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मनोहर पर्रिकर ने कहा- क्या मैं सेना से कहता कि सर्जिकल स्‍ट्राइक के लिए राहुल गांधी को साथ ले जाएं

5 वर्ष पहले
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- सर्जिकल स्ट्राइक के समय पर्रिकर रक्षा मंत्री थे

- उड़ी सैन्य शिविर पर आतंकी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक किया गया था

 

 

पणजी. गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर एक बार फिर विपक्ष पर हमला बोला। सोमवार देर शाम को भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने कहा- "मैं सर्जिकल स्ट्राइक पर राजनीति नहीं चाहता। विपक्षी पार्टियां कहती हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुई। इनकी नकारात्मकता को देखिए। क्या मुझे आपको (विपक्ष को) साथ ले जाना चाहिए था। मुझे सेना से कहना चाहिए था कि राहुल गांधी को साथ ले जाएं और सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दें।" आर्मी ने सितंबर 2016 में एलओसी के पार सर्जिकल स्ट्राइक किया था। पर्रिकर उस वक्त रक्षा मंत्री थे। 

पर्रिकर ने बताया, ''सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में सबसे बड़ी बात गोपनीयता है। मैं, प्रधानमंत्री, सेना प्रमुख और डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस, हम चार इसके बारे में जानते थे। हम चारों दिल्ली में थे। कोर कमांडर, सेना के कमांडर और जिन्होंने इसे अंजाम दिया, वे लोग श्रीनगर में थे। हमें इसके लिए तेजी से तैयारी करनी पड़ी, क्योंकि इन चीजों में ज्यादा वक्त नहीं लगाया जा सकता था।" 

 

विपक्ष आरोप लगाता रहा है: सर्जिकल स्ट्राइक पर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेरता रहा है। कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार सेना के जवानों के बलिदान, पराक्रम और साहस का इस्तेमाल राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए कर रही है। उधर, इस मुद्दे पर भाजपा का कहना है कि सेना का मनोबल तोड़ना कांग्रेस की नीति है।

 

आर्मी ने 38 आतंकियों को मार गिराया था: आर्मी ने 2016 में 28 और 29 सितंबर की रात एलओसी पार कर पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक किया था। 125 पैरा कमांडोज ने 3 किलोमीटर अंदर घुसकर आतंकियों के 7 ठिकाने तबाह किए थे और 38 आतंकियों को मार गिराया था। जवानों की टीम ने रेंगते हुए एलओसी पार की थी ताकि दुश्मन को इसकी भनक न लगे। चार अलग-अलग इलाकों में मौजूद कैम्पों पर अलग-अलग टीम ने एक साथ, एक वक्त पर हमला किया था।

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