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सुप्रीम कोर्ट का येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक से इनकार, भाजपा के सरकार बनाने के न्योते के खिलाफ सुनवाई कल

मामले में कोर्ट ने कांग्रेस की अर्जी को पूरी तरह से खारिज न करते हुए कहा कि इस अर्जी पर बाद में भी सुनवाई की जा सकती है।

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 07:01 AM IST
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- कांग्रेस-जेडीएस के दावे के 4 घंटे बाद गवर्नर वजूभाई वाला ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था
- येदियुरप्पा आज सुबह 9 बजे कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन मंत्रिमंडल का गठन अभी नहीं
- याकूब मेनन के फांसी के फैसले के बाद दूसरी बार किसी मामले की सुनवाई करने रात को खुली सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली. कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला ने 104 सीटों वाले सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया है। राज्यपाल के भाजपा को बहुमत साबित करने 15 दिन का वक्त दिए जाने के फैसले के खिलाफ बुधवार रात 11 बजे कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई और अर्जी दाखिल की। कांग्रेस ने रात को ही इस पर सुनवाई का आग्रह किया था। जिसके बाद सीजेअाई दीपक मिश्रा की बनाई 3 जजों की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट में रात 02:10 पर शुरु हुई सुनवाई में करीब साढ़े तीन घंटे की जिरह के बाद येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने जाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, मामले में कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद सुनवाई शुक्रवार सुबह 10:30 बजे तक के लिए टाल दी है। मामले में कोर्ट ने कांग्रेस की अर्जी को पूरी तरह से खारिज न करते हुए कहा, "इस अर्जी पर बाद में भी सुनवाई की जा सकती है।" सुप्रीम कोर्ट ने येदियुरप्पा समेत संबंधित लोगों को नाेटिस जारी करते हुए जवाब देने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस-जेडीएस ने रखी ये दलीलें

- कांग्रेस-जेडीएस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बेंच के सामने कहा कि कोर्ट या तो गवर्नर के उस आदेश को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दे, जिसमें येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिया गया है या फिर 112 विधायकों से ज्यादा के समर्थन वाले कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन को न्योता देने का निर्देश पास करे।
- सिंघवी ने ये भी कहा कि बुधवार को कांग्रेस विधायक दल ने प्रस्ताव पारित कर जेडीएस को समर्थन का ऐलान किया था। एचडी कुमारस्वामी ने 37 विधायकों के हस्ताक्षर भी गवर्नर को सौंपे थे, जिसमें कांग्रेस के समर्थन का जिक्र था।

- सिंघवी ने कहा, "भाजपा के पास 104 विधायकों का समर्थन है और गवर्नर ने भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने न्योता दिया। ये पूरी तरह असंवैधानिक है। ये कभी नहीं सुना गया कि वो पार्टी जिसके पास 104 सीटें हों उसे 112 सीटों का बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन दिए जाएं। पहले ऐसे किसी भी मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से 48 घंटे ही दिए जाते थे।"

- साथ ही सिंघवी ने गोवा मामले का हवाला देते हुए कहा, "गोवा में कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद हमें सरकार बनाने से रोक दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी भाजपा के सरकार बनाने को सही ठहराया था।"

- अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने भाजपा का पक्ष रखा। वहीं, केंद्र की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता मौजूद थे।

वह लेटर कहां है, जिस पर गवर्नर ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया?- बेंच

- कोर्ट ने सिंघवी से पूछा कि क्या ये प्रथा नहीं रही है कि गवर्नर सबसे बड़ी पार्टी को ही बहुमत साबित करने के लिए न्योता देता हो?
- बेंच ने पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट गवर्नर को किसी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता देने से रोक सकता है? इस पर सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ये पहले भी किया है।
- कोर्ट ने पूछा कि कर्नाटक में अभी किसका प्रभार है? सिंघवी ने जवाब में कहा कि केयरटेकर सरकार का।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हम इस पर विचार कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट गवर्नर को रोक सकती है, जो राज्य में संवैधानिक निर्वात (वैक्यूम) का कारण होगा।"

- बेंच के जजों ने सिंघवी से पूछा कि वह लेटर कहां है, जिस पर गवर्नर ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया?

