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22 साल पहले देवेगौड़ा ने गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगवाया था, तब वजूभाई पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे; कर्नाटक में अब उन्हीं पर नजरें

भाजपा नेता राम माधव ने अपनी फेसबुक पोस्ट में इस राजनीतिक घटना का जिक्र किया है।

Danik Bhaskar | May 16, 2018, 10:31 PM IST
1996 में एचडी देवेगौड़ा प्रधानमंत्री और वाजूभाई वाला गुजरात में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। 1996 में एचडी देवेगौड़ा प्रधानमंत्री और वाजूभाई वाला गुजरात में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे।

- गुजरात में 1996 में सत्ता गवाने के बाद भाजपा ने 1998 में वापसी की। तब से अभी तक उसकी सरकार है

- भाजपा ने पिछले एक साल में बड़ी पार्टी न होते हुए 3 राज्यों में सत्ता हासिल की

बेंगलुरु. कर्नाटक में नतीजे आने के 24 घंटे बाद भी सरकार पर सस्पेंस बरकरार है। सत्ता भाजपा को मिलेगी या कांग्रेस और जेडीएस मिलकर सरकार बनाएंगे, इस पर फैसला राज्यपाल वजूभाई वाला को लेना है। खास बात ये कि 22 साल पहले जेडीएस मुखिया और तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने राष्ट्रपति से गुजरात की विधानसभा भंग करने की सिफारिश की थी और भाजपा को वहां सत्ता से बाहर होना पड़ा था। उस वक्त वजूभाई वाला गुजरात में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। अब वे कर्नाटक के राज्यपाल हैं और उन्हें फैसला करना है कि सरकार बनाने का न्योता किसे दिया जाए।

1996 में गुजरात में भाजपा सरकार पर देवेगौड़ा ने लिया था फैसला
- भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राममाधव ने अपनी फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर की है। इसमें उन्होंने 1996 की एक राजनीतिक घटना का जिक्र किया।
- उन्होंने लिखा- "बात 1996 की है जब एच डी देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे और वजूभाई वाला उस समय गुजरात भाजपा के अध्यक्ष थे। गुजरात में भाजपा की सरकार थी और भाजपा नेता शंकर सिंह वाघेला ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था। गुजरात में भाजपा सरकार को बहुमत साबित करना था, लेकिन विधानसभा में काफी हंगामा हुआ। विपक्ष को विधानसभा अध्यक्ष ने सदन से बाहर कर दिया। इसके बाद राज्यपाल ने विधानसभा को भंग करने की सिफारिश केन्द्र से कर दी थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने विधानसभा भंग करने की सिफारिश राष्ट्रपति से कर दी। 22 साल पहले ये फैसला देवेगौड़ा ने लिया था। इसके बाद भाजपा को सत्ता गवानी पड़ी।"

1 साल बाद भाजपा ने की थी वापसी
- हालांकि भाजपा ने 1998 में ने राज्य की सत्ता पर वापसी की। 1998 से लगातार भाजपा की सरकार है।

22 साल बाद एक बार फिर आमने सामने आए
- कर्नाटक में 224 विधानसभा सीटों में 222 पर चुनाव हुए। इसमें किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। भाजपा 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। वहीं, कांग्रेस को 78 और देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस को 38 सीटों पर जीत मिली।
- देवेगौड़ा के बेटे एच डी कुमारस्वामी कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर रहे हैं। दोनों पार्टियां का कहना है कि उनके पास बहुमत है। वहीं, भाजपा ने अपने दावे में सबसे बड़ी पार्टी होने की बात कही है। ऐसे में राज्यपाल वजूभाई वाला को तय करना है कि वे किसे सरकार बनाने का बुलावा देते हैं।

पिछले एक साल में तीन राज्यों में नहीं बनी सबसे बड़े दल की सरकार

गोवा-2017 - गोवा विधानसभा चुनाव में 40 सीटों में से भाजपा को 13, कांग्रेस को 17 सीटें मिली थी। बहुमत के लिए 21 सीटों की जरूरत थी। भाजपा ने कम सीट होने के बावजूद एमजीपी और अन्य दलों के साथ मिलकर सरकार बना ली थी।

मणिपुर-2017 - मणिपुर विधानसभा चुनाव में कुल 60 सीटों में से भाजपा को 21, कांग्रेस को 28 सीटें मिली थीं। बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत थी। भाजपा ने एनपीएफ, एनपीपी के समेत दूसरे दलों से मिलकर सरकार बना ली थी।

मेघालय-2018 - मेघालय में 60 विधानसभा सीटें हैं। जिसमें से भाजपा को 2 और कांग्रेस को 21 सीटें मिली थी। लेकिन भाजपा ने सिर्फ 2 सीट के बाद एनपीपी के नेतृत्व में 6 दलों के साथ मिलकर सरकार बना ली थी।

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