही लिखा था। शशि कपूर और आशा पारेख पर फिल्माए इस गीत में आवाज मोहम्मद रफी ने दी थी। संगीत शंकर-जयकिशन ने दिया था। 

 

फिल्मी गीतों के लिए तीन पुरस्कार मिले थे : फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए नीरज को लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिला था। 1970 में फिल्म चन्दा और बिजली के गीत ‘काल का पहिया घूमे रे भइया!’, 1971 में फिल्म पहचान के गीत ‘बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं’ और 1972 में फिल्म मेरा नाम जोकर के गीत ‘ए भाई! जरा देख के चलो’ के लिए उन्हें यह पुरस्कार मिला।

 

दिल्ली में हुआ था निधन : पद्मभूषण से सम्मानित गीतकार गोपालदास नीरज का गुरुवार शाम निधन हुआ था। उन्हें महाकवि भी कहा जाता था। नीरज अपनी बेटी से मिलने आगरा पहुंचे थे। अगले ही दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई। आगरा से उन्हें दिल्ली एम्स लाया गया था। मशहूर शायर मुनव्वर राना ने दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में अपने शेर से नीरज को श्रद्धांजलि देते हुए कहा था, ‘"वो जा रहा है घर से जनाजा बुजुर्ग का, आंगन में एक दरख्त पुराना नहीं रहा। जैसे आंगन में एक पुराने पेड़ के गिर जाने से दुख होता है, उससे ज्यादा दुख मेरे इस अजीज के जाने से हुआ है।''

 

कवि सम्मेलन खत्म हो गए : जाने-माने साहित्यकार काशीनाथ सिंह ने बनारस से भास्कर को बताया था, ‘‘वो कारवां थे, जो गुजर गया। नीरज खुद में कारवां थे। वे हिंदी गीतों के इतिहास पुरुष थे। वे घर बैठ गए और कवि सम्मेलन खत्म हो गए। काव्य गोष्ठियां अब भी हुआ करती हैं। पर मिलन के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। गंभीरता से गीत सुनाने वाले लोग नहीं रहे।'’

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