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आईआईटी छात्र ने प्लेन में डायबिटिक पैसेंजर की जान बचाई; इंसुलिन पेन में बॉलपेन की स्प्रिंग लगाकर इंजेक्शन दिया

Dainik Bhaskar

May 13, 2018, 09:53 AM IST

फ्लाइट में इंसुलिन तो थी, लेकिन उसमें पैसेंजर की कारट्रिज फिट नहीं हो रही थी।

कार्तिकेय मंगलम ने बताया कि उन कार्तिकेय मंगलम ने बताया कि उन
  • आईआईटी-कानपुर ने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर यह किस्सा साझा किया
  • आईआईटी के छात्र कार्तिकेय मंगलम जेनेवा से दिल्ली आ रहे थे

कानपुर. आईआईटी कानपुर के इंजीनियरिंग छात्र कार्तिकेय मंगलम ने जुगाड़ टेक्नोलॉजी से फ्लाइट में एक यात्री की जान बचा ली। कार्तिकेय पिछले हफ्ते जेनेवा से नई दिल्ली के लिए फ्लाइट से सफर कर रहे थे। इसी दौरान फ्लाइट में एक यात्री का शुगर लेवल घट गया। वह अपनी इंसुलिन पेन घर पर ही भूल आया था। फ्लाइट में इंसुलिन तो थी, लेकिन उसमें पैसेंजर की कारट्रिज फिट नहीं हो रही थी। ऐसे में कार्तिकेय ने इंसुलिन पेन में बॉलपेन की स्प्रिंग लगा इसे इस्तेमाल लायक बना दिया। आईआईटी-कानपुर ने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर यह किस्सा साझा किया।

प्राथमिक इलाज से भी नहीं मिला पैसेंजर को आराम
- कार्तिकेय जेनेवा से फ्लाइट में सवार हुए थे। मास्को से पैसेंजर थॉमस भी फ्लाइट में आए। फ्लाइट को उड़ान भरे 5 घंटे बीते थे कि थॉमस की तबीयत बिगड़ने लगी। शुगर लेवल बिगड़ने की वजह से उन्हें बेचैनी होने लगी, चक्कर आने लगे। वहीं, जब पता चला कि थॉमस इंसुलिन पेन लाना भूल गए हैं। फ्लाइट में मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज किया लेकिन उससे उन्हें आराम नहीं मिला।

बेहोश हो गए थे थॉमस
- डॉक्टरों के पास जो इंसुलिन थी वो थॉमस की कारट्रिज में फिट नहीं हो रही थी। ऐसे में इमरजेंसी लैंडिंग के अलावा कोई उपाय नहीं था। इसी बीच थॉमस बेहोश हो गए। नजदीकी हवाईअड्‌डे पर लैंडिंग में भी एक घंटे का समय लग जाता। ऐसे में कार्तिकेय ने सूझ-बूझ दिखाई।

पेन की स्प्रिंग से बचाई जान
- कार्तिकेय ने डॉक्टर से इंसुलिन पेन ली। फ्लाइट के वाई-फाई का इस्तेमाल कर इंटरनेट पर देखा कि इंसुलिन पेन की बनावट कैसी होती है और ये काम कैसे करती है। उन्हें समझ आ गया कि इंसुलिन पेन में एक स्प्रिंग की कमी है।
- उन्होंने फौरन फ्लाइट में मौजूद लोगों से उनके पेन मांगे। पेन की रिफिल के साथ लगने वाली स्प्रिंग निकाली और इसे इंसुलिन पेन में फिट कर दिया। इंसुलिन पेन में थॉमस की कारट्रिज फिट हो गई और डॉक्टरों ने इससे थॉमस को डोज देकर उनकी जान बचाई।

कार्तिकेय बोले- फर्स्ट ईयर में सीखे थे ये बेसिक्स
- कार्तिकेय मंगलम ने बताया कि मैंने इंसुलिन पेन को थॉमस के इस्तेमाल लायक बनाने के लिए जो तरीका इस्तेमाल किया, वो इंजीनियरिंग बेसिक्स ही हैं। हमें इंजीनियरिंग फर्स्ट ईयर में ही ये बेसिक्स सिखाए गए थे। इससे बड़ी बात कोई नहीं हो सकती कि आपकी पढ़ाई किसी की जान बचाने में काम आए।'

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