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4 मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने आधीरात बाद भी की सुनवाई, कर्नाटक मसले पर सिंघवी ने तारीफ में कहा- इंसाफ सोता नहीं

कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया। कांग्रेस-जेडीएस इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थीं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - May 17, 2018, 10:02 PM IST

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    सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक राज्यपाल के फैसले पर रोक से इनकार कर दिया था।

    नई दिल्ली.आधी रात बीतने के बावजूद कर्नाटक मामले की सुनवाई के लिए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट की तारीफ की। उन्होंने कहा कि कानून कभी सोता नहीं। कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला के भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिए जाने के खिलाफ कांग्रेस और जेडीएस ने रात 11 बजे अदालत में अपील की थी। उनकी तरफ से सिंघवी ने दलीलें दी थीं। हालांकि, 50 मिनट सुनवाई के बाद अदालत ने राज्यपाल के फैसले पर रोक से इनकार कर दिया था। बता दें कि देश में अब तक चार बार ऐसा हुआ है, जब आधी रात बीतने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सुनवाई के लिए खोले गए।

    कब-कब आधी रात बाद भी उच्चतम न्यायालय ने की सुनवाई

    1) 2018: कर्नाटक में भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिए जाने का मामला
    - राज्यपाल के फैसले के खिलाफ कांग्रेस बुधवार रात को ही सुप्रीम कोर्ट पहुंची। अदालत ने देर रात 2:10 बजे सुनवाई शुरू की और सुबह 4:20 पर राज्यपाल के फैसले पर रोक से इनकार कर दिया।

    2) 2015: याकूब मेमन की फांसी पर रोक की अपील
    - 29 जुलाई 2015 को मुंबई धमाकों के दोषी याकूब मेमन को दी गई फांसी की सजा पर रोक लगाने के लिए कोर्ट आधी रात बाद बैठी। करीब 90 मिनट तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने फांसी पर रोक से इनकार कर दिया। इस मामले में मौजूदा अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी भाजपा विधायकों की तरफ से पेश हुए थे।

    3) 1992: अयोध्या विवाद, ढांचा गिराए जाने का केस
    - 6 और 7 दिसंबर 1992 की दरमियानी रात सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि ढांचा गिराए जाने के मामले में सुनवाई की।
    - इस मामले की सुनवाई जस्टिस एमएन वेंकटचेलैया के आवास पर हुई थी। बेंच ने विवादित स्थल पर पहले जैसे हालात बनाए रखने के आदेश दिए थे। बता दें कि जस्टिस वेंकटचेलैया बाद में देश के चीफ जस्टिस भी बने।

    4) 1985: उद्योगपति को बेल दिए जाने पर हुई सुनवाई
    - 1985 में भी सुप्रीम कोर्ट ने आधी रात बाद उद्योगपति एलएम थापर को फॉरेन एक्सचेंत रेगुलेशन एक्ट (फेरा) मामले में बेल देने के लिए सुनवाई की थी। थापर को रिजर्व बैंक की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया था। रिजर्व बैंक ने कहा था कि थापर की कुछ कंपनियां फेरा का उल्लंघन कर रही हैं। इस मामले में देर रात सुनवाई के लिए तत्कालीन चीफ जस्टिस ईएस वेंकटरामैय्या आलोचनाओं में घिर गए थे।

    कर्नाटक मामले में किस तरह चली देर रात 2:10 से 4:20 तक सुनवाई
    कांग्रेस-जेडीएस की दलील- 15 दिन का वक्त क्यों

    - वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "भाजपा को राज्यपाल ने सरकार बनाने का न्योता दिया। ये पूरी तरह असंवैधानिक है। यह कभी नहीं सुना गया कि 104 सीटें हासिल करने वाली पार्टी को 112 सीटों का बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन दिए जाएं। पहले ऐसे मामले में सुप्रीम कोर्ट 48 घंटे ही देता था। फैसला रद्द करें और कांग्रेस-जेडीएस को न्योता देने का आदेश दें। गोवा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी, फिर भी हमें सरकार बनाने से रोक दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी भाजपा के सरकार बनाने को सही ठहराया था।"

    सुप्रीम कोर्ट के सवाल
    Q.
    कोर्ट ने सिंघवी से पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट गवर्नर को किसी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता देने से रोक सकता है?
    - इस पर सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ये पहले भी किया है।

    Q.कोर्ट ने पूछा कि कर्नाटक में अभी किसका प्रभार है?
    - सिंघवी ने जवाब में कहा कि केयरटेकर सरकार का।
    - सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हम इस पर विचार कर रहे हैं कि क्या सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल को रोक सकती है, जो राज्य में संवैधानिक निर्वात (वैक्यूम) का कारण होगा।"

    भाजपा ने कहा- शपथ से आसमान नहीं टूट पड़ेगा
    - भाजपा के वकील रोहतगी ने कहा, "इस मामले में देर रात सुनवाई जरूरी नहीं है। यदि कोई शपथ ले लेता है तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केवल याकूब मेनन के मामले में देर रात सुनवाई की थी, क्योंकि वह फांसी दिए जाने का मामला था।"

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