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अब तक सरकारों की कमाई के कदमों में सबसे ज्यादा आय जीएसटी से, बढ़ेंगे 4 लाख करोड़ रुपए

जानिए एक देश, एक कर लागू होने के बाद 365 दिनाें में क्या बदलाव हुआ?

राजीव कुमार | Last Modified - Jul 01, 2018, 09:00 AM IST

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  • सबसे बड़ी कोल नीलामी से मिले थे- 2 लाख करोड़,सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी से 65 हजार करोड़ रुपए
  • नोटबंदी से बढ़ा था 90 हजार करोड़ रुपए आयकर, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से बचाए 57 हजार करोड़ रुपए
  • जबकि जीएसटी से 2018-19 में 2 लाख करोड़ रु. बढ़ेंगे। जीएसटी से आयकर भी 2 लाख करोड़ बढ़ेगा

नई दिल्ली. देश के सबसे बड़े कर सुधार गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स को लागू हुए आज एक साल पूरा हो गया। जीएसटी की वजह से चालू वित्त वर्ष 2018-19 में सरकार के टैक्स कलेक्शन में लगभग 4 लाख करोड़ रु. का इजाफा हो सकता है। जीएसटी कलेक्शन से 2018-19 में 2 लाख करोड़ अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। वहीं आयकर भी 2 लाख करोड़ अिधक आने की उम्मीद है। खास बात यह है कि सरकारी खजाने को भरने के सरकारों ने जितने भी बड़े और ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, उनमें जीएसटी सबसे बड़ा साबित हो रहा है। जैसे- अब तक की सबसे बड़ी कोल ब्लॉक नीलामी से सरकार को 2015 में 32 कोल ब्लॉक से 2.7 लाख करोड़ मिले थे। स्पेक्ट्रम नीलामी के सबसे बड़े प्रयास में 2016 में सरकार को करीब 65 हजार करोड़ रुपए मिले थे, जबकि लक्ष्य 5.63 लाख करोड़ अर्जित करने का रखा गया था। 2016 में सरकार ने नोटबंदी का ऐतिहासिक कदम उठाकर आयकर में 90 हजार करोड़ रु. का इजाफा किया था। मोदी सरकार की इनकम डिक्लेरेशन स्कीम जिसे विपक्ष ने फेयर एंड लवली स्कीम भी कहा था, से सरकारी खजाने में करीब 30 हजार करोड़ रुपए आए थे। इसी तरह सरकार ने वर्ष 2016-17 में करीब 140 विभिन्न योजनाओं को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम से जोड़कर 57 हजार करोड़ रुपए बचाए थे। इसमें गैस सब्सिडी से करीब 29 हजार करोड़ रुपए बचे थे।

वहीं दूसरी आेर वैश्विक उदारीकरण भारत में लागू होने से सरकार के विभिन्न कदमों से हुई कमाई देखें तो 1992-93 में केंद्र सरकार का कुल कर राजस्व 72,722 करोड़ रहने का अनुमान था, जो इससे पहले के एक वर्ष के मुकाबले 10 हजार करोड़ ही अधिक था। वहीं दूसरी ओर 1994-95 में पहली बार सर्विस टैक्स लागू होने के बाद सरकार को 375 करोड़ रुपए मिले थे। वर्ष 2016-17 में इससे वार्षिक आमदनी 2.54 लाख करोड़ पहुंची थी।

सरकार ने लक्ष्य तय किया: जीएसटी की बात करें तो सरकार ने चालू वित्त वर्ष में हर महीने 1 लाख करोड़ जीएसटी वसूली के साथ साल के अंत तक कम से कम 12 लाख करोड़ रुपए की वसूली का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2017-18 में जुलाई से लेकर मार्च तक जीएसटी के रूप में 7.19 लाख करोड़ रुपए वसूले गए। जबकि जीएसटी का असर आयकर कलेक्शन पर भी नजर आया। वित्त मंत्रालय के मुताबिक गत वित्त वर्ष 2017-18 में आयकर से 10.02 लाख करोड़ रुपए मिले थे। वर्ष 2016-17 के मुकाबले यह राशि 18 फीसदी अधिक है। 2016-17 में आयकर से 8.5 लाख करोड़ रुपए मिले थे। टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक जीएसटी रिटर्न फाइलिंग में लगाए गए क्लॉज के कारण चालू वित्त वर्ष में इनकम टैक्स कलेक्शन में 20 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है।

