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महज एक साल में साढ़े 5 करोड़ भारतीय इलाज का बिल भर-भरके गरीब हो गए- स्टडी

बिना संक्रमण के फैलने वाली बीमारियों जैसे कैंसर, हार्ट की बीमारी और डायबिटीज के इलाज में लोगों ने ज्यादा पैसे खर्च किए।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 13, 2018, 04:26 PM IST

महज एक साल में साढ़े 5 करोड़ भारतीय इलाज का बिल भर-भरके गरीब हो गए- स्टडी, national news in hindi, national news
  • सिर्फ एक साल में साढ़े 5 करोड़ भारतीय इलाज कराकर गरीब हुए।
  • 3.8 करोड़ लोग सिर्फ दवाओं पर खर्च कर गरीबी रेखा से भी नीचे आए।
  • पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की एक स्टडी में किया गया दावा।

नई दिल्ली. महज एक साल में साढ़े 5 करोड़ भारतीय सिर्फ इसलिए गरीब हो गए, क्योंकि उन्हें इलाज में काफी पैसा खर्च करना पड़ा। वहीं, इसमें से 3 करोड़ 80 लाख लोग सिर्फ दवाओं पर खर्च कर गरीबी रेखा से भी नीचे चले गए। ये दावा पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की एक स्टडी में किया गया है।

- ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपी इस स्टडी में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि बिना संक्रमण के फैलने वाली बीमारियों जैसे कैंसर, हार्ट की बीमारी और डायबिटीज के इलाज में लोगों ने ज्यादा पैसे खर्च किए।

- स्टडी के मुताबिक, रोड एक्सिडेंट और अन्य हादसों के चलते गरीबों को सबसे ज्यादा खर्च करना पड़ा।

इन आंकड़ों पर हुई स्टडी
इस स्टडी में जिस डाटा का अध्ययन किया गया है वो दो जगहों से लिए गए हैं। पहला डाटा देशभर में उपभोक्ता खर्च सर्वे का था, जो 1993-94 से लेकर 2011-12 के बीच किए गए। वहीं दूसरा सर्वे 2014 में नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन ने करवाया था।

दवा पर खर्च का बोझ
देश में सरकारी अस्पतालों में दवा मुफ्त मिलती है। बावजूद इसके दवा पर खर्च भारतीयों को कमर तोड़ रहा है।

मेडिकल इंश्योरेंस का भी फायदा नहीं
सरकार की तरफ से कई हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम चलाई जा रही है। हालांकि, इसके बाद भी आबादी का एक बड़ा तबका दवा का बहुत सारा खर्च खुद उठा रहा है। क्योंकि इन इंश्योरेंस स्कीम के तहत हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद ही ट्रीटमेंट का खर्च कवर होता है। जबकि बिना संक्रमण के फैलने वाली बीमारियों में अक्सर एडमिट होने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

सरकारी स्टोर्स पर स्टॉक नहीं
सरकार देश के लोगों को सस्ती दवाइयां देने के मकसद से जनऔषधि दुकानें खोल रही है। स्टडी के मुताबिक करीब 3 हजार दुकानें खुल भी चुकी हैं, लेकिन परेशानी ये है कि यहां भी दवाइयों का स्टॉक नहीं होता। या फिर लोगों को क्वालिटी से समझौता करना होता है। ज्यादातर स्टोर्स पर बमुश्किल 100 से 150 फॉर्म्यूला की दवाइयां ही मिलती हैं। जबकि 600 के ऊपर फॉर्म्यूले का वादा किया गया था।

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