रोजगार के आंकड़े इकट्ठे करने सरकार कराएगी 1 लाख घरों का सर्वे, मुद्रा लोन के आंकड़े भी किए जाएंगे शामिल

4 वर्ष पहले
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  • रोजगार के सटीक आंकड़े जुटाने के लिए सरकार ने बदला तरीका

नई दिल्ली.  केंद्र सरकार ने रोजगार के आंकड़े एकत्र करने का तरीका बदला है। सरकार की मंशा है कि उसे सटीक आंकड़े मिलें, ताकि नीति बनाने में सही दिशा मिले। सरकार इस बार एक लाख घरों का सर्वे कर रही है। पहली बार मुद्रा योजना के तहत दिए गए लोन की संख्या को भी रोजगार के आंकड़ों में शामिल किया जाएगा। मुद्रा योजना के तहत 13 करोड़ अकाउंट में पैसा डिपॉजिट हुआ है। यानी सरकार मानेगी कि जिसने लोन लिया है, उसने कोई न कोई रोजगार शुरू किया है। श्रम मंत्रालय ने इसकी जिम्मेदारी सांख्यिकी मंत्रालय को दी है।

 

श्रम मंत्रालय से दो साल से रोजगार की कोई रिपोर्ट नहीं आई

यह पहली बार होगा कि रोजगार का पूरा डेटा जुटाने की जिम्मेदारी दूसरे मंत्रालय को दी गई है। अक्टूबर तक रोजगार की सर्वे रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी। रिपोर्ट हर साल जारी होगी। इसमें 90 प्रतिशत से ज्यादा असंगठित क्षेत्र के रोजगार को कवर किया जाएगा। पहले सिर्फ 11 हजार घरों का सैंपल सर्वे होता था, जो श्रम मंत्रालय का लेबर विभाग करता था। इसे दो साल पहले बंद कर दिया गया था। इस कारण दो साल से रोजगार की कोई रिपोर्ट नहीं आई है।

 

सर्वे में ग्रामीण क्षेत्र के 55 हजार घर और 45 हजार शहरी घर शामिल: श्रम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि रोजगार का सर्वे सांख्यिकी मंत्रालय की संस्था एनएसएसओ (नेशनल सेम्पल सर्वे ऑफिस) करेगी। सर्वे में 55 हजार घर ग्रामीण क्षेत्र के और 45 हजार घर शहरी क्षेत्र से होंगे। सर्वे में डेटा की डबलिंग न हो इसके लिए फॉर्म में विकल्प रखा गया है कि क्या आपके पास ईपीएफ, ईएसआईसी का खाता है और क्या आपने मुद्रा योजना के तहत लोन लिया है।

 

लोन की संख्या शामिल करने से संगठित क्षेत्र का दायरा भी बढ़ेगा: केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने बताया कि सर्वे का दायरा बढ़ने और मुद्रा योजना के तहत दिए लोन के खातों की संख्या को शामिल करने से असंगठित क्षेत्र के रोजगार के सटीक आंकड़े मिल सकते हैं। इससे हम रोजगार को लेकर सही और सटीक नीति बना पाएंगे। सही सर्वे हो इसलिए हमने सर्वे की जिम्मदारी अलग संस्था एनएसएसओ को दी है। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) में सीनियर फैलो कन्हैया सिंहमुद्रा कहते हैं कि लोन की संख्या शामिल करने से संगठित क्षेत्र का दायरा भी बढ़ जाएगा। क्योंकि इनमें से कई संस्थाएं ऐसी होंगी, जिनके पास 10 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हों। साथ ही रोजगार के आंकड़े भी बढ़े हुए नजर आएंगे।

 

 

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