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बहला-फुसलाकर प्रॉपर्टी अपने नाम करवा ली तो पैरेंट्स को है वापस पाने का हक

हर बच्चे की अपने मां और पिता के लिए कुछ जिम्मेदारियां होती हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 12, 2018, 09:51 PM IST

  • बहला-फुसलाकर प्रॉपर्टी अपने नाम करवा ली तो पैरेंट्स को है वापस पाने का हक
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    न्यूज डेस्क। आज मदर्स डे है। हर बच्चे की अपने मां और पिता के लिए कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। इन जिम्मेदारियों को निभाने से पति को पत्नी भी नहीं रोक सकती। यदि कोई बच्चा अपने पैरेंट्स को बहला-फुसलाकर या धोखे से प्रॉपर्टी अपने नाम करवा लेता है, और बाद में उन्हें घर से निकाल देता है तो पैरेंट्स को प्रॉपर्टी वापस पाने का हक भी होता है।

    पति को माता-पिता से अलग करने के एक मामले में, सुप्रीम कोर्ट भी फैसला दे चुका है। जब कोर्ट ने कहा था कि, यदि कोई पत्नी, पति को माता-पिता और परिवार से अलग करने के लिए मजबूर करती है, तो यह 'क्रूअल्टी' (क्रूरता) मानी जाएगी। वो भी सिर्फ इसलिए कि वह पति की इनकम से एंजॉय करना चाहती है। इस आधार पर हिन्दू पति, पत्नी को तलाक दे सकता है।

    पैरेंट्स की देखरेख, बेटे का दायित्व...

    - कोर्ट ने कहा था कि, हिंदू समाज की मान्यताओं के तहत, बेटे का दायित्व है कि पैरेंट्स की बेहतर देखरेख करे।
    - भारत में अब भी लोग वेस्टर्न कल्चर से सहमत नहीं है, जिसमें बेटा बालिग होने और शादी होने के बाद पैरेंट्स से अलग रहने लगता है।

    - हिंदू लॉ के तहत कोई भी महिला बेटे को उसके मां-बाप के प्रति पवित्र दायित्वों के निर्वहन से मना नहीं कर सकती।
    - पत्नी इस आधार पर भी पति को परिवार से अलग नहीं कर सकती कि वह अपने पति की इनकम का पूरा उपभोग नहीं कर पा रही।
    - बिना किसी ठोस कारण के बेटे को पैरेंट्स से अलग नहीं किया जा सकता।

    प्रॉपर्टी वापस पाने का भी हक, देखिए अगली स्लाइड में...

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    प्रॉपर्टी वापस पाने का भी हक...

    - हाईकोर्ट एडवोकेट (इंदौर, एमपी) संजय मेहराने बताया कि बुजुर्ग संरक्षण अधिनियम के तहत यह प्रावधान है कि, यदि कोई बच्चा अपने पैरेंट्स को बहला-फुसलाकर या धोखे से प्रॉपर्टी अपने नाम करवा लेता है, और बाद में उन्हें घर से निकाल देता है तो पैरेंट्स को प्रॉपर्टी वापस पाने का हक होता है। इसमें कलेक्टर को भी पावर दिए गए हैं। कब्जा दिलवाने का काम कलेक्टर के जरिए होता है।

    - वहीं एक पत्नी को पति की पैतृक संपत्ति में हिस्सा पाने का हक होता है। किसी भी पत्नि को इससे रोका नहीं जा सकता। इसके अलावा पति ने जो संपत्ति अर्जित की है, यदि उसकी कोई वसीयत नहीं की और उनकी मृत्यु हो जाती है तो बच्चों के साथ ही मां का भी उस प्रॉपर्टी पर अधिकार होता है।

    - माता-पिता यदि बच्चों पर डिपेंड हैं तो लड़का हो या लड़की उन्हें पैरेंट्स के भरण-पोषण की व्यवस्था करना होगी। इसमें सीआरपीसी की धारा 125 लागू होती है।

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