जेल में बंद अलगाववादी नेता की बेटियों का मोदी को खत- पिता बिना अनाथ हो गए हैं, घर कैदखाना लगता है

4 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

श्रीनगर. हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता शाहिद उल इस्लाम की बेटियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर पिता को जेल से रिहा करने की अपील की है। मिशनरी स्कूल में पढ़ने वाली सुजैन और सुंदास ने इस खत में मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नारे का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा- जिस देश में प्रधानमंत्री के नारे से मजबूर बेटियों के मन में उम्मीद की किरण जागी हैं, उसी देश में हम अपनी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। पिता के बिना अनाथ जैसे हो गए हैं और घर कैदखाना बन गया है।
आतंकियों को फंडिंग के मामले में एनआईए शाहिद के खिलाफ जांच कर रही है। वह पिछले एक साल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। शाहिद अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता हैं। शाहिद की बेटियों ने लिखा, "हमारे लिए घर कैदखाना हो गया है। जब से पिता जेल गए हैं, उन पर लगा कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ है। हम उम्मीद करते हैं कि प्रधानमंत्री नेकदिली दिखाते हुए इस मामले में जल्द हस्तक्षेप करेंगे। पिछले 11 महीनों से हमारा जीवन अनाथों जैसा हो गया है, क्योंकि हम अपने प्यारे पिता को देख भी नहीं पा रहे हैं।"

 

कुलभूषण की मां-पत्नी की हालत का अहसास हुआ: बेटियों ने जेल में पिता से मुलाकात का भी जिक्र किया। कहा- जब पिता से मुलाकात हुई, हम उन्हें बेहद बुरी हालत में देखकर स्तब्ध रह गए थे। हमारे और उनके बीच शीशे की मोटी दीवार थी। उन्हें छूने की बात तो दूर, हमारी आवाज भी उन तक नहीं पहुंच पा रही थी। हम बड़ी मुश्किल से उन्हें पहचान पा रहे थे। शुगर, हाईपरटेंशन, आर्थराइटिस से परेशान पिता का वजन करीब 15 किलो घट गया था। हमें भारत, पाकिस्तान और कश्मीर की राजनीति के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता। लेकिन, पिता से मुलाकात के बाद पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी की हालत का अहसास हुआ। 

 

कोेई बेटी कभी तिहाड़ ना जाए: खत में आगे लिखा गया, "हमारे पिता को अपराधियों, नशेड़ियों के साथ रखा गया। इससे उनकी जिंदगी को खतरा है। हमारी उनसे मुलाकात भी आतंकित कर देने वाले महौल में हुई। जब इंटरकॉम पर हम अपनी बात खत्म करने वाले थे, तब लाइन अचानक कट गई और बिजली गुल हो गई। कोई चीखा- वक्त खत्म हो गया है। हम अपने पिता को अलविदा भी नहीं कह पाए। हम प्रार्थना करते हैं कि कोई बेटी कभी तिहाड़ ना जाए।"

 

 

खबरें और भी हैं...