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हफ्ते का मुद्दा: 16 साल में 23 देशों से 65 भगोड़ों को लाए, पर 25 साल में ब्रिटेन से सिर्फ एक को ला पाई सरकार

9 हजार करोड़ का बैंक फ्रॉड मामले में विजय माल्या से ब्रिटिश कोर्ट के जरिए 963 करोड़ रु. वसूलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

Dainik Bhaskar

Jul 08, 2018, 11:59 AM IST
india government Bring 65 fugitives from 23 countries in 16 years

- 24 देशों से 121 भगोड़ों का इंतज़ार, इनमें से 31 भगोड़े 40 हज़ार करोड़ लेकर भागे हैं

- मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से 10 देशों से 14 भगोड़ों को लाई है सरकार

नई दिल्ली. भारतीय बैंकों को पहली बार विजय माल्या मामले में बड़ी कामयाबी मिली है। ब्रिटिश कोर्ट के आदेश के बाद लंदन में विजय माल्या की संपत्तियों की जब्ती की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि माल्या या ललित मोदी जैसे भगोड़े हाथ नहीं लगे हैं। इसी के साथ भारत से विदेश भागने वाले आरोपियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर हाईप्रोफाइल आरोपी ब्रिटेन क्यों भाग जाते हैं? दरअसल, ब्रिटेन ने यूरोपीय कन्वेंशन ऑन ह्यूमन राइट्स पर दस्तखत कर रखे हैं। इसके मुताबिक अगर कोर्ट को लगता है कि किसी को प्रत्यर्पण करने पर मौत की सज़ा दी जाएगी, प्रताड़ित किया जाएगा या इसके पीछे राजनीतिक कारण हैं, तो वह प्रत्यर्पण का अनुरोध खारिज कर सकती है। इसी का फायदा भगोड़े उठाते हैं।

हालांकि सरकार माल्या के ब्रिटेन से प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है। माल्या ने भी अपने ऊपर लगाए गए आरोपों के खिलाफ ब्रिटेन की अदालत में याचिका दायर कर रखी है। हालांकि ब्रिटिश अदालत के ताजा फैसले के बाद माना जा रहा है कि उनका केस कमजोर होता जा रहा है। ऐसे में माल्या के प्रत्यर्पण की इजाजत भी दी जा सकती है। माल्या के प्रत्यर्पण के मामले में ब्रिटिश अदालत में इसी 31 जुलाई को सुनवाई होने वाली है। पिछले 16 वर्षों में प्रत्यर्पण का विश्लेषण करें, तो पता चलता है कि सरकार इस दौरान सिर्फ 65 भगोड़ों को भारत ला पाई है। जबकि सौ से ज्यादा के प्रत्यर्पण के लिए अर्जी दी है। भारतीय भगोड़ों के लिए सेफ हैवन माने जाने वाले ब्रिटेन से 25 साल में महज एक भगोड़े को ला पाए हैं। सरकार अपराध कर भागने वाले दो ब्रिटिश नागरिकों को भी भारत लाई है, लेकिन इन्हें अमेरिका और तंजानिया से लाया गया। भारत और ब्रिटेन के बीच 1993 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी। तब से लेकर अब तक पहले आरोपी को भारत लाने में 23 साल लग गए। इसमें मर्डर के मामले में सिर्फ एक व्यक्ति समीरभाई वीनूभाई पटेल का 19 अक्टूबर 2016 को प्रत्यर्पण किया जा सका है।

ब्रिटेन से 17 भगोड़ों के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जारी: 20 जुलाई 2016 तक ब्रिटेन से 16 लोगों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया चल रही थी। इनमें ललित मोदी, गुलशन कुमार हत्याकांड में आरोपी और संगीतकार नदीम सैफी, गुजरात में 1993 में हुए धमाकों का आरोपी टाइगर हनीफ भी शामिल हैं। विजय माल्या का मामला मिलाकर अब कुल 17 मामलों में प्रक्रिया चल रही है। इनके अलावा सरकार को 24 देशों से करीब 121 भगोड़ों को प्रत्यर्पण कर भारत लाने का इंतज़ार है। इनमें से 31 भगोड़े करीब 40 हजार करोड़ रुपए लेकर भागे हैं।