एक्सपर्ट्स की अलग-अलग राय: इधर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस की प्रोफेसर आर. कविता राव कहती हैं कि जीएसटी को पूरी तरह सेटल होने में अभी एक साल और लग सकता है। आगे चलकर जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी हो सकती है। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि एक साल पहले लागू जीएसटी से आम उपभोक्ताओं को कोई खास लाभ नहीं मिला। इसकी मुख्य वजह यह रही कि जीएसटी अभी स्थिर टैक्स प्रणाली नहीं है। पिछले एक साल में जीएसटी प्रणाली से जुड़ी 100 अधिसूचना जारी की गईं। मतलब हर तीसरे दिन नई अधिसूचना। ऐसे में, उपभोक्ता और व्यापारी दोनों ही जीएसटी की स्थिरता को लेकर आश्वस्त नहीं हो पाया है। कंज्यूमर वॉयस से जुड़े असीम सान्याल ने बताया कि अगर उपभोक्ता खरीदे गए सामान का बिल नहीं मांगता है या बिल नहीं लेता तो जीएसटी का कोई फायदा नहीं है। बिना बिल के उसका दिया पैसा तो ब्लैकमनी में बदल जाएगा।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक जीएसटी के माध्यम से होने वाले अतिरिक्त कलेक्शन को सरकार देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करेगी। वहीं एमएसएमई उद्यमियों को पहले के मुकाबले अधिक लोन दिए जाएंगे। हालांकि मंत्रालय के अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि किन-किन क्षेत्रों पर कितने खर्च किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ऐसा कोई ब्योरा मंत्रालय की तरफ से तैयार नहीं किया जाता है। आगामी बजट में इसका खुलासा किया जाएगा।

इनकम टैक्स से 2 लाख करोड़ रुपए अतिरिक्त आएंगे

वित्त मंत्रालय के मुताबिक गत वित्त वर्ष 2017-18 में इनकम टैक्स के रूप में 10.02 लाख करोड़ रु. मिले। 2016-17 में इनकम टैक्स से 8.5 लाख करोड़ रु. का राजस्व मिला था। 2018-19 में 2 लाख करोड़ रु. अतिरिक्त इनकम टैक्स की प्राप्ति का अनुमान है। टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक जीएसटी रिटर्न फाइलिंग में लगाए गए क्लॉज के कारण यह बढ़ोतरी हुई। पहले कारोबारी वैट व आईटी रिटर्न में अलग बिक्री दिखाते थे। अब आयकर विभाग दोनों सेल को मिला सकता है। जीएसटी फाइलिंग से आयकर चोरी आसानी से पकड़ी जा सकती है।

जीएसटी में 4 बड़े बदलाव जो जल्द हो सकते हैं

1) 28 से घटकर 18% हो सकता है कुछ वस्तुओं पर कर- 28% की दर से 50 वस्तुओं पर जीएसटी है। सीमेंट, पेंट, डिजिटल कैमरे सहित करीब एक दर्जन वस्तुओं पर 10% टैक्स दर कम हो सकती है। पहले केंद्र सरकार ने जीएसटी के तहत 176 वस्तुओं पर 28% जीएसटी को घटाकर 18% कर दिया है।

2) टैक्स स्लैब हो सकते हैं कम- वर्तमान में जीएसटी के तहत टैक्स स्लैब की पांच दरें हैं- 0, 5, 12, 18 और 28%। इसके अलावा सोने पर 3% टैक्स है। 12% और 18% टैक्स स्लैब को मिलाकर 14 या 16% किया जा सकता है।

3) दायरा और बढ़ेगा- बिजली, शराब, नेचुरल गैस, एविएशन फ्यूल, पेट्रोलियम गुड्स और रियल एस्टेट इसके दायरे से बाहर हैं। नेचरल गैस और एविएशन फ्यूल को जल्द जीएसटी में लाया जा सकता है। डीजल और पेट्रोल को भी इसमें लाने पर विचार हो रहा है।

4) रिटर्न भरना बनेगा आसान- 24 रिटर्न हर साल भरने पड़ रहे हैं। दो करोड़ से अधिक कारोबार पर एक रिटर्न और भरना पड़ रहा है। सिर्फ कंपोजिशन डीलर को तीन माह में एक फाॅर्म भरना पड़ रहा है। फाॅर्म की जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

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