- जस्टिस एसए बोबड़े ने कहा, "हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि बीएस येदियुरप्पा किस आधार पर बहुतम का दावा कर रहे हैं। जब तक हम वह लेटर नहीं देख लेते, हम इस बात का अंदाजा नहीं लगा सकते।"

राहतगी ने कहा- कोई शपथ ले लेता है तो कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा

- भाजपा के वकील रोहतगी ने सुनवाई के दौरान कहा, "इस मामले में देर रात सुनवाई जरूरी नहीं है। यदि कोई शपथ ले लेता है तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केवल याकूब मेनन के मामले में देर रात सुनवाई की थी, क्योंकि वह फांसी दिए जाने का मामला था।"

- केंद्र के वकील अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा, "इस याचिका को लगाया ही नहीं जाना चाहिए था। कांग्रेस और जेडीएस को बहुमत साबित होने तक इंतजार करना चााहिए था।"

- रोहतगी ने कांग्रेस-जेडीएस की अर्जी को खारिज करने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि शपथ के लिए न्योता देना राज्यपाल का काम है। राष्ट्रपति और राज्यपाल किसी कोर्ट के लिए जवाबदेह नहीं हैं। कोर्ट को किसी संवैधानिक पदाधिकारी को उसके अाधिकारिक कर्तव्यों निभाने से नहीं रोका जाना चााहिए।

- सुनवाई के आखिर में सिंघवी येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण को शाम 4:30 बजे तक टालने की पूरी काेशिश करते रहे।

बेंच में ये जज कर रहे हैं सुनवाई

- बता दें कि देर रात सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कांग्रेस-जेडीएस की अर्जी लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के घर पहुंचे थे। जहां सीजेआई ने मामले में सुनवाई करने तीन जजों की बेंच बनाई। इसमें जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस बोबड़े शामिल हैं।

कांग्रेस-जेडीएस के दावे के 4 घंटे बाद राज्यपाल का भाजपा को न्योता

इससे पहले करीब शाम 5 बजे कांग्रेस-जेडीएस ने राज्यपाल से मुलाकात की और जरूरी बहुमत होने के दस्तावेज दिखाए और सरकार बनाने का दावा पेश किया था। हालांकि, इसके 4 घंटे बाद ही वजूभाई वाला ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए बुलाया। कर्नाटक भाजपा के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर किए गए ट्वीट में गुरुवार सुबह 9.00 बजे विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की बात कही थी। बता दें कि 1996 में जब देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने गुजरात की सरकार भंग करने की सिफारिश राष्ट्रपति से की थी और उस वक्त वजूभाई वाला भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे।

कांग्रेस-जेडीएस के 14 विधायक सदन से गैरहाजिर हो जाएं तो भाजपा के पास मौका

कुल सीटें: 224

2 सीटों पर मतदान नहीं हुआ इसलिए कुल सीटें: 222

एचडी कुमारस्वामी 2 सीटों से जीते इसलिए सदन में कुल विधायकों की संख्या: 221

अगर 14 विधायक फ्लोर टेस्ट के दौरान सदन से गैरहाजिर हो जाएं तो विधायकों की संख्या: 207

सदन में विधायकों की संख्या 207 होने पर बहुमत का आंकड़ा: 104

बहुमत का आंकड़ा भाजपा के पास: 104

कांग्रेस-जेडीएस के पास क्या हैं विकल्प?

- जेडीएस-कांग्रेस को अपने सभी 116 विधायकों को एकजुट रखना होगा। कांग्रेस ने बुधवार देर शाम अपने सभी विधायकों को बेंगलुरु के पास इगलटन रिसॉर्ट में इकट्ठा भी कर लिया। सभी को एक बस में वहां ले जाया गया।

मौजूदा स्थिति : भाजपा सबसे बड़ी पार्टी, बहुमत से 8 सीटें दूर

- राज्य में कुल सीटें 224 हैं। बहुमत के लिए 113 जरूरी।

- 2 सीटों पर मतदान बाकी है। इसलिए बहुमत का आंकड़ा 112 है।

पार्टी 2018 2013 अंतर
कांग्रेस 78 122 - 44
भाजपा 104 40 +64
जेडीएस+ 38 40 -2
अन्य 02 22 -18

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आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, बुधवार को कैसे दिनभर चली कश्मकश....

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दिनभर चली सियासी कश्मकश

 

मीटिंग में नहीं पहुंचे जेडीएस के विधायक: बुधवार को जेडीएस की विधायक दल की बैठक में जेडीएस के 2 विधायक राजा वेंकटप्पा और वेंकट राव नहीं पहुंचे।

राज्यपाल से मिले येदियुरप्पा: भाजपा विधायक दल की बैठक में येदियुरप्पा को दल का मुखिया चुना गया। उन्होंने मीटिंग के बाद राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। उनके प्रतिनिधिमंडल में प्रजनवंता पक्ष के विधायक आर शंकर भी दिखाई दिए।

कांग्रेस ने भाजपा विधायकों के समर्थन का दावा किया: कांग्रेस के एमबी पाटिल ने कहा कि भाजपा के 6 विधायक उनके संपर्क में हैं। 

