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अमेरिका में भारतवंशी की कंपनी पर 1.15 करोड़ रुपये का जुर्माना, कर्मचारियों को कम वेतन देने का था आरोप

अमेरिका में काम करने के लिए अन्य देश के नागरिकों के लिए H1-B वीजा जरूरी है।

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 06:01 PM IST
पहले भी एच-1बी वीजे को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आईटी कंपनियों पर वीजा के दुरुपयोग करने का आरोप लगाते रहे हैं। - फाइल पहले भी एच-1बी वीजे को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आईटी कंपनियों पर वीजा के दुरुपयोग करने का आरोप लगाते रहे हैं। - फाइल

वाशिंगटन. अमेरिका में भारतीय मूल के एक शख्स की कंपनी पर 1 लाख 73 हजार यूएस डॉलर (करीब 1.15 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है। कंपनी को एच1-बी वीजा नियमों के उल्लंघन और अपने कर्मचारियों से धोखाधड़ी करने का दोषी पाया गया था। अमेरिका के श्रम विभाग ने क्लाउडविक टेक्नालॉजी को अपने कर्मचारियों को वेतन के रूप में 1,73,000 डॉलर अदा करने का आदेश दिया है। विभाग के अनुसार, कंपनी ने अपने 12 विदेशी कर्मचारियों को एच1-बी वीजा नियमों के तहत वेतन का भुगतान नहीं किया। इन 12 विदेश कर्मचारियों में अधिकतर भारतीय हैं।

झूठे वादे पर अमेरिका बुलाया
- कंपनी का कार्यालय कैलिफोर्निया स्थित सिलिकॉन वैली में है। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, भारतीय मूल के मनी छाबड़ा क्लाउडविक टेक्नालॉजी के संस्थापक और सीईओ हैं।

- श्रम विभाग ने जांच में पाया कि क्लाउडविक टेक्नालॉजी आईएनसी. ने एच1-बी वीजा के तहत बुलाए भारतीय कर्मचारियों को वेतन के रूप में प्रतिमाह 8,300 डॉलर देने का वादा किया था। लेकिन कंपनी अपने कर्मचारियों को प्रतिमाह 800 यूएस डॉलर के हिसाब से ही वेतन दे रही थी।

- विभाग ने पाया कि कर्मचारियों को एच-1बी वीजे के तहत निर्धारित वेतन से कम सैलरी दी जा रही थी। इसके अलावा कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन में अवैध रूप से कटौती भी की।

- सैन फ्रांसिस्को के लेबर विभाग की अधिकारी सुसाना ब्लांको ने बताया, "एच1 बी प्रोग्राम कंपनियों को टेम्‍परेरी अमेरिका वीजा ऑफर करता है। इसके तहत कंपनियों को अधिक स्किल्‍ड विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने का अधिकार है। ये नियुक्तियां उन क्षेत्रों में की जाती हैं, जहां कुशल अमेरिकी कामगारों की कमी है। "

मोबाइल एेप डेवलपमेंट पर काम करती है क्लाउडविक टेक्नालॉजी

- कंपनी के अनुसार, वह बाईमोडाल डिजिटल बिजनेस सर्विसेज और सॉल्यूशन ग्लोबल 1000 की लीडिंग प्रोवाइडर है।

- उसके यहां बिग डेटा, क्लाउड, एडवांस एनालिटिका, बिजनेस इंटेलिजेंस मार्डनाइजेशन, डेटा साइंस, और मोबाइल एेप डेवलेपमेंट जैसे काम होते हैं।
- उसके क्लाइंट्स में बैंक ऑफ अमेरिका, कामकास्ट, होम डिपो, इनट्वीट, जेपी मार्गन, नेटएप, टारगेट, वीजा और वॉल्मार्ट जैसे नामी ब्रांड शामिल हैं।

एच1-बी वीजा के जरिए हजारों भारतीय जाते हैं अमेरिका

- अमेरिका में काम करने के लिए अन्य देशों के नागरिकों के लिए जरूरी।

- आईटी कंपनियों को एच-1बी वीजा की काफी जरूरत पड़ती है। दरअसल, यह वह क्षेत्र है, जिसमें अमेरिका में सबसे ज्यादा कर्मचारी आउटसोर्स किए जाते हैं।

- भारत से हर साल हजारों कर्मचारी एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका में नौकरी के लिए जाते हैं।

भारत से हर साल हजारों कर्मचारी एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका में नौकरी के लिए जाते हैं। - फाइल भारत से हर साल हजारों कर्मचारी एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका में नौकरी के लिए जाते हैं। - फाइल
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पहले भी एच-1बी वीजे को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आईटी कंपनियों पर वीजा के दुरुपयोग करने का आरोप लगाते रहे हैं। - फाइलपहले भी एच-1बी वीजे को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आईटी कंपनियों पर वीजा के दुरुपयोग करने का आरोप लगाते रहे हैं। - फाइल
भारत से हर साल हजारों कर्मचारी एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका में नौकरी के लिए जाते हैं। - फाइलभारत से हर साल हजारों कर्मचारी एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका में नौकरी के लिए जाते हैं। - फाइल
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