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भारत-पाक की ट्रैक टू डिप्लोमैसी के जरिए रिश्ते सुधारने की कोशिश, इस्लामाबाद में मिले दोनों देशों के विशेषज्ञ

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 08:39 PM IST

सर्जिकल स्ट्राइक, सीमा पार से फायरिंग, आतंकवादी हमले जैसे कई मुद्दों पर भारत-पाक के बीच तनाव बना हुआ है।

ट्रैक-2 डिप्लोमेसी के तहत  28 से 30 अप्रैल के बीच ये मीटिंग इस्लामाबाद में हुई। (फाइल) ट्रैक-2 डिप्लोमेसी के तहत 28 से 30 अप्रैल के बीच ये मीटिंग इस्लामाबाद में हुई। (फाइल)

इस्लामाबाद. आतंकवाद और सीमा पर तनाव के बीच भारत-पाकिस्तान रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि पिछले दिनों भारत से विशेषज्ञों के एक दल ने पाकिस्तान की यात्रा की और ट्रैक-2 डिप्लोमेसी के तहत द्विपक्षीय संबंधों पर फिर से बातचीत शुरू की। इस मीटिंग में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच सभी मसले बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमति बनी। हालांकि, इस पहल का कोई आधिकारिक एलान नहीं किया गया।

पूर्व विदेश सचिव ने की अगुआई

- भारतीय दल की अगुआई विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव और पाकिस्तान मामलों के एक्सपर्ट विवेक काटजू ने की। इसमें शिक्षाविद और एनसीईआरटी के पूर्व प्रमुख जेएस राजपूत भी शामिल थे। उधर, पाकिस्तान की तरफ से पूर्व विदेश सचिव इनामुल हक और इशरत हुसैन समेत कुछ और विशेषज्ञ शामिल हुए। हालांकि, यह पता नहीं चल पाया कि मीटिंग में कुल कितने लोग शामिल हुए।

- बता दें कि स्टेट बैंक पाकिस्तान के पूर्व गवर्नर इशरत हुसैन को पाकिस्तान के आगामी चुनावों के दौरान कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। हाल ही में भारत ने कहा था कि हमारी सेना रूस में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन के तहत पाकिस्तान की सेना के साथ आतंकवाद विरोधी अभ्यास में शामिल होगी।

कब हुई यह मीटिंग?
- एजेंसी के मुताबिक, 28 से 30 अप्रैल के बीच ये मीटिंग इस्लामाबाद में हुई। ट्रैक-2 डिप्लोमेसी के तहत इस मीटिंग को आयोजकों ने काफी गोपनीय रखा।

भारत-पाक के बीच क्या हैं विवाद की वजह
- 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक, सीमा पार से फायरिंग, आतंकवादी हमले और भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव जैसे कई मुद्दे।

ट्रैक-2 डिप्लोमेसी की शुरुआत 1990 में हुई थी
- ट्रैक-2 डिप्लोमेसी को नीमराना डायलॉग भी कहा जाता है। इसकी शुरुआत 1990 में हुई थी। इसके तहत दोनों देशों के विशेषज्ञों की मीटिंग राजस्थान के नीमराना के किले में हुई थी। इसी वजह से इसका नाम नीमराना डायलॉग पड़ा।

- इसमें सरकार सीधे तौर पर शामिल नहीं होती है। दोनों के देशों के बुद्धजीवियों, पत्रकारों और पूर्व राजनयिकों और विदेश विभाग के पूर्व अधिकारियों को शामिल किया जाता है।

- इस बार इस पहल में अंतर यह है कि इसमें विदेश मंत्रालय शामिल नहीं है। पूर्व में दोनों देशों के विदेश मंत्रालय इससे जुड़े रहते थे। इसमें गैर सरकारी प्रतिनिधि भारत-पाकिस्तान के बीच संबंधों को सुधारने पर बातचीत करते हैं।

ट्रैक-2 डिप्लोमेसी को नीमराना डायलॉग भी कहा जाता है। राजस्थान के नीमराना के किले में 1990 में इसकी पहली बैठक हुई थी। (फाइल) ट्रैक-2 डिप्लोमेसी को नीमराना डायलॉग भी कहा जाता है। राजस्थान के नीमराना के किले में 1990 में इसकी पहली बैठक हुई थी। (फाइल)
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ट्रैक-2 डिप्लोमेसी के तहत  28 से 30 अप्रैल के बीच ये मीटिंग इस्लामाबाद में हुई। (फाइल)ट्रैक-2 डिप्लोमेसी के तहत 28 से 30 अप्रैल के बीच ये मीटिंग इस्लामाबाद में हुई। (फाइल)
ट्रैक-2 डिप्लोमेसी को नीमराना डायलॉग भी कहा जाता है। राजस्थान के नीमराना के किले में 1990 में इसकी पहली बैठक हुई थी। (फाइल)ट्रैक-2 डिप्लोमेसी को नीमराना डायलॉग भी कहा जाता है। राजस्थान के नीमराना के किले में 1990 में इसकी पहली बैठक हुई थी। (फाइल)
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