भाजपा पर खरीद-फरोख्त के आरोप लगे: जेडीएस चीफ एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि वे लोग (भाजपा नेता) पार्टी के विधायकों को 100-100 करोड़ रुपए  का ऑफर दे रहे हैं। अगर वे हमारे 10 विधायक तोड़ेंगे, तो हम 20 छीन लेंगे। इससे पहले कांग्रेस के एक विधायक अमरेगौड़ा लिंगानागौड़ा पाटिल बाय्यापुर ने कहा कि भाजपा नेताओं ने उन्हें मंत्री पद का ऑफर दिया था। 

 

शाम को राज्यपाल से मिलीं कांग्रेस-जेडीएस

- जेडीएस और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने शाम को राज्यपाल से मुलाकात की। इसके बाद कुमारस्वामी ने कहा कि हमने सरकार बनाने का दावा पेश किया है। हमने राज्यपाल से कहा कि हमारे पास सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत है। 

कुमारस्वामी ने कहा- ‘‘कर्नाटक में कोई मोदी लहर नहीं है। भाजपा की अश्वमेध यात्रा उत्तर से शुरू हुई, लेकिन कर्नाटक में हमने उसके घोड़े रोक दिए। ये जनादेश भाजपा की अश्वमेध यात्रा रोकने के लिए है। भूल जाइए कि ऑपरेशन कमल कामयाब होगा।’’

 

भाजपा-कांग्रेस ने लगाए आरोप

 

हमें नसीहत ना दें राहुल-सोनिया- रविशंकर प्रसाद

- रविशंकर प्रसाद ने देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "जब किसी सरकार को बहुमत नहीं है तो किस को सरकार बनाने का मौका मिलेगा? ऐसे में राज्यपाल और राष्ट्रपति दोनों के पास विवेकाधिकार है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बंधन नहीं लगाया, बस इतना कहा है कि ये निर्बाधित नहीं होना चाहिए और उसकी एक मर्यादा होनी चाहिए। दरअसल, कांग्रेस कर्नाटक में सत्ता सुख का लोभ छोड़ नहीं पा रही है, ऐसा क्यों है आप भी समझ रहे हैं। जिस पार्टी ने खुद संविधान तोड़ा, देश में सबसे ज्यादा बार राष्ट्रपति शासन लगाया, वो हमें पाठ पढ़ा रही है। राहुल गांधी तो दो दिन से गायब हैं। राहुल अपनी विरासत की बात बहुत करते हैं। 1989 में जब लोकसभा का चुनाव हुआ था, तब वीपी सिंह पीएम बने थे। तब राजीव गांधीजी की सीटें वीपी सिंह से ज्यादा थीं। अगर राजीव चाहते तो सरकार का दावा कर सकते थे, लेकिन उन्होंने कहा कि मैंडेट हमारा नहीं है। क्या राहुल अपने पिता की परंपरा भूल गए? राहुल और सोनिया जब आप हमें देश की परंपरा सिखाती हैं, तब हम आपको परिवार की परंपरा सिखाते हैं। हमें शिक्षा देना बंद करें।”

 

मोदीजी और शाहजी ने प्रजातंत्र की हत्या कर डाली- रणदीप सुरजेवाला

- इन सबसे पहले भाजपा को राज्यपाल के बुलावे के बाद कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "जेडीएस-कांग्रेस के पास 117 विधायकों का स्पष्ट बहुमत है। लेकिन, वजूभाई भाजपा के मुखौटे और उनका हुक्म बजाने वाले एक कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रहे हैं ना कि संविधान की सुरक्षा करने वाले के तौर पर। आज फिर श्री मोदीजी और शाह जी ने ना सिर्फ प्रजातंत्र की हत्या कर डाली। संविधान और कानून को अपने व्यक्तिगत और पार्टी के स्वार्थ के लिए पांव तले रौंद डाला। कर्नाटक की जनता और देश के लोग संविधान और कानून को रौंदने की इस प्रथा को स्वीकार नहीं करेंगे। इसकी सजा भाजपा को, गवर्नर वाला जी को, और भाजपा के बीएस येदियुरप्पा को जनता के जरिए जरूर मिलेगी।"

 

क्या है ऑपरेशन कमल?

- 2008 में भाजपा के पास बहुमत के लिए जरूरी 113 से 3 सीटें कम थीं। तब उसने ‘ऑपरेशन कमल’ चलाकर सरकार बना ली थी।
- कहा जाता है कि तब भाजपा ने दल-बदल कानून से बचने के लिए कांग्रेस के 3 और जेडीएस के 4 विधायकों को इस्तीफा देने के लिए राजी कर लिया था। उन्हें भाजपा के टिकट से दोबारा चुनाव लड़ाया गया। इनमें से 5 विधायक जीत गए। इस तरह भाजपा 110 से बढ़कर 115 सीटों पर पहुंच गई।

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