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यूएन की रिपोर्ट में आरोप- कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन कर रहा भारत; विदेश मंत्रालय ने कहा- ये झूठी कहानी

जेनेवा में 18 जून से होने वाली मानवाधिकार परिषद की बैठक में कश्मीर का मुद्दा उठाया जा सकता है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 14, 2018, 07:42 PM IST

यूएन की रिपोर्ट में आरोप- कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन कर रहा भारत; विदेश मंत्रालय ने कहा- ये झूठी कहानी, national news in hindi, national news
  • यूएन के मानवाधिकार उच्चायुक्त जैद राद अल हुसैन ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई की निंदा की
  • रिपोर्ट में कहा गया कि पाक ने आतंकवाद विरोधी कानून का गलत ढंग से इस्तेमाल किया

नई दिल्ली. संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने गुरुवार को कश्मीर में मानवाधिकारों को लेकर पहली रिपोर्ट जारी की। इसमें सुरक्षा बलों पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में भी पाकिस्तानी जवानों द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग की बात कही गई और इन मामलों की अंतरराष्ट्रीय जांच की अपील भी की गई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने आरोपों को झूठी कहानी बताया। ये रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है, जब भारत सरकार ने कश्मीरियों की सहूलियत के लिए रमजान के दौरान सुरक्षा बलों के अभियानों पर रोक लगा रखी है।

- विदेश मंत्रालय ने कहा, "यूएन की रिपोर्ट गलत और विवादास्पद है। ये पूर्वाग्रहों से भरी है और झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश है। इसमें ऐसी जानकारियां दी गई हैं, जो गलत या अपुष्ट हैं। ये रिपोर्ट भारत की संप्रभुता और अखंडता का उल्लंघन करती है। जम्मू-कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है। पाकिस्तान ने गैरकानूनी तरीके से इसके एक हिस्से पर कब्जा कर रखा है।"

कांग्रेस ने भी रिपोर्ट का भ्रामक बताया, भाजपा ने कहा- इसे कूड़े के डिब्बे में डाल दो
- कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ने कहा, " यूएन की यह रिपोर्ट भ्रामक है। हम ऐसी किसी भी रिपोर्ट को खारिज करते हैं, जो भारत के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप करे। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।"
- भाजपा से राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, " मैं ऐसी रिपोर्ट को कूड़े दान में फेंक दूं। इस रिपोर्ट को ऐसे लोगों ने तैयार किया है, जिन्हें मुद्दे की कोई जानकारी नहीं है।"

बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद घाटी में तेज हुए प्रदर्शन, इन्हीं घटनाओं पर आधारित है रिपोर्ट

- संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट जुलाई 2016 से अप्रैल 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर के घटनाक्रम पर आधारित है। 8 जुलाई 2016 में ही सुरक्षाबलों ने जैश आतंकी बुरहान वानी को एनकाउंटर में मार गिराया था, जिसके बाद घाटी में उग्र प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया था। इस दौरान हालात काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को कई बार बल प्रयोग भी करना पड़ा।

पीओके में रहने वालों पर प्रतिबंध, पाक इन्हें हटाए: यूएन

- रिपोर्ट में कहा गया, "पीओके में रहने वाले लोगों के राजनीतिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगे हैं। पाकिस्तान को इन्हें हटाना चाहिए। पाक ने आतंकवाद विरोधी कानून का इस्तेमाल गलत तरीके से राजनीतिक हस्तियों पर कार्रवाई के लिए किया। सैकड़ों लोगों के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी जेलों में बंद कर रखा है।"

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