सबसे ज्यादा 19 भगोड़ों को यूएई से भारत लाया गया

देश प्रत्यर्पण
यूएई 19
अमेरिका 09
कनाडा 04
थाईलैंड 04
जर्मनी 03
द. अफ्रीका 03
ऑस्ट्रेलिया 02
बांग्लादेश 02
पुर्तगाल 02
बेल्जियम 01
मॉरीशस 01

- इनमें पुर्तगाल से मोनिका बेदी और अबु सलेम का प्रत्यर्पण सबसे चर्चित रहा है। छोटा राजन को इंडोनेशिया से भारत लाया गया। राजन के 5 दिन बाद उल्फा नेता अनूप चेतिया का प्रत्यर्पण हुआ।

आर्थिक मामलों में 13, आतंकी घटनाओं में 9 आरोपियों का प्रत्यर्पण हुआ

आतंकी घटनाओं के मामले में 9 को लाया जा चुका है, इनमें से 3 आरोपी मुंबई में 1993 में हुए बम धमाकों से जुड़े हैं। एक आरोपी मुथप्पा राय को संगठित अपराध के मामले में 2002 में यूएई से प्रत्यर्पण कर लाया गया। इनके अलावा यौन हिंसा के मामले में 3 आरोपियों को विदेश से लाया जा चुका है। इनमें दो ब्रिटिश और एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक है। ब्रिटिशर्स में से एक को अमेरिका से, जबकि दूसरे को तंजानिया से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। आर्थिक मामलों में 13 प्रत्यर्पण भारत अलग-अलग अपराधों में जिन 65 लोगों को प्रत्यर्पित कर लाया है, उनमें सबसे ज्यादा 15 मर्डर के मामले में हैं। माल्या के जैसे या अन्य आर्थिक अपराधों के मामलों में 13 लोगों को भारत लाया जा चुका है। तीसरे सबसे ज्यादा आपराधिक साजिश में हैं। धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में 8 को लाया गया है।

अपराध भारत लाए गए व्यक्ति
मर्डर 16
आर्थिक अपराध 13
आपराधिक साजिश 11
धोखाधड़ी 08
आतंकी घटनाएं 07
भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का मामला 03

भारत का 47 देशों से समझौता, जबकि 9 के साथ ऐसी व्यवस्था: 22 मार्च 2017 तक भारत की दुनिया के 47 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि थी। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, सऊदी अरब, यूएई और रूस के अलावा हमारे पड़ोसी बांग्लादेश, नेपाल और भूटान भी शामिल हैं। चीन, जापान और पाकिस्तान के साथ भारत की ऐसी कोई संधि नहीं है। इनके अलावा 9 देशों के साथ ऐसी व्यवस्था बनाई गई है कि वहां से भी किसी दोषी या आरोपी को प्रत्यर्पित कर भारत लाया जा सकता है। इनमें क्रोएशिया, फिजी, इटली, पापुआ न्यूगिनी, पेरू, श्रीलंका, सिंगापुर, स्वीडन और तंजानिया शामिल हैं।

भारत ने 45 आरोपियों को दूसरे देशों को भी सौंपा: विदेशों में अपराध कर भारत में छिपे अपराधी, जिन्हें भारत ने उन देशों को सौंप दिया, जिन्होंने इनके प्रत्यर्पण की मांग की थी। इनमें सबसे ज्यादा 24 भगोड़े अमेरिका को सौंपे गए हैं। जबकि ब्रिटेन को 3 को सौंपा गया है।

भगोड़ों का प्रत्यर्पण करने और लाने में अमेरिका सबसे आगे: किसी देश में अपराध कर भागने वाले आरोपियों को पकड़ने, प्रत्यर्पण करने और दूसरे देशों से प्रत्यर्पण कर लाने के मामले में अमेरिका अव्वल है। अमेरिकी एजेंसी यूएस मार्शल सर्विस ने 2016-17 के दौरान कुल 88,472 भगोड़ों को गिरफ्तार किया। इनमें 1,720 अंतरराष्ट्रीय या विदेशों में अपराधों के आरोपी थे। इनमें से 793 को संबंधित देशों को सौंपा जा चुका है। अमेरिका 2013 में 68 देशों से सबसे ज्यादा 900 लोगों को प्रत्यर्पित कर ला चुका है। जबकि 2015 में ऐसे 883 लोगों को प्रत्यर्पण कर लाया था।

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