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निवेश पर पाना चाहते हैं अच्छा रिटर्न तो रिसर्च करने के बाद ही लगाएं पैसा, नहीं तो उठाना पड़ सकता है जोखिम

रिसर्च आधारित निवेश होने के कारण उन्हें बार-बार खरीदना-बेचना नहीं पड़ता। इससे कॉस्ट कम और रिटर्न ज्यादा मिलती है।

Dainik Bhaskar

Jul 10, 2018, 08:10 PM IST
शेयर की वैल्यू समझने के लिए कं शेयर की वैल्यू समझने के लिए कं

नई दिल्ली. अगर आप पर्सनल फाइनेंस या निवेश संबंधी कोई फैसला देने जा रहे हैं तो इससे पहले किसी एक्सपर्ट के सलाह ले लेनी चाहिए। क्योंकि पूर्वअनुभवों से दूरदर्शी निवेश करना आपके लिए घातक हो सकता है। मोतीलाल ओसवाल एएमसी के सेल्स एंड डिस्ट्रीब्यूशन हेड अखिल चतुर्वेदी कहते हैं कि एसेट एलोकेशन का मामला हो या फंड और स्टॉक चुनने का। निवेशकों को सुनी-सुनाई बातों या टिप्स के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए।

इक्विटी मार्केट में निवेश होगा फायदे का सौदा
चतुर्वेदी बताते हैं कि रिटेल निवेशकों को म्यूचुअल फंड के जरिए ही इक्विटी मार्केट में पैसा लगाना चाहिए। म्यूचुअल फंड में फुलटाइम फंड मैनेजर गंभीर विश्लेषण के बाद ही निवेश के फैसले करते हैं। वे कंपनियों की बैलेंस शीट का अध्ययन करते हैं, कंपनी मैनेजमेंट से बात करते हैं और जरूरत पड़ने पर कंपनी के दौरे भी करते हैं। इस तरह फंड मैनेजर सुनिश्चित करते हैं कि जिस स्टॉक में पैसे लगा रहे हैं वह लांग टर्म में बढ़िया रिटर्न देगा।
चतुर्वेदी कहते हैं कि हमारा अनुभव बताता जो रिटेल निवेशक सीधे शेयरों में पैसे लगाते हैं उनके पोर्टफोलियो में स्टॉक्स की संख्या बहुत अधिक होती है। रिटर्न या तो मार्केट के रिटर्न के बराबर या उससे कम रहता है। किसी भी शेयर में निवेश पर अच्छा रिटर्न तभी मिल सकता है जब उसे उचित कीमत पर खरीदा गया हो। शेयर की वैल्यू समझने के लिए कंपनी की वैल्यू को समझना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर नुकसान होता है। नुकसान की भरपाई के लिए वे स्टॉक को लंबे समय तक पोर्टफोलियो में रखते हैं।

ब्रोकरेज फीस भी चुकानी होती है
मोतीलाल ओसवाल एएमसी के सेल्स एंड डिस्ट्रीब्यूशन हेड अखिल चतुर्वेदी की मानें तो सीधे स्टॉक खरीदने का एक और नुकसान है। बाजार के ऊपर-नीचे जाने के साथ निवेशक स्टॉक को बार-बार खरीदते और बेचते हैं। हर बार उन्हें ब्रोकरेज फीस चुकानी पड़ती है। इससे अंततः रिटर्न कम हो जाता है। हमने एक और बात देखी है। पोर्टफोलियो में ढेर सारे स्टॉक होने की वजह से अच्छे स्टॉक्स में निवेश की रकम कम होती है। हमारी राय में स्टॉक चुनना एक बात है और स्टॉक में निवेश की रकम तय करना दूसरी बात है।

म्यूचुअल फंड में निवेश के ये हैं फायदे :-
1.फंड मैनेजर के पास चुनिंदा शेयर होते हैं, लेकिन पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाइड होता है। इससे सेक्टर और स्टॉक के हिसाब से रिस्क बंट जाता है।
2. वह कंपनियों के बिजनेस मॉडल और वैलुएशन पर भी नजर रखते हैं। इससे पता चलता है कि किस कंपनी के शेयर रखने हैं और किनसे निकलना है।
3. रिसर्च आधारित निवेश होने के कारण उन्हें बार-बार खरीदना-बेचना नहीं पड़ता। इससे कॉस्ट कम और रिटर्न ज्यादा मिलती है।
4. टैक्स में बचत, कम लागत, पारदर्शी और सेबी द्वारा रेगुलेटेड होना म्यूचुअल फंड के दूसरे फायदे हैं।
5. खुदरा निवेशकों के लिए सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) भी होता है इसके जरिए निवेशक बाजार में हर स्तर पर पैसे लगाते हैं। यह तरीका धीरे-धीरे काफी लोकप्रिय होता जा रहा है। अंत में हल्के-फुल्के अंदाज में कहना चाहूंगा कि जिस तरह अंडे के लिए मुर्गी और दूध के लिए गाय की जरूरी है, उसी तरह इक्विटी इन्वेस्टमेंट के लिए म्यूचुअल फंड जरूरी है।

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