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भारत-चीन की मिलिट्री के बीच बनेगी हॉटलाइन, मोदी-जिनपिंग की मुलाकात के बाद निकला रास्ता

हॉटलाइन बनने से दोनों सेनाओं के बीच बात हो सकेगी, जिससे पैट्रोलिंग के दौरान तनाव नहीं होगा।

DainikBhaskar.com | Last Modified - May 02, 2018, 10:12 AM IST

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    पिछले साल 16 जून को भारत-चीन के बीच डोकलाम मुद्दे को लेकर तनाव हो गया था। (फाइल)

    • मिलिट्री हेडक्वार्टर में लगाई जाएगी हॉटलाइन
    • अनौपचारिक बातचीत में मोदी-जिनपिंग ने सेनाओं को भरोसा बढ़ाने वाले उपाय करने को कहा था

    बीजिंग. भारत औऱ चीन की मिलिट्री ने बातचीत के लिए हॉटलाइन बनाने पर सहमति जताई है। चीनी मीडिया ने इस बारे में जानकारी दी है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच हॉटलाइन स्थापित करने पर लंबे समय से बातचीत चल रही थी। हाल ही में वुहान में नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच हुई अनौपचारिक बातचीत के बाद इसका रास्ता निकला।


    मिलिट्री हेडक्वार्टर में लगेगी हॉटलाइन
    - ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, "दोनों देशों के मिलिट्री हेडक्वार्टर में हॉटलाइन लगाई जाएगी। भारत और चीन के नेताओं के बीच इसको लेकर सहमति बन गई है।"
    - भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया था कि मोदी-जिनपिंग ने अपनी सेनाओं को भरोसा बढ़ाने वाले उपाय करने को कहा था। इसमें सीमा पर घटनाएं रोकने के लिए बराबरी की सुरक्षा, मौजूदा संस्थागत रिश्तों को मजबूत करने, जानकारी साझा करने की बात कही गई थी।

    हॉटलाइन से क्या फायदा होगा?
    - भारत-चीन के बीच 3,488 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) है।
    - हॉटलाइन बनने से दोनों सेनाओं के बीच बात हो सकेगी, जिससे पैट्रोलिंग के दौरान तनाव नहीं होगा।
    - पिछले साल 16 जून को भारत-चीन के बीच डोकलाम मुद्दे को लेकर तनाव हो गया था। इसमें भारतीय सेना ने चीनी आर्मी को विवादित इलाके (भारत, चीन और भूटान के ट्राईजंक्शन) में सड़क बनाने से रोक दिया था। 73 दिन चला विवाद 28 अगस्त 2017 को खत्म हुआ था।

    कुछ वजहों से रुका हुआ था हॉटलाइन का मुद्दा
    - भारत-चीन के बीच लंबे वक्त से हॉटलाइन बनाने पर बात चल रही थी। यह तय नहीं हो पा रहा था कि हेडक्वार्टर में किस स्तर पर हॉटलाइन स्थापित की जाए। उधर, चीन में भी राष्ट्रपति जिनपिंग निर्देंशों पर मिलिट्री में रिफॉर्म्स हो रहे थे।
    - बता दें कि भारत और पाक के बीच डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) स्तर की हॉटलाइन सुविधा है। लेकिन चीन के संबंध में वहां की सेना इस सुविधा को ऑपरेट करने के लिए एक अफसर की नियुक्ति चाहती थी।
    - 2013 में भारत-चीन के बीच बॉर्डर डिफेंस कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BDCA) तो हुआ लेकिन ये मुकाम तक नहीं पहुंच सका। एग्रीमेंट का मकसद एलएसी पर शांति स्थापित करना था।

    दोनों देशों के रिश्ते में धैर्य की जरूरत: एक्सपर्ट
    - शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के डायरेक्टर झाओ गानचेंग के मुताबिक, "दोनों देशों में तनाव दूर रखने के लिहाज से अनौपचारिक वार्ता एक अच्छी शुरुआत कही जा सकती है। इसका आधार बातचीत और भरोसा जगाने वाले उपायों पर ही होगा।"
    - "मिलिट्री पर भरोसा और सहयोग भारत और चीन दोनों के लिए जरूरी है। हालांकि इसमें कुछ वक्त लगेगा। दोनों देशों को सीमा मुद्दे पर किए गए समझौतों का लागू कराना भी अहम रोल अदा करेगा।"

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    भारत-चीन के बीच 3,488 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) है। (फाइल)
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