भारत पर हमले की इस्लामिक स्टेट की योजना नाकाम, खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली भेजे गए अफगानी आत्मघाती हमलावर को पकड़ा

4 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. भारतीय खुफिया एजेंसियों ने 18 महीने के सर्विलांस ऑपरेशन के बाद इस्लामिक स्टेट (आईएस) के एक आतंकी को धर दबोचा। आईएस के उस आतंकी ने अफगानिस्तान में प्रशिक्षण लिया था। आईएस ने उस आतंकी के जरिए भारत में हमला करने की साजिश रची थी, लेकिन खुफिया एजेंसियों ने आईएस नेटवर्क में सेंध लगाकर उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया। जानकारी के मुताबिक, आतंकी को सितंबर 2017 में गिरफ्तार किया गया। बाद में उसे अफगानिस्तान ले जाकर अमेरिकी मिलिट्री बेस को सौंप दिया गया। आतंकी इंजीनियरिंग की शिक्षा लेने के बहाने भारत आया था।
इंडियन एक्सप्रेस अखबार के मुताबिक, अमेरिका ने भारतीय एजेंसियों को जानकारी दी थी कि आतंकी संगठन आईएस नई दिल्ली को निशाना बना सकता है। इसके बाद ही एजेंसियों ने अफगानिस्तान, दुबई और देश में अपने निगरानी तंत्र को और सक्रिय कर दिया। जिसमें सामने आया कि क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए 12 आतंकियों के एक समूह को पाकिस्तान में ट्रेनिंग दी गई है। 

 

भारत आने से पहले ही रॉ ने बिछाया जाल: भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) ने आतंकी की पहचान के बाद भारत में उसके घुसते ही नजर रखना शुरू कर दिया था। महीनों की योजना के बाद एजेंसी ने अपने एक जासूस को आतंकी से दोस्ती करने के लिए भेजा था। दूसरी तरफ अपनी योजना के तहत आतंकी ने सबसे पहले दिल्ली-फरीदाबाद हाईवे स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया था। पहले वो कुछ दिन कॉलेज हॉस्टल में रहा, लेकिन बाद में वो लाजपत नगर स्थित एक फ्लैट में शिफ्ट हो गया। सूत्रों के मुताबिक, रॉ जासूस ने इसमें उसकी मदद की, ताकि आतंकी पर नजर रखी जा सके। सूत्रों के मुताबिक, ऑपरेशन के आखिरी कुछ महीनों में एजेंसी ने अपने 80 जांचकर्ताओं और सुरक्षा अधिकारियों को ऑपरेशन की जिम्मेदारी दी थी। 

इतना ही नहीं भारतीय जासूस को आखिरी दिनों में आईएस की तरफ से बम बनाने का सामान मुहैया कराने की जिम्मा दिया गया था। भारतीय जासूस ने उसे विस्फोटक मुहैया भी कराए थे, लेकिन उनमें ट्रिगर नहीं था। बताया गया है कि आतंकी ने आखिरी दिनों में ब्लास्ट की साइट तलाशने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट, अंसल प्लाजा मॉल, वसंत कुंज मॉल और साउथ एक्सटेंशन मार्केट का दौरा किया था। साथ ही इस बारे में अफगानिस्तान में बैठे अपने आकाओं को भी जानकारी दी थी। 

 

इंग्लैंड के मैनचेस्टर हमलों जैसी थी प्लानिंग: आतंकी के पकड़े जाने के बाद एजेंसियों ने उसे अफगानिस्तान स्थित अमेरिकी बेस को सौंप दिया, जहां उससे पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए। बताया गया है कि हमले की तैयारी मई 2017 में हुए मैनचेस्टर बम धमाकों जैसी की गई थी, जिसमें 23 लोगों की जान गई थी। यहां तक की रॉ के जासूस से जिस तरह के विस्फोटक मंगाए गए थे, वे भी मैनचेस्टर हमलों में इस्तेमाल हुए विस्फोटकों जैसे ही थे। 

अमेरिका ने उससे तालिबान से जुड़ी जानकारी भी निकलवाई, जिसके बाद से अब तक अमेरिकी सेना को अफगानिस्तान और पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने में काफी आसानी हो रही है